जय-जय राजसमन्द

नैसर्गिक रमणीय सौन्दर्य से लक-दक मनोहारी परिवेश, धर्म-अध्यात्म और कला-संस्कृति की बहुआयामी ऊर्जाओं से भरे, शौर्य-पराक्रम की गाथाएं गुंजा रहे और तीव्रतर विकास की दिशा में निरन्तर आगे बढ़ते हुए राजसमन्द जिले में व्यतीत बहुमूल्य क्षणों से प्रसूत धर्म-कर्म के ज्ञान और अनुभवों का दस्तावेज। इसमें कर्मयोग की सुगंध भी है और आनन्द का रह-रह कर उठता ज्वार भी। वाकई राजसमन्द अपने आप में देश और दुनिया का वह भौगोलिक क्षेत्र है जिसमें वह सब कुछ एक साथ समाहित है, जो दुनिया में और कहीं नहीं। शेष दुनिया से भी बढ़कर है राजसमन्द। राजसमन्द को बहुआयामी एवं शाश्वत सुकून का पर्याय कहना अधिक सटीक एवं प्रासंगिक है। मेरी राजसमन्द यात्रा का खुला चिट्ठा है यह सब कुछ।

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