स्वास्थ्य चर्चा – खान-पान में ध्यान रखें

हमारी रोजमर्रा की बीमारियों, अक्सर बनी रहने वाली उबासियों, थकान और भारीपन का मूल कारण हमारा खानपान है। इसमें ताजापन लाया लाकर अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है।ताजगी चाहें तो ताजा खान-पान करें। इससे न आलस्य आता है, न दिन भर उबासियां। जो लोग पैंकिंग वाले खान-पान का सेवन करते हैं वे बेड़ौल, आलसी, दरिद्री और यथास्थितिवादी हो जाते हैं। इन लोगों के लिए उबासियां, थकान और विचार शून्यता का होना स्वाभाविक हो जाता है।  सवेरे का बचा हुआ खान-पान शाम को न करें। शाम का बचा हुआ अगले दिन उपयोग में न लाएं। रोजाना का खान-पान रोजाना तैयार करें, यही ताजे खान-पान की श्रेणी में आता है। अपने दिल-दिमाग और शरीर को हमेशा दुरस्त और फुर्तीला रखना चाहें तो रोजाना ताजे भोजन, ताजे पानी का ही प्रयोग करें।