इधर – उधर की

कोई फर्क नहीं है – तटस्थता और नपुंसकता में। नपुसंकता नैसर्गिक या संयमहीनता से, तटस्थता ओढ़ी हुई बेहोशी।

धर्म परम्परा – खुले साण्ड किसी को भी छेड़ सकते हैं, साण्डों को कोई नहीं।

कश्मीर में सेना की हर कार्यवाही में सेकुलरों, शान्तिदूतों और पत्थरबाजों के हिमायतियों को आगे रखें।

मेहनत करने में शर्म न आए तो घर-आँगन और खेत-खलिहान से बढ़कर कोई जिम या हैल्थ क्लब नहीं है।

मौलिक ही सोचें-लिखें-परोसे वरना दिमाग काम करना बन्द कर देगा।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता >>>>  बकवास करने और कीचड़ उछालने की फ्रीस्टाईल स्वच्छन्दता

बेवजह मोबाइल साईलेंट मोड पर रखने वालों पर शक होता है। अपवाद संभव है।

फेसबुक जैसा कोई कचरा पोट शुरू हो, जहां सारे आवारा फेसबुकिया मेहतर कचरा पोस्ट कर सकें।

उठाईगिरे कौन? जो दूसरों की सामग्री कहीं से उठाकर दूसरी जगहों पर परोसते रहें।