प्रकृति को जानें

इंसान को हमेशा तरोताजा रहने के लिए जरूरी है कि वह अपने आस-पास के परिवेश को जानें, समझें और इसके माध्यम से ज्ञानार्जन तथा अनुभवों का लाभ लेते हुए व्यक्तित्व विकास के इन बुनियादी तत्वों को जीवन भर  अमल में लाए तथा इनके माध्यम से प्रकृति और परिवेश का भरपूर आनंद प्राप्त करे।

आदमी के लिए यह जरूरी है कि वह रोजाना अपनी दिनचर्या का निर्वाह करते हुए परिवेश और प्रकृति का आनंद प्राप्त करे ताकि उसे जीवन जीने का पूरा-पूरा सुकून प्राप्त हो सके। यही वह सुकून है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने पुरुषार्थ चतुष्टय को सुनहरा आकार देने के प्रयासों को तीव्रतर करने का संतोष प्राप्त कर सकता है।

जीवन में हमेशा ताजगी और सुकून पाने के लिए यह जरूरी है कि हम अपनी जड़ता को समाप्त करें और पूर्ण चेतन अवस्था में रहकर कर्मयोग को सफल बनाएं।  जो लोग एक ही स्थान के मोह में बंधे होते हैं, आलस्य के मारे परिभ्रमण से कतराते हैं, यहाँ तक कि रोजाना कुछ कदम चलने तक में परहेज रखते हैं उन लोगाें के लिए जीवन अपनी परिधियों में सिमट कर रह जाता है तथा जिन्दगी भर ये कछुवा छाप होकर एक ही जगह पड़े रहने के आदी हो जाते हैं।

इन लोगों के लिए  न जमाने का कोई मतलब होता है, न कुछ जानने की जिज्ञासा शेष होती है और न ही नया ज्ञान पाने या हमेशा अपडेट रहने की मानसिकता। ऎसे लोग यथास्थितिवादी होकर जड़त्व को ओढ़ लिया करते हैं और यहीं से उनकी जिन्दगी अभिशप्त हो जाया करती है, थोड़ा भी हिलना-डुलना इन्हें पसंद नहीं होने से शरीर की हड्डियों और माँसपेशियों को भी यह महसूस हो जाता है कि अब इस शरीर से कोई ज्यादा काम लेने या चलने-फिरने की क्षमताओं का उपयोग करने का कोई माद्दा नहीं रहा, इसलिए शरीर के ये सारे अवयव भी शिथिलता को अंगीेकार कर लिया करते हैं।

मानसिक और शारीरिक शिथिलताएं मिलकर ऎसे व्यक्ति को जड़त्व और शैथिल्य का अभिशाप दे डालती हैं। आजकल हममेें से खूब लोग ऎसे हैं जो जड़त्व को सहर्ष अंगीकार करते जा रहे हैं और उसका नतीजा भी भुगत ही रहे हैं।

एक स्थान का मोह भले रखें मगर अपने जीवन को हमेशा मस्त बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि जहाँ हम रहते हैं या आते-जाते हैं वहाँ निरन्तर चेतन बने रहने का कोई न कोई  ऎसा काम जरूर करते रहें जिससे कि किसी न किसी बहाने  नयापन बना रहे।

इसके लिए सबसे आसान उपाय यही है कि रोजाना अपने क्षेत्र में किसी एक धार्मिक, प्राकृतिक, पुरातात्विक, सामाजिक, सांस्कृतिक और दर्शनीय स्थल, जलाशय, किसी सकारात्मक प्रयोग, प्रेरक स्थल आदि को देखें तथा इनकी जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करें।  इससे भ्रमण और ज्ञानार्जन, जिज्ञासा शमन और क्षेत्र अनुभव सभी प्रकार का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

इसका दूसरा बड़ा फायदा यह होगा कि एक ही स्थान पर जमे रहकर दुनिया भर की चर्चाएं करते हुए टाईमपास  जिंदगी जीने की बजाय हर दिन कुछ न कुछ नया अनुभव होगा, नवीन जानकारी सामने आएगी और एक समय ऎसा आ सकता है कि जब हमें अपने क्षेत्र का संदर्भ कोष के रूप में ही प्रतिष्ठा प्राप्त होकर ऎतिहासिक कीर्ति का अहसास होने लगे।

जो लोग अपने जीवन में परिव्राजक की भूमिका में होते हैं वे ज्ञान और अनुभवों से समृद्ध होते जाते हैं और इन लोेगों का व्यक्तित्व अपने आप निखरने लगता है। इंसान को निखारने में क्षेत्रीय भ्रमणों का हमेशा महत्त्व  रहा है और यही कारण है कि जो व्यक्ति जितना अधिक परिभ्रमण करता है वह उतना ही ज्ञानी, अनुभवी और मस्त होता है।

भ्रमण का सीधा संबंध ताजगी, सेहत और व्यक्तित्व विकास से है और इसलिए हम सभी को चाहिए कि रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ ऎसा नियम निर्धारित जरूर कर लें कि जिसकी वजह से  निरन्तर भ्रमण होता रहे।

यह भ्रमण यदि एक ही स्थल के लिए होगा तो नवीनता नहीं होने से इसका कोई फायदा सामने नहीं आ पाएगा। इसलिए ज्यादा उपयुक्त यह होगा कि रोजाना कोई न कोई एक नया स्थल देखने का मानस बनाएं।

 इससे कई प्रकार के फायदों का आनंद पाते हुए पूरी जिन्दगी को सुकूनदायी स्वरूप प्रदान कर सकते हैं। हममें से हर आदमी यदि रोजाना के क्रम को अपना ले तो उसका आनंद बहुगुणित होने में कोई संशय नहीं रहने वाला।