बांसवाड़ा का प्राचीनतम जाम्बवन्त मन्दिर

बड़े-बुजुर्गों के अनुसार बांसवाड़ा शहर के कालिका माता मन्दिर के ठीक बांयी ओर स्थित जाम्बवन्त मन्दिर प्राचीनकाल से श्रद्धा का केन्द्र रहा है। मान्यता है कि

जाम्बवन्त मन्दिर प्रेम और दाम्पत्य का सुख पाने वालों के लिए वरदान प्राप्ति का केन्द्र रहा है।

इसकी मूर्ति का स्वरूप हनुमानजी की तरह होने के कारण जानकारी के अभाव में लोग इसे हनुमान मन्दिर के रूप में मानते हैं और जाम्बवत को हनुमान मानकर पूजना आरंभ कर दिया है। बुजुर्गों के अनुसार यह जाम्बवन्त मन्दिर है और इसका अस्तित्व बांसवाड़ा की स्थापना के समय अथवा इससे पूर्व का है।

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