प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से एक विनम्र आग्रह

इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले सभी प्रशिक्षणार्थियों को यह सुविधा दी जानी चाहिए कि वे यदि अपने संस्थान की व्यवस्था और प्रशिक्षण से सन्तुष्ट नहीं हैं तो बीच में ही छोड़ कर देश में किसी भी जगह दूसरे संस्थान में उसी कक्षा/कोर्स में प्रवेश पा सकते हैं। सभी प्रकार का शुल्क, छात्रावासी शुल्क आदि का बकाया पैसा प्रशिक्षणार्थी को प्राप्त हो जाए अथवा सीधे ही नवीन संस्थान के बैंक खाते में स्थानान्तरित हो जाए। इससे देश भर के उन हजारों प्रशिक्षणार्थियों को सुविधा एवं सुकून प्राप्त होगा जो निजी इंजीनियरिंग और मेडिकल दुकानों/संस्थानों आदि में एडमिशन लेकर फंस जाते हैं और चार-पांच साल से पहले निकल नहीं पाते, हर प्रकार की विषम परिस्थिति में अनमने जीवन के साथ वहीं टिके रहना उनकी मजबूरी होकर रह जाता है। इसी का फायदा उठाते हैं ये निजी संस्थान।  इससे इन छात्रों में आत्महत्याएं भी रुकेंगी और देश की प्रतिभाओं को राहत मिलेगी। इनके माइग्रेशन में दिक्कत नहीं आने दी जानी चाहिए। इसके लिए सख्त नियम कानून बनाने की जरूरत है। देश की नई पीढ़ी को समर्पित है यह विचार। अच्छा लगे तो आगे से आगे पहुंचाएं अन्यथा अपनी नपुंसकता को ओढ़ कर किसी नालायक के आंचल में दुबक कर बैठे रहें।