महामुक्त हो जाओ, फिर देखो – आनन्द ही आनन्द उफनता रहेगा

शून्यावस्था प्राप्त करो, आनंद अपने आप भर जाएगा, और थोड़ा आगे बढ़ो, महाशून्यावस्था में महाआनंद हिलोरें लेने लगेगा,यहीं से अनुभव होने लगेगा समाधि अवस्था के आरंभ होने का

अपने प्रश्नों और जिज्ञासाओं का शमन करने का प्रयास आरंभ करने की जरूरत है। कोशिश करो कि एक बार पूरी तरह खाली हो जाओ। शून्यावस्था को प्राप्त कर लो। फिर तो जो आपके लिए जरूरी है, उसे भगवान अपने आप भर देगा। उसे चाहिए खाली पात्र, शुद्ध और शून्यावस्था वाला।

इंसान चाहे कितने ही अभावों, समस्याओं और दर्द को लेकर जी रहा हो, जब वह भीतर से खुलने लगता है तब अपने आप खिलने लगता है। और जब खिल जाता है तब उसे देख कर लोग खिलखिलाते हुए आनन्दित अनुभव करते हैं। अपना आत्म आनंद ही इस अवस्था में औरों के लिए परम आनंद का माध्यम बन जाता है।

आत्म आनंद और प्रेम में इतने अधिक डूबे रहो कि जो भी सम्पर्क में आए, वह प्रेम, करुणा और आत्मीयता से भर उठे और आनंद प्रवाह में नहा उठे।

इसके लिए स्वयं को सारे झंझावातों और पाशों से मुक्त करने भर की आवश्यकता है। जितने बंधनों से हम मुक्त होते चले जाते हैं, उनमें दैवीय शक्तियां अपने आप भरती चली जाती हैं।

जीवन का परम आनंद और लक्ष्य यहीं से आरंभ होता है। इसलिए उस दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करो। खाली होने की कोशिश करो।

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