रोचक घटना – जब सारे अतिथि और वक्ता ठगे से रह गए

वागड़ के रत्न ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता श्री पन्नालाल पटेल की जयन्ती पर विशेष प्रस्तुत

 

डूंगरपुर जिले के सरहदी गांव माण्डली में जन्मे और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता श्रद्धेय श्री पन्नालाल पटेल जी का आज जन्म दिन है। इस अवसर पर एक ऎसी रोचक घटना सुनाने को जी कर रहा है जिसे पढ़ कर कोई भी हँस-हँस कर लोट-पोट हुए बिना नहीं रह सकता।

बात उन दिनों की है जब श्री पन्नालाल पटेल को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। इसके बाद उनके अभिनंदन में उन्हीं के गांव माण्डली में बड़ा अभिनन्दन समारोह आयोजित किया गया।

इसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे श्री हरिदेव जोशी, अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के अध्य़क्ष डॉ. नागेन्द्रसिंह सहित शिक्षा, साहित्य, राजनीति और कई विषयों की खास-खास हस्तियां शामिल थी।

सभी ने श्री पन्नालाल पटेल का पुष्पहारों, शालों, अभिनंदन पत्र आदि से खूब अभिनंदन किया। सभी वक्ताओं ने उनकी और उनके लेखन की खूब तारीफ की और उन्हें वागड़ का लाल बताया, महान कहा तथा जितना कुछ उनकी प्रशस्ति में कह सकते थे जमकर कहा।

जब सारे वक्ताओं के भाषण समाप्त हो गए तब अन्त में बारी आयी श्री पन्नालाल पटेल की। उन्होंने अपने भाषण में अभिनंदन का प्रत्युत्तर देते हुए सभी की तारीफ की और कहा – खास मेहमानों, भाइयों और बहनों, आप सभी ने मेरे लिए बहुत अच्छा-अच्छा कहा, खूब तालियां बजी और मुझे लगता है कि आप सभी ने दिल खोलकर मेरी तारीफ की इसके लिए मैं आप सभी के प्रति आभारी हूं।

आप सभी के हाव-भावों और पाण्डाल में पसरते रहे हर्ष को देख कर लगा कि आप सभी ने मेरी खूब प्रशंसा की है।

मेरे कान जवाब दे गए हैं इसलिए मैं सुन तो नहीं पाया किन्तु मुझे महसूस हुआ कि आप सभी ने मेरे अभिनंदन में जो कुछ कहा होगा वह बहुत अच्छा था।

श्री पन्नालाल पटेल के इस एक वाक्य ने पूर्व के सारे वक्ताओं को विस्मित भी किया और पाण्डाल में काफी देर तक अचंभा छाया रहा। वक्ताओं को लग गया कि जिसे सुनाने आए थे उन्होंने तो सुना ही नहीं।

सारे अतिथि वक्ताओं के चेहर देखने लायक थे।

( यह घटना मेरे अग्रज  व्यंग्य लेखक एवं मनीषी साहित्य चिन्तक श्री भरतचन्द्र शर्मा जी ने मुझे जैसी सुनाई, वैसी ही आप सभी के समक्ष परोसी गई है।  आनंद लें।)

श्री पन्नालाल पटेल के प्रति हार्दिक श्रद्धान्जलि