स्मृति शेष – कमला बा

स्मृति शेष – कमला बा

जीवन और जगत के व्यवहारिक ज्ञान-अनुभवों की सदानीरा

वागड़ अंचल में आधे आसमाँ की पुरानी पीढ़ी में बहुमुखी विलक्षणताओं की बदौलत अपनी अन्यतम पहचान रखने वाली महिलाओं में ख़़ास किरदार रही श्रीमती कमला बा के निधन की खबर शोक और दुःख का अनुभव कराने वाली रही।

श्रीमती कमला बा जीवन के सभी पक्षों के ज्ञान और अनुभवों की वह दादी-नानी थीं कि जिनके पास हर मर्ज का ईलाज भी था और हर समस्या का समाधान भी।

कुशलतम पारिवारिक संगठन कौशल से लेकर समन्वय और सौहार्द का जीवन्त मार्गदर्शन भी था और कठोरतम अनुशासन की झलक भी।

कुल मिलाकर जीवन और जगत के तमाम सरोकारों के प्रति गहन और पैनी दृष्टि रखने वाली श्रीमती कमला बा अपने आप में अनुभवों और व्यवहारिक ज्ञान का वो खजाना थी जिसके पास हर प्रश्न का जवाब था और हर समस्या का सटीक हल।

श्रद्धेय अग्रज श्री भरतचन्द्र शर्मा एवं भाभी श्रीमती प्रमिला शर्मा और पूरे परिवार ने उनकी जिस श्रद्धा और उत्तरदायित्व की भावना से सेवा की, वह अपने आप में त्याग-तपस्या के साथ ही मातृभक्ति का अन्यतम और प्रेरणादायी उदाहरण है।

श्रीमती कमला बा का मुझ पर अखूट स्नेह था और दशकों से उनका सान्निध्य मिलता रहा। घर-परिवार से लेकर परिवेश और सभी तरह की चर्चाओं में उनसे हमेशा कुछ न कुछ सीखने को मिला।

कमला बा को भक्ति और भजन गायकी का शौक अंतिम क्षणों तक रहा। जब-जब भी उनके वहाँ जाना होता, वे दो-चार भजन सुनाए बिना नहीं रहती। यहां तक कि अंतिम दिनों से कुछ पहले भी उन्होंने  प्रेम  से भजन सुनाए।

वे जितनी भजनानंदी होकर भक्ति की बहिर्मुखी धाराओं में रमी रहने वाली थी उतनी ही मानसिक भक्ति में लीन होकर अन्तर्मुखी भी। पुराणों और धर्म ग्रंथों को पढ़ने तथा इन्हें और पौराणिक कथाओं को सुनने में उनकी दिलचस्पी अंतिम समय तक रही।

बच्चों से लेकर समकक्ष और बड़ों तक के प्रति उनका व्यवहार माधुर्य अनुकरणीय था।

2 comments

  1. पार्थ शर्मा

    दिपक जी : बाई के भजन का बहोत सुन्दर संग्रह है आपके पास, अभी 2 दिन पहले शमशान पर दादीजी को विदाई देते हुए लग रहा था की कभी उनको फिर सुन नहीं पाएंगे बस अब उनके दर्शन केवल तसवीर में ही हो सकेंगे।

    आपकी इस पहल से हम बाई के जाने के बाद भी उनको अपने साथ महसूस कर सकेंगे और उनके भजनों का आनंद ले सकेंगे।

    एक बार फिर आपका कोटि कोटि आभार