खात्मा करें खरपतवार का

अपने देश की सारी समस्याओं के लिए पूरी जनसंख्या में विद्यमान चंद प्रतिशत लोग ही जिम्मेदार हैं जो जहरीली झाड़ियों और खरपतवार के रूप में हर तरफ जड़ें जमाये हुए हैं। ऎसे लोग सर्वत्र पाए जाते हैं और अनचाहे ही दिखते रहते हैं।

समाज और देश में कोई सा काम हो, इन लोगों को वो हर अच्छा काम गले नहीं उतरता जो सत्यं शिवं और सुन्दरं का दिग्दर्शन कराता है। इन लोगों के लिए अपनी जिन्दगी ही पूरी दुनिया है और ये मानते रहे हैं कि जब तक वे हैं तभी तक दुनिया है, बाद में किसने देखा।

ऎसे लोग सिर्फ अपने और अपने ही कामों, स्वार्थों के लिए पूरी जिन्दगी खपा दिया करते हैं। कभी औरों पर दबाव, कभी शोषण और कभी अनुचित हथकण्डों और गोरखधंधों से ये लोग हमेशा मुख्य धारा में आने को लालायित रहा करते हैं।

इनमें सभी प्रकार के लोग हैं। ऎसे लोगों के लिए जिन्दगी और उसका मकसद सिर्फ अपने लिए जीना, अपने जीने के लिए औरोंं को मारने तक को तैयार रहना तथा दुनिया के तमाम षड़यंत्रों का इस्तेमाल अपने हक में कर डालना ही रह गया है।

समाज या क्षेत्र का कोई सा अच्छा काम हो, जब भी कोई कहीं भी अच्छा काम करने की कोशिश करता है, ये लोग अपनी भिन्न-भिन्न मुद्राओं में स्पीड़ ब्रेकर की तरह सामने आ जाते हैं जैसे कि जमीन में गड़ा धन निकलने ही वाला होता है तब जाने किस-किन रंग-रूपाकारों के भयंकर विषैले भुजंग फुफकारते हुए सामने आ जाया करते हैं।

ऎसे ही विषधारी और बकवास करने वाले भुजंग आजकल समाज के अच्छे कामों में आगे आकर अड़ जाया करते हैं।  समाज में कुछ लोगों का चरित्र ही आजकल ऎसा हो गया है कि वे खुद तो कभी अच्छा काम करने की सोच भी नहीं सकते, उल्टे जो लोग अच्छे कामों को करने की तरफ डग बढ़ाते हैं उनके पाँव काटने और राह रोकने में हमेशा तत्पर रहा करते हैं।

आजकल ऎसे लोगों को हर तरफ देखा जा रहा है। इनमें से अधिकांश लोगों का अपना कोई वजूद नहीं होता बल्कि ये औरों के दम पर इठलाते हुए ऎसे आते हैं जैसे कि भगवान ने यह दुनिया इन्हीं लोगों को चलाने के लिए ठेके पर दी हो। 

और इनमें भी ढेरों नगीने ऎसे होते हैं कि जो इस भ्रम में जीते हैं कि भगवान ने ही उन्हें दुनिया को चलाने के लिए भेजा हुआ है इसलिए समाज, परिवेश और संसार में वही सब कुछ हो जो कि वे चाहते हैं। इनकी चाहत को ये हर कीमत पर पूरी करने-करवाने के लिए अपनी पूरी शक्ति झोंक दिया करते हैं। ऎसे में यदि कहीं इनकी कही न हो, मनमानी न चले तो ये ऎसे प्रतिशोध पर उतर आते हैं कि जैसे कई सारे पुराने जन्मों की जाती दुश्मनी ही हो।

हर क्षेत्र में कई सारे ऎसे राक्षसी लोग पैदा हो गए हैं जो अच्छे कामों में बाधक बनकर पीढ़ियों का विकास रोक दिया करते हैं। हमारे आस-पास भी ऎसे राक्षस खूब सारे हैं। कुछ जाने-पहचाने, और शेष सारे छुपे हुए। आज यही लोग समाज और देश की सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने हैं।

इन सभी प्रकार की जहरीली खरपतवार का समूल नाश किए बगैर हम आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और स्वच्छ परिवेश प्रदान नहीं कर सकते। गीता में कही भगवान की वाणी का स्मरण करें और इन असुरों के संहार के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति से आगे आएं।  इनका समूलोच्छेदन असंभव कदापि नहीं है, बस इसके लिए हम सभी का एक साथ मिलकर सामूहिक प्रयास जरूरी है। एक बार तय कर लें बस।

यह तय मानकर चलें कि जहाँ कहीं ये खरपतवार होगी वहाँ न कोई फसल अच्छी रह सकती है, न आबोहवा और न ही परिवेशीय माहौल। खरपतवार के बारे में यह भी माना जाता है कि इसकी असंख्य किस्मे हैं जिन्हें उगाना नहीं पड़ता है बल्कि जहाँ कहीं  नकारात्मक तत्व और कूड़ा-कचरा जमा हो जाता है वहाँ इनका अवतार हो ही जाता है।

फिर खरपतवार की कोई एक किस्म हो तो कोई बात हो, यहाँ तो खरपतवार की असंख्य जहरीली किस्में विद्यमान हैं जिनकी थाह पाना भी मुश्किल है और खरपतवार के रूप में उजागर करना भी आफत भरा है। खरपतवारी संबंध इतने अधिक मजबूत की फेविकोल से लेकर अजगरी जकड़न तक इसके आगे बौनी है। तिस पर यह कि खरपतवार बहुगुणित होकर पनपती और पसरती हे इसलिए इनका साम्राज्य अपने आप में दुनिया के लिए उसी तरह का बहुत भयानक खतरा है जिस तरह ओजोन परत में छिद्रों का।

इसे देखते हुए इनका खात्मा मुश्किल है। इसके लिए तो मगरा स्नान की तरह पूरी की पूरी खरपतवार के इलाकों को भीषण दावानल के सहारे कर देना ही ठीक होगा ताकि इनका अंतिम संस्कार ही ऎसा हो जाए कि बाद में कुछ न बचे।

जिस बगीचे या खेत में खरपतवार सर उठाती बढ़ती जाती है उसके स्वामी को सबसे कमजोर माना जाता है। उसके खेत-खलिहान भी मुस्कराना भूल जाते हैं। इसलिए समय आ गया है कि जब खरपतवारों के खात्मे का अभियान चलाया जाए और ऎसा निर्णायक अभियान चले कि खरपतवारों की न भस्मी कहीं दिखे, न दुबारा उनकी दुर्गन्ध से साक्षात हो।

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