खात्मा करें भिखारियों का

खात्मा करें भिखारियों का

जो दीन-हीन और हर तरह से विपन्न है उसे भीख मांग कर गुजारा करने का पूरा और पक्का अधिकार है। उसके लिए भीख ही है जो जीवन की सारी आवश्यकताओं को पूरा करती है और भीख न मिले तो इन लोगों का जीवन संकट में पड़ जाए।

भिखारी वही है जो आज की चिन्ता करता है और केवल आज भर के लिए मांग खाने को विवश रहता है। भिखारी वही है जो कल की कभी चिन्ता नहीं करता। असली भिखारी वही हैं जो केवल आज की बात करते हैं और  आज के दिन को गुजारने लायक भीख मांग लें और फिर आराम करने चले जाएं।

कल का दिन किसने देखा, कल फिर भीख मांग लेंगे। इस तरह के भगवान पर अगाध श्रद्धा और आस्था रखने वाले भिखारियों की संख्या बहुत कम है जो कि पूरी ईमानदारी और सिद्धान्त को सामने रखकर भीख मांगते हैं और कल की कभी कोई चिन्ता नहीं करते।

आजकल हम किसम-किसम के जो भिखारी हर तरफ देख रहे हैं उनके पास आज के लिए बहुत कुछ है और आने वाले दिनों, महीनों और वर्षों के लिए भी खूब संचित किया हुआ है फिर भी भीख मांगने और भीख पर जिन्दा रहने की प्रवृत्ति इतनी अधिक हावी है कि बिना भीख मांग या पाए इनका दिन नहीं निकलता।

आजकल संग्रही भिखारियों की संख्या पिछले सारे रिकार्ड पार करती जा रही है।  बहुत से लोग हैं जिनकी सारी आदतें भिखारियों की तरह ही नहीं बल्कि इनसे भी अधिक गई बीती हैं, मंगतों का यदि कोई अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार घोषित हो जाए तो ऎसे असंख्य लोग प्रतिस्पर्धा में बाजी मार लेंगे जो जिन्दगी भर भीख मांगते रहते हैं।

इन भिखारियों के लिए स्वाँग रचने, खुद को गरीब और दीन मानने-मनवाने की कोई जरूरत नहीं रहती बल्कि इनकी मनोवृत्ति और स्वभाव ही ऎसा हो गया है कि जो कोई इन्हें देखता है, सहसा कह उठता है कि इनसे बड़ा भिखारी शायद ही कोई होगा।

बहुत से लोग हर मामले में भीख और भिखारी धर्म को गौरवान्वित करते हुए नहीं थकते। ये जहाँ रहते हैं वहाँ के लोग भी इनकी भिखारी आदतों के कारण से परेशान रहा करते हैं। आज के इन भिखारियों के पास अपना कहने लायक बहुत कुछ है फिर भी भीख मांगने की वृत्ति इतनी अधिक हावी है कि हर हमेशा भिखारियों से भी गया बीता व्यवहार करते रहेंगे और ऎसे पेश आएंगे कि जैसे इन्हें आज कुछ नहीं मिला तो मर ही जाएंगे।

अपने परिश्रम और पुरुषार्थ से अर्जित धन के बिना संसार का हर व्यापार भीख ही है। वह हर कर्म हराम का और त्याज्य है जिसमें हमारे परिश्रम का पैसा नहीं लगा हो। बहुत से भिखारियों की यह आदत हो चली है कि बंधी-बंधायी बैंक में पड़ी रहे और दूसरे सारे खर्चे भीख से ही चल जाएं।

बात रहने, ठहरने, खाने-पीने, सफर, ऎशोआराम करने से लेकर दुनिया के तमाम प्रकार के भोग-विलास मुफ्त में मिलते रहें और परायों के पैसों पर ऎश करते हुए जिन्दगी की गाड़ी आगे से आगे चलती रहे।

इस वजह से लोगों में अब हरामखोरी और मुफ्तखोरी बढ़ती जा रही है और प्रकारान्तर से लूट-खसोट की प्रवृत्ति हावी होती जा रही है। छोटे ही नहीं बड़े-बड़े लोग भिखारियों की तरह जिन्दगी को हाँक रहे हैं।

इन लोगों के जीवन का एकमेव मकसद यही रह गया है कि चाहे जिस तरह से हो सके, पैसा जमा होते रहना चाहिए चाहे इसके लिए हमें किसी भी नीच से नीच भिखारी का स्वाँग ही क्यों न रचना पड़े। भीख के मामले में कोई किसी से नीचे नहीं रहना चाहता।

हर कोई भीख मांगने और मंगतों की जमात में शामिल होकर भीख लूटने के चक्कर में वह सब कुछ कर रहा है जो नीचे गिरा हुआ आदमी करता रहता है। खूब सारे हैं जो भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, दलाली, कमीशनखोरी आदि में पकड़े जाते हैं और अपने आपके भिखारी होने की पहचान को परिपुष्ट कर बेशर्मी का दिग्दर्शन कराते रहते हैं।

इन सारे लोगों की जन्मकुण्डलियों का गहरा ज्योतिषीय अध्ययन किया जाए तो इनके पूर्वजन्म का संकेत मिल ही जाएगी कि या तो ये उम्दा किस्म के भिखारी रहे होंगे या चोर-डकैत।

तभी तो इनकी यह आदत आज तक बरकरार है। बहुत से हैं जो भीख मांग-मांग कर समृद्ध हो चुके हैं लेकिन चालाकी के कारण पकड़ में नहीं आ सके हैं फिर भी इनकी आत्मा में अपराध बोध उन लोगों से कहीं अधिक है जो पकड़े जाते हैं और बदनाम होते हैं। इन चतुर भिखारियों और चोर-डकैतों, व्यभिचारियों, रिश्वतखोरों और भ्रष्टाचारियों के बारे में सभी लोग जानते हैं और इसलिए यह मान बैठते हैं कि ये लोग भिखारी से कम नहीं। इन भिखारियों का खात्मा किए बगैर देश का भला नहीं हो सकता।