अनुभव – अजब-ग़ज़ब हैं मूर्खो के अंधविश्वास

हम इन दिनों अजीब सी मनःस्थिति में जी रहे हैं। हम भगवान, अपने कर्म या किसी इंसान पर विश्वास भले न कर सकें, अंधविश्वासों पर हमारा अगाध विश्वास हमेशा बन जाता है और यह जीवन की उस बुराई में शामिल हो जाता है जो हमारी मृत्यु तक हमारे साथ बनी रहती है। कुछ लोगों में यह अंधविश्वास रहता है कि जब तक कोई तीन बार कोई काम नहीं कह दे, वे नहीं करते। फोन या मोबाइल भी तभी उठाते हैं जब तीन बार कॉल आ जाए। चाहे कितना ही बड़ा, अत्यन्त जरूरी या आकस्मिक काम क्यों न हो।  एक अजीब वाकया इस बात की पुष्टि करता है।

एक बार बहुत जरूरी काम से छुट्टी के दिन मैंने अपने वाहन चालक को मोबाइल पर कॉल किया। दो बार पूरी घण्टी गई पर उसने उठाया नहीं। गुस्सा भी आया। तब पास ही बैठे बाबू ने कहा  कि एक बार और घण्टी कर लो, वह उठा लेगा और बात हो जाएगी। मैंने कारण पूछा तो उसने जो बात बतायी उससे मुझे लग गया कि इस देश में आज भी अंधविश्वासी, सनकी और वज्रमूर्खों की कोई कमी नहीं है। बाबू ने बताया कि उस वाहन चालक की आदत है कि वह तभी बात करता है जब उसे तीन बार कॉल किया जाए क्योंकि उस ड्राईवर का मानना है कि तीसरी बार का कॉल आने पर  ही यात्रा या कोई सा काम सफल होता है। उसने इस बात की पक्की धारणा बना रखी है। यह कहते ही मैंने तीसरी बार कॉल किया और संयोग से उसने उठा लिया।  ऎसे बहुत सारे लोग हैं जो अंधविश्वासों में रमे रहकर अपनी जिन्दगी बर्बाद कर रहे हैं। इन लोगों से धर्म-कर्म, साधना, सेवा और परोपकार तो होते नहीं, अंधविश्वासों पर जिन्दा रहकर खुशहाली पाने का स्वप्न संजोये रहते हैं।

अब आप ही बताएँ कि इन मूर्खों पर हँसे, रोयें या इन्हें कोसें ।