पतंजलि योगपीठ के राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी प्रदीप शर्मा का बांसवाड़ा में अभिनन्दन

सोशल मीडिया का लोकमंगलकारी स्वरूप अंगीकार करने का आह्वान

राष्ट्रीय चिन्तन के साथ भारत के नवनिर्माण में जुटें – महामण्डलेश्वर हरिओमदास

        बांसवाड़ा /वर्तमान में सोशल मीडिया दुधारी तलवार की पैनी धार की तरह बहुआयामी प्रभावोत्पादक दौर से गुजर रहा है और इसके सृजनात्मक एवं संहारक पक्षों को ध्यान में रखते हुए इसके विवेकपूर्ण उपयोग एवं लोक मंगलकारी उद्देश्यों की ओर ध्यान केन्दि्रत करते हुए इसके बेहतर प्रयोग की आवश्यकता है।

यह उद्गार देश के जाने-माने सोशल मीडिया एक्सपर्ट श्री प्रदीप शर्मा ने  ऎतिहासिक लालीवाव मठ में आयोजित अभिनंदन समारोह तथा काव्यगोष्ठी एवं मुशायरे में मुख्य अतिथि पद से संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता लालीवाव मठ के पीठाधीश्वर महंत महामण्डलेश्वर हरिओमदास महाराज ने की जबकि वयोवृद्ध साहित्यकार भूपेन्द्र उपाध्याय ‘तनिक’, अध्यात्म चिन्तक श्री बण्डू महाराज एवं अध्यात्म चिन्तक पं. नरहरिकान्त भट्ट विशिष्ट अतिथि थे।

समारोह में योगऋषि स्वामी रामदेव, पतंजलि योगपीठ एवं भारत स्वाभिमान के सोशल मीडिया प्रभारी प्रदीप शर्मा का महामण्डलेश्वर हरिओमदास महाराज सहित अतिथियों ने शॉल व उपरणा ओढ़ा कर तथा श्रीफल एवं उपहार भेंट कर अभिनन्दन किया।

       सोशल मीडिया के टिप्स दिए

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री प्रदीप शर्मा ने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में सोशल मीडिया जगत में निरन्तर आ रहे सभी प्रकार के प्रभावों और नवाचारी प्रयोगों के बारे में विस्तार से बताया और सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति को मुखर, सर्वग्राही एवं आकर्षक बनाने के गुर सिखाए।

       सबसे पहले देश, बाकी सब बाद में

समारोह की अध्यक्षता करते हुए लालीवाव मठ के महाण्डलेश्वर महंत हरिओमदास महाराज ने कहा कि राष्ट्रहित और देश सर्वोपरि है और इसलिए यह जरूरी है कि हमारा हर कर्म, धर्म और व्यवहार राष्ट्रीय चिन्तन, राष्ट्रवादी संस्कारों और संकल्पों से भरा हुआ हो।

राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी श्री प्रदीप शर्मा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर भंवरलाल गर्ग ने प्रकाश डाला और देश के लिए की जा रही उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के बारे में अवगत कराया।   अभिनन्दन सत्र का संचालन करते हुए कवि हरीश आचार्य ने सोशल मीडिया के साहित्यिक, सामाजिक एवं परिवेशीय सरोकारों पर चर्चा की।

       रचनाकारों ने समा बाँधा

समारोह के दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी एवं मुशायरा हुआ जिसका संचालन शायर सिराज नूर चिश्ती ने राष्ट्रवादी शैली में किया। आरम्भ में विरेन्द्र सिंह राव ने आध्यात्मिक ईश वंदना प्रस्तुत की। वरिष्ठ कवि हरीश आचार्य, वसी सिद्दीकी, जलज जानी, भद्रेश झा ‘भद्र’, यशवंत पंड्या ‘चिंतक’, कपिल वशिष्ट, भंवर गर्ग, रौनक पुरोहित आदि ने अपनी रचनाएं पेश कर माहौल में विभिन्न रसों का ज्वार उमड़ाते हुए ऊँचाइयां दी।

आरंभ मेंं अतिथियों का माल्यार्पण से स्वागत महन्त सियारामदास, सत्यनारायण सराफ, शांतिलाल भावसार, पूर्व पार्षद सुखलाल तेली, दीपक तेली, मंजू चौबीसा, अरुण वशिष्ट, बण्डू महाराज, राजू सोनी आदि ने किया।

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