ईमानदारी सच्चे और अच्छे लोगों का आभूषण है …

यह कहना पूरी तरह गलत है कि ईमानदारों को मौके नहीं मिले इसलिए ईमानदार हैं।

ईमानदार होना वंश परंपरा और बचपन में प्राप्त संस्कारों का परिणाम है और जो इसे एक बार अपना लेता है वह जिन्दगी भर ईमानदार रहता है। मैं बहुत से लोगों को जानता हूं जो आज भी नैष्ठिक ईमानदारी रखते हैं, किसी का चाय-पानी और खाना तक नहीं खाते, पूरी ड्यूटी बजाते हैं और अभावों के बावजूद कभी कोई रोना नहीं रोते। ईमानदार होना और बने रहने का संबंध हमारी आत्मा और जमीर से है।

इसलिए वे लोग धन्य हैं जो ईमानदार हैं। ईमानदारी हो या दूसरी सारी मानवीय विलक्षणताएं, ये केवल वे ही लोग त्याग सकते हैं जो नशेड़ी, हराम का खान-पान और जमीन-जायदाद पाने वाले हैं क्योंकि इन विजातीय दुर्गुणों के कारण उनका मन मलीन और दिमाग प्रदूषित हो जाता है और ऎसे इंसान में अच्छे-बुरे का कोई विवेक नहीं रहता। उसे वही अच्छा लगता है जो उसके स्वार्थ को पूरे करने वाला हो, बाकी सब अच्छाइयों को वह नकारता ही रहता है। उसे सूझ ही नहीं पड़ती कि वह जो कुछ कर रहा है वह पाप है।

धन्य हैं वे लोग जो अत्याधुनिक ऎषणाओं, भौतिक चकाचौंध और मायावी आकर्षणों से मुक्त रहकर ईमानदार हैं और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों को अंजाम दे रहे हैं। ऎसे ईमानदार लोगों को किसी से कोई प्रमाण पत्र प्राप्त करने या प्रमाण दर्शाने की कोई आवश्यकता नहीं होती क्योंकि उनके लिए ईश्वर और उसका विधान ही सर्वोपरि है, मरणधर्मा और श्वानों की तरह झूठन और खुरचन के चटखारे लेने वाले और सर्वस्व समर्पण कर पसर जाने वाले इंसानों से उसे कोई उम्मीद नहीं होती, उन्हें वह छीनाझपटी कर उदरपूर्ति करने वाले पशुओं से अधिक नहीं समझता।

1 thought on “ईमानदारी सच्चे और अच्छे लोगों का आभूषण है …

  1. नमस्कार
    आपके लेख बहुत प्रेरणा दायक हैं ।आपके विचार अनुकरणीय हैं।

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