अपने-अपने पिता

आजकल पिता होने का अर्थ उसी महान इंसान से नहीं रह गया है जिसकी वजह से हम संसार में आए हैं। भीड़ में खूब सारे चेहरे ऎसे नज़र आने लगे हैं जो औरों को पिता का दर्जा देकर खुश हो जाते हैं। यह अलग बात है कि इन आयातित पिताओं को ‘गॉड फादर’ कहा जाता है। अपने माता-पिता को गौण और हीन मानकर जो लोग बहुत सारे माता-पिता बनाते रहकर अपने काम निकलवाते रहते हैं ऎसे लोगों की परंपरा उनकी संतति में भी स्वतः स्थानान्तरित हो ही जाती है। आज का इंसान पिता-माता सब को भुला भी सकता है, नए बना सकता है और मौका आने पर कितनी ही बार बदल भी सकता है। इन लोगों के लिए अपने जन्मदाताओं की बजाय जिन्दगी भर का बोध वाक्य ‘पितु मातु मय सब जग जानी’ ही बना रहता है। बोलो अपने-अपने मात-पिता की जय।