तंत्र चर्चा –  बगलामुखी साधना करने वाले साधकों के लिए

तंत्र चर्चा – बगलामुखी साधना करने वाले साधकों के लिए

जो लोग बगलामुखी साधना करते हैं उन्हें चाहिए कि वे मां को प्रसन्न करने के लिए साधना करें या फिर अपने किसी काम की सिद्धि पाने अथवा शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, पहले अपने आपको शुद्ध-बुद्ध कर लें तथा पूरी सात्विकता को अपनाएं। इसके बाद ही मां की आराधना करेंं।

खुद भ्रष्ट, व्यभिचारी और स्ति्रयों की निंदा करने वाले हों, चित्त में शांति की बजाय प्रतिशोध की भावना हो तथा सामने वाले का बुरा करने की इच्छा हो, उनकी इच्छाएं तीव्र साधना से मात्र एक बार ही पूरी होंगी लेकिन इसकी स्वयं पर आत्मघाती प्रतिक्रिया होगी। और इसके बाद आपकी मनोकामनाएं पूरी नहीं हो पाएंगी।

यह हमेशा याद रखें कि देवी अच्छे और सदाचारी भक्तों का ही कल्याण करती हैं, दूसरों का अहित करने वालों से सिद्धियां दूर भागने लगती हैं और मलीन आत्माओं का प्रवेश होने लगता है।

साधना चाहे बगलामुखी की हो या दश महाविद्या की किसी भी देवी की, स्वयं की शुचिता जरूरी है वरना इसके बुरे परिणाम सामने आएंगे। बगला साधना के साथ ही हरिद्रा गणेश, भैरव, मृत्युंजय आदि की साधना भी करें। कुछ न कर सकें तो ॐ नमः शिवाय के जप करते रहें ताकि किसी उग्र अवस्था आ जाने पर शमन का अर्थिंग पॉवर बना रहे। इसके साथ ही रोजाना के नित्यकर्म का त्याग भी नहीं करें।

इसलिए हमेशा शत्रुता या प्रतिशोध की भावना छोड़ कर अपने आपको ताकतवर और दिव्य बनाने के लिए बगलामुखी की साधना करें। साधना से स्वयं का व्यक्तित्व रागात्मक और अभेद्य हो जाता है, फिर शत्रुओं के संहार की कामना नहीं करनी पड़ती। जो हमसे टकराने की भावना रखते हैं वे अपने आप हमारे कवच के बाहर सर फोड़ते रहेंगे और उनकी हानि स्वतः होती रहेगी। न हमें कुछ करना है, न सोचने की आवश्यकता है। ये काम तो देवी के मामूली अनुचर अपने आप कर डालते हैं। जय माँ पीताम्बरा ….

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