श्रीमान् चोर साहबों के लिए …

बदला जमाना- बदल गए लोग

चोर को चोर कहो, चिढ़ते हैं, चोर को श्रीमान् चोर जी कहो तब भी चिढ़ते हैं, तो क्या कहें? इसी तरह बेईमान, भ्रष्ट और रिश्वतखोरों को दलाल न कहो, ऎसा कहो तो भौंकने लगते हैं। इन लोगों को क्या कहा जाए?  इंसानों की एक पूरी की पूरी प्रजाति ही ऎसी होती जा रही है जो अपने कर्म को श्रेष्ठ मानती है, उसी पर पलती है लेकिन इस रूप में अपनी पहचान को छिपाना चाहती है, इसकी उल्टी पहचान बताने को उत्सुक रहती है।  क्या जमाना आ गया है। चोरों को चोर या चोट्टा न कहो, डाकू न कहो, इन्हें सज्जन कहो, ईमानदार कहते रहो।