भला करे इंसान, बुरा करे वो हैवान

भला करे इंसान, बुरा करे वो हैवान

भलाई करना भगवान का काम है और काम बिगाड़ना राक्षसों का।  इस मामले में दुनिया में मनुष्यों की कुल दो प्रकार की प्रजातियां ही मानी जानी चाहिएं।

जो लोग नेक-नीयत रखते हुए ईमानदारी से काम करते हैं, परिश्रम से प्राप्त कमाई से जीवन चलाते हैं और दूसरों की भलाई के कामों में किसी न किसी रूप में हाथ बँटाते हैं, वे ही भगवान के बन्दे हैं और भगवान को ऎसे ही लोग प्रिय हैं।

इंसान का जन्म संसार में अच्छे कर्म करते हुए प्राणी मात्र की सेवा और सबके कल्याण के लिए ही हुआ है।  जो लोग अच्छे, सच्चे और ईमानदार हैं उन्हें प्रोत्साहित करने वाले और दक्षताहीन लोगों को सुधारकर उन्हें पारंगत बनाने वाले तथा गलतियों के मामले में सुधारात्मक एवं सकारात्मक रवैया अपनाने वाले लोगों पर ईश्वरीय अनुकम्पा बनी रहती है और भगवान इन्हें हमेशा सहायता करता है।

जो लोग ईश्वरीय पवित्र कर्म करते हैं और भगवान की कर्म परंपरा को आगे बढ़ाते हैं उनके प्रत्येक कर्म में प्रभु सहयोगी बनता है क्योेंकि ऎसे लोग जो कुछ करते हैं वह सब कुछ भगवदीय परम्परा का हिस्सा हुआ करता है।

भगवान अपनी विभूति भी प्रदान करता है और प्रत्येक क्षण अपने सूक्ष्म सान्निध्य एवं सहयोग का अहसास भी कराता है।  किसी का बिगाड़ा और बुरा करने का काम तो कोई भी कर सकता है।

इसके लिए उसे पढ़ने-लिखने और ओहदों को पाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। बुरे कर्म और विध्वसंक कार्य तो आधे, आंशिक और पूर्ण पागल भी करते ही रहते हैं और सनकी भी। इसमें कौन सी अतिरिक्त प्रतिभा की आवश्यकता होती है।

बहुत सारे लोग हैं जो समाज और देश के दुर्भाग्य तथा अपने किसी पूर्वजन्मार्जित पुण्य कर्म की वजह से प्रभावशाली स्थान पा चुके हैं किन्तु इनमें कोई प्रभाव नज़र नहीं आता। कई सारे बिजूकों की तरह हवाओं के इशारों पर डोलते रहते हैं और खूब सारे ऎसे हैं जो कि कठपुतलों और कठपुतलियों की तरह नाच-गान करते हुए मदमस्त हो रहे हैं।

ढेरों ऎसे हैं जिन्हें यह पता ही नहीं है कि उनकी जिन्दगी का लक्ष्य क्या है और क्यों जी रहे हैं। कइयों को लगता है कि जैसे धींगामस्ती और मौज उड़ाने के लिए ही पैदा हुए हैं और बहुत सारे लोग बाहरी पॉवर पाकर अहंकारों के आसमान में सैटेलाईट की तरह चक्कर काट रहे हैं और वह भी हवाओं के इशारों पर।

जमाने की हवाएँ और प्रदूषित धुँआ जिधर ले जाता है उधर चले जाते हैं और अपनी चला लिया करते हैं। अपने-अपने अहंकारों के आकाश में जात-जात के गुब्बारों ने धमाचौकड़ी मचा रखी है। गुब्बारों में टकराहट भी होती है और एक-दूसरे पर उछलते हुए आगे से आगे बढ़ते चले जाते हैं लेकिन उछालोें का कोई असर नहीं होता इन पर।

हर गुब्बारे को पता है कि उसका वजूद तभी दिख पाएगा जबकि वो जी भर कर उछलता रहे, आस-पास वालों को उछालता रहे चाहे। यह सब कुछ इतना अधिक फ्री-स्टाईल हो रहा है कि कौनसा गुब्बारा किस पर चढ़ जाए, चढ़ बैठे इसका अन्दाज नहीं लगाया जा सकता। हर गुब्बारा भटकने का आदी है और स्वच्छन्द है। फिर आजकल गुब्बारों की साईज और रंग का मायाजाल भी हर तरफ बिखरा पड़ा है।

जो जितना बड़ा गुब्बारा, वो उतना अधिक इतराता रहता है। कई गुब्बारों ने रंगों पर कब्जा कर लिया है और खूब सारों ने मौका देखकर रंग बदलने की सिद्धि पा रखी है। जमीन से लेकर आसमान तक टिड्डी दलोें की तरह गुब्बारों की धमाचौकड़ी का भरा-पूरा माहौल है।

सारे के सारे गुब्बारे इस बात से बेखबर हैं कि छोटी सी नोक ही उनके लिए काफी है लेकिन नोक की मर्यादा यह है कि जब तक गुब्बारों की धमाल और नौटंकी का वक्त पूरा नहीं हो जाता तब तक उसे छूना भी मर्यादाहीनता की श्रेणी में आता है।  आसमान में उड़ने वाला हर गुब्बारा अपने आपको या तो भगवान ही मानता है या फिर भगवान के करीब।

तमाम तरह के गुब्बारों के अपने-अपने भगवान हुआ करते हैं जिनकी आराधना किए बगैर ये गुब्बारे अपने आपको हवा के हवाले नहीं करते। बदहवास गुब्बारों की बदचलनी अब अपने पूरे परवान पर है।

इधर सब तरफ सूईयों की धार  पैनी होने लगी है। भविष्य के अंधकार से बेखबर गुब्बारों को यही लग रहा है कि जमीं पर उनके स्वागत की तैयारी हो रही है। अब समय आ गया है कि जब अहंकारों के गुब्बारों में पूरी की पूरी निर्ममता के साथ सूईयां चुभोनी शुरू करें ताकि आसमान में उड़ने वाले गुब्बारों को जमीें मिल सके।

बिना जमीन पाए गुब्बारों का मोक्ष संभव नहीं है। और किसी की गति-मुक्ति के लिए प्रयास करना सबसे बड़ा  पुण्य है। आईये गुब्बारों का मानमर्दन करने का अनुष्ठान आरंभ करें और जीवों तथा जगत को इनके पाप कर्मों की सडान्ध से मुक्ति दिलाने में भागीदारी निभाएं। हर गुब्बारे के जमीदोज होते वक्त आवाज भी होनी चाहिए और फुसफुसाहट भी, तभी मजा है।