दोहन नहीं यह शोषण है…

यों ही खोखली होती रही है हमारी व्यवस्था। लोग चूस-चूस कर व्यवस्था को अधमरी करने में लगे हुए हैं।  हम सभी का दायित्व है कि समाज, अंचल और देश समृद्ध हो, और उन सभी का उन्मूलन किया जाए जो उदासीन, निकम्मे या भ्रष्ट हैं, और जिनके कारण से देश अपेक्षित तरक्की नहीं कर पा रहा है।

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