फायरप्रूफ हो गई हैं होलिकाएँ

अब सब कुछ गड्डमड्ड होता जा रहा है। हिरण्यकश्यपों ने सारी मर्यादाओं को तिलांजलि दे डाली है और तमाम किस्मों, आकार-प्रकारों की होलिकाओं ने अपने-अपने तिलस्मों का फ्रीस्टाईल इस्तेमाल कर खुद को इतना अधिक फायरप्रूफ कर लिया है कि जमाने की किसी भी तरह की आग का कोई असर नहीं पड़ता।

कहीं होट और कहीं रोमांटिक होलिकाओं ने अपने भीतर ही इतनी सारी आग पैदा कर ली है कि बाहरी आग इनके सामने कोई मायने नहीं रखती। कुछ आग खुद की है तो शेष सारी गर्मी आयातित। तकरीबन सारी की सारी होलिकाओं ने किसी न किसी को पटा रखा है या कि नज़रबन्द कर रखा है।

इन होलिकाओं के लिए अपने-अपने आकाओं और पल्लुओं में कैद मोहान्ध, मुद्रान्ध और कामान्ध नज़रबन्दियों की गर्मी इतनी अधिक प्रचण्ड हो चली है कि इन होलिकाओं ने अपने-अपने चण्ड-मुण्डों तक को बंधक बना रखा है।

होलिकाओं के लिए हर जगह स्पॉ, ब्यूटी और मसाज पॉर्लरों की भारी भीड़ है जो उन्हें आमंत्रित करते हुए गौरवान्वित अनुभव करती रहती है। होलिकाओं और हिरण्यकश्यपों का रिश्ता अब बहन-भाई का नहीं रहा बल्कि धंधेबाजी गिरोह जैसा हो गया है।

कहीं होलिकाएं कमा कर दे रही हैं, कहीं हिरण्यकश्यप लूट-लूट कर होलिकाओं को सम्पन्न बना रहे हैं। हिरण्यकश्यप और होलिकाओं की धींगामस्ती हर तरफ किसी न किसी रूप में उछाले मारती नज़र आने लगी है।

होलिकाओं और हिरण्यकश्यपों में अब सारे संबंध कारोबारी हो चुके हैं। यहाँ न कोई भाई-बहन हैं, न कोई सा रिश्ता। गर्म गोश्त, पाखण्डी प्रतिष्ठा और पैसों का रिश्ता ही है जो चोली-दामन का होकर रह गया है।  बहुत सारे नए-नए कबीले पैदा हो गए हैं जिनमें ढेरों होलिकाएं पूरी तरह उन्मुक्त होकर उन्मादी हो चली हैं।

इन होलिकाओं में छोटी-बड़ी का कोई सवाल नहीं है। हर होलिका अपने आप में स्वच्छन्द है और किसी भी तरह के स्वेच्छाचार के लिए स्वतंत्र है। कोई सी होलिका कुछ भी कहर बरपा सकती है, कोई पूछने या रोकने-टोकने वाला नहीं है।

किसकी हिम्मत जो इन होलिकाओं के कुकर्मों में आड़े आ जाए। जरा सी भनक पाते ही हिरण्यकश्यपों की पूरी की पूरी फौज आ उमड़ती है हाेंलिकाओं के बचाव में।  और होलिकाएं भी कोई कम माद्दा नहीं रखती, जब कभी हिरण्यकश्यपों पर कोई संकट आता है, होलिकाएं अपना सारा काम-धाम छोड़कर सेना की अग्रिम पंक्ति की तरह ढाल बनकर आ जुटती हैं इनके बचाव में।

कहीं-कहीं होलिकाओं और हिरण्यकश्यपों के संबंधों के बारे मेंं पूरा जग सब कुछ जानता है और कहीं चालाक और शातिर होलिकाएं एक साथ ढेरों हिरण्यकश्यपों से अलग-अलग संबंध बनाते हुए सभी को भ्रमित करने का तिलस्म सीख गई हैं। और दिखाती हैं जैसे कि वे सती सावित्री से भी बेहतर हैं। यही स्थिति हिरण्यकश्यपों की हो गई है। बदचलन, आवारा और धूर्त-मक्कार हिरण्यकश्यप हिरण्य के पीछे भागते हुए वो सब कुछ करने लगे हैं जो होलिकाओं को भाता भी है और रिझाता भी।

एक-दूसरे के लिए मर मिटने का ज़ज़्बा रखने वाले इस रिश्तों का जादू दोनों पक्षों पर सर चढ़कर बोलनेलगा है। जब अपने पर आ पड़ती है तब होलिकाएं हिरण्यकश्यपों का नाम लेकर छूट पड़ती हैं और जब कभी हिरण्यकश्यप शक के दायरे में आ जाते हैं तब वे होलिकाओं के नाम का इस्तेमाल कर छूट पड़ते हैं।

यह जमाना ही ऎसा आ चुका है कि होलिकाएं भी मदमस्त हैं और हिरण्यकश्यप भी। मौत तो बेचारे उन प्रहलादों की है जो पूरी ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता से अपने-अपने कामों में जुटे रहते हैं।

हिरण्यकश्यपों और होलिकाओं की विस्फोटक धींगामस्ती ने जंगलराज सा माहौल खड़ा कर दिया है। हर तरफ जल रही हैं सिद्धान्त, आदर्श, ईमान, धर्म, मानवता और निष्ठाओं की होलियाँ। इनकी जमीनी आग इतनी तेज है कि आसमान का कद पाने को बेताब है और इसमें बेवजह झुलस रहे हैं लोग, जिनके लिए इस दावानल से बचने का न कोई रास्ता बचा है, न जमाने के लोगों के पास इतना पानी रहा है कि इस आग पर काबू पाया जा सके।

उम्मीद तो सभी को यही थी कि पापी, कपटी, दुराचारी, लूटेरी और राक्षसी होलिकाएं जल मरेंगी, मगर हो रहा है सब कुछ उल्टा-पुल्टा। षड़यंत्रकारी और हिंसक होलिकाओं ने अपने आपको कब और किसका सहारा लेकर चुपचाप फायरप्रूफ कर लिया, यह भनक तक किसी को नहीं लगा पायी।

होलिका के जलकर भस्म होने की बात तो दूर है, अब तो साल भर में बड़ी ही शिद्दत से जिन महान लोगों के पुतले जलाए जाते हैं, वे भी खत्म नहीं हो रहे हैं बल्कि हर बार किसी न किसी रूप में इनका सामना हो ही जाता है।

जिन विरोधियों के भी पुतलों की होली जलायी जा रही है वे भी सुरक्षित होकर बाहर निकल आते हैं। यही नहीं तो जितनी बार ये पुतले जलते हैं उतनी नई ताजगी लेकर प्रकट हो रहे हैं। होलिकाओं से लेकर हिरण्यकश्यप तक सब सुरक्षित हैं और हर बार नए-नए तेवर में दोगुनी ऊर्जा और ताकत से अट्टहास कर सामने आ रहे हैं।

होलिकाएं अब अकेली नहीं जलने वाली, इन्हें जलाने के लिए हिरण्यकश्यपों को भी इनके साथ बाँधना होगा, तभी आसुरी कबीलों का भस्मीभूत होना संभव है।

इस बार होली पर संकल्प लें कि हर किस्म के इन शोषकों, अत्याचारियों, अन्यायियों और दुष्टों की सामूहिक होली जलनी चाहिए ताकि कोई एक-दूसरे को बचा न सके, एक-दूसरे के साथ ही भस्म हो जाए।

धर्म, सत्य और ईमान के प्रह्लाद की रक्षा तभी संभव है कि जब हम इन असुरों से हर तरह के संबंध और व्यवहार तोड़कर आमने-सामने हो जाएं और भगवान नृसिंह को याद करते हुए सामूहिक हमला करते हुए इन पर टूट पड़ें। अग्निदेव हमेशा उन सज्जनों का साथ देते हैं जो सच्चे, दिव्य और संगठित होते हैं। भगवान विष्णु ऎसे ही लोगों पर कृपा बरसाकर नृसिंह अवतार लेते हैं।

भगवान नारायण प्रह्लाद सहित हम सभी की रक्षा करें।

होलिकोत्सव और रंग पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ …।