सब जगह विद्यमान हैं  किम जोंग

सब जगह विद्यमान हैं किम जोंग

पिछले कुछ समय से वैश्विक परिदृश्य में सर्वत्र नार्थ कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग सुर्खियों में हैं। किम जोंग जैसे व्यक्ति से पूरी दुनिया को खतरा पैदा हो गया है और इसे तीसरे विश्वयुद्ध की भूमिका के रूप में देख कर कयास लगाए जा रहे हैं।

एक अकेले आदमी ने दुनिया की सभी महाशक्तियों की नाक में दम कर रखा है। संसार भर का चिन्तित हो जाना स्वाभाविक भी है क्योंकि हमारे ही पुरखों ने हिरोशिमा और नागासाकी को देखा है, दुनिया में विध्वंसकारी और आतंकवादी ताकतों के संहार और विध्वंस को सुना व देखा है तथा आज भी कितने ही मुल्कों के भीतर और बाहर साम्राज्यवादी और हिंसक शक्तियों द्वारा किए जा रहे खुलेआम कत्ल को देख कर व्यथित हो रहे हैं।

हर राष्ट्र आज अपनी ढेर सारी भीतरी समस्याओं और अभावों से जूझने के साथ ही उन ताकतों से दो-चार हो रहा है जिन्हें कट्टरपंथी और आतंकवादी माना जाता है। वैश्विक धरातल से लेकर स्थानीय परिप्रेक्ष्य में जात-पात, भाषा, बोली, अधिकारों, सीमाओं की सुरक्षा, गद्दारों की करतूतों, चापलुसी, चमचागिरी, हरामखोरी, भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से लेकर अनाचार, अत्याचार, शोषण, अन्याय और तमाम प्रकार की दुर्भाग्यजनक स्थितियों का बोलबाला है।

अमन-चैन की सहज-स्वाभाविक उपलब्धता पलायन करती जा रही है और इनका स्थान ले लिया है अशांति, असन्तोष और न्यूनाधिक अराजकता ने। इन सभी भयावह और अनचाहे हालातों के लिए कई सारे पहलू जिम्मेदार हैं। लेकिन इस सत्य को भी स्वीकारना ही होगा कि आज किम जोंग जैसे लोग दुनिया में सभी स्थानों पर मुँह निकाले मानवता को चिढ़ा रहे हैं।

किम जोंग के रक्तबीज संसार भर में बड़ी संख्या में बिखरे पड़े हैं। हर जगह खूब सारे हैं जिन्हें अपने किसी पूर्वजन्म के या पुरखों के भाग्य से और समाज, क्षेत्र तथा देश के दुर्भाग्य से थोड़ा-बहुत पॉवर क्या मिल गया, अपने अहंकारों के मद में इतने अधिक चूर हो गए हैं कि इनके भीतर की इंसानियत, मानवीय संवेदनाएं, सिद्धान्त, आदर्श और मंगलकारी भावनाओं से लेकर सब कुछ चूरा-चूरा हो चुका है।

पूरी दुनिया में हजारों की संख्या में स्त्री-पुरुष हैं जिनमें हमें किम जाेंग नज़र आता है। इन लोगों को यही लगता है कि ये संसार में पिशाचों, भूत-भूतनियों और राक्षस-राक्षसियों की तरह व्यवहार करते हुए अराजकता फैलाने और लोगों को तंग करने के लिए ही पैदा हुए हैं, इसके सिवा उनका जिन्दगी भर के लिए और कोई कत्र्तव्य कर्म शेष है ही नहीं।

असंख्य लोग किम जोंग किस्म के स्त्री-पुरुषों से परेशान हैं। इन्हें स्त्री या पुरुष मानना भी अपराध है क्योंकि इनमें न पुरुषत्व का कोई अंश शेष रहा है, न स्त्रीत्व का। मनोवैज्ञानिक तथ्य यह भी है कि नपुसंक स्ति्रयां अपने आपको कामुक और सृजन में समर्थ दर्शाने के लिए स्त्रैण विलक्षणताओं का कृत्रिम प्रदर्शन करती हुई दुनिया को भरमाने के लाख-लाख जतन करती रहती हैं।

दूसरी ओर नपुंसक पुरुष भी अपने आपको पुरुषत्व सम्पन्न और वीर्यवान दिखाने के लिए बहुत कुछ ऎसा करते रहते हैं जिसे आडम्बरी माना जाता है।

जो इंसान जितना अधिक कमजोर, प्रतिभाहीन और सनकी होता है वह खुद को सर्वशक्तिमान और महान मानने-मनवाने तथा अपने प्रभाव और प्रभुत्व को दर्शाने के लिए आतंक, दबाव और शोषण का सहारा लेता है और तरह-तरह की दमनकारी हरकतें करता रहता है ताकि उसका वजूद और प्रभाव बना रहे।

किम जोंग केवल नॉर्थ कोरिया में ही नहीं है बल्कि विभिन्न रूपों में बहुत बड़ी संख्या में हमारे आस-पास भी विद्यमान हैं।  कभी अपने बॉस या बॉसी में हमें किम जोंग नज़र आता है, कभी हमारे से ऊपर वालों और कभी नीचे वालों से लेकर साथ काम करने वालों में उसकी छाया दिखती है।

किम जोंग को ही दोष क्यों दें, वे सारे लोग किम जोंग से किसी तरह कम नहीं हैं जो अपने आपको संप्रभु और सर्वाधिकार सम्पन्न मानकर दूसरे लोगों को अपना दास या नौकर-चाकर मानकर बेवजह क्रूर व्यवहार कर अपनी साख को बनाए रखना चाहते हैं और अपने से संबंधित सभी लोगों को बिना किसी कारण के तंग करते रहकर उनकी जिन्दगी में अभिशाप के बदरंग घोल देना ही अपनी सफलता मानते हैं।

जो लोग बड़े-बड़े दुष्टों व राक्षसों की सरपरस्ती में अपने अधिकारों और शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए लोगों को तंग करते हैं, अन्याय, अत्याचार और शोषण ढाते हैं वे सारे लोेग किसी न किसी रूप में किम जोंग की तरह ही हैं और ऎसे लोग ही सामाजिक अपराधों और परिवेशीय अशांति के लिए जिम्मेदार हैं।

इन लोगों द्वारा प्रताड़ित और हतोत्साहित होने वाले प्रतिभाशाली लोग दुःखी होकर अपने कत्र्तव्य कर्म से पलायन कर जाते हैं और समाज, क्षेत्र तथा देश इन प्रतिभाओं के सृजनधर्मा कर्म से वंचित रह जाता है।  ऎसे किम जोंग जैसे सनकी, अतृप्त और पैशाचिक वृत्ति वाले लोगों के कारण से ही समाज और देश को सज्जनों और अच्छे कर्मयोगियों की सेवाओं से वंचित होना पड़ रहा है।

यही कारण है कि किम जोंग कल्चर में पले-बढ़े दुष्टों के कारण से समाज और देश अपेक्षित तरक्की नहीं कर पा रहा है और बहुत सारे लोग बिना किसी कारण के इन राक्षसों और राक्षसियों के क्रूर और हिंसक स्वभाव और व्यवहार से दुःखी, सन्तप्त और अवसादग्रस्त होते हुए तनावों के दौर से गुजर रहे हैं और इस कारण से मानसिक और शारीरिक व्याधियों से ग्रस्त होकर अपने जीवनकाल का क्षरण होते देख रहे हैं।

समाज, क्षेत्र और राष्ट्र से लेकर पूरी दुनिया का भला और कल्याण तभी संभव है कि जब संसार भर में व्याप्त किम जोंग जैसी खरपतवार का उन्मूलन हो जाए।  आज की दुनिया को ऎसे अभियान की जरूरत है जो हर तरफ पसरे हुए किम जोंग का सफाया कर डाले, तभी मानव भी सुरक्षित रह सकते हैं और मानवाधिकार भी।

अन्यथा जब तक यह जहरीली, संक्रामक और घातक खरपतवार बरकरार रहेगी तब तक इंसान, परिवेश, क्षेत्र और देश के विकास की सारी बातें खोखली बनी रहेंगी।

जो लोग किम जोंग की तरह सनकी और तानाशाही, अधिनायकवादी सोच रखते हुए विभिन्न रूपों में आतंक मचा रहे हैं उन्हें भी सोचना चाहिए कि एक दिन उनको भी मिट्टी में मिल जाना है। यह चाँदनी चार दिन की ही है, इसके बाद तो राम नाम सत्य होना ही है। भगवान के घर देर है, पर अंधेर नहीं।

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