सब जगह हैं चोर-डकैत, ऎसे करें इनसे अपना बचाव

सब जगह चोर-डकैतों का कुनबा पसरता जा रहा है। कुछ घोषित चोर हैं तो बहुत सारे अघोषित। पर हैं सारे के सारे शातिर। कुछ मामूली चोर हैं, कुछ लगातार ज्ञान और अनुभवों के आधार पर उच्चावस्था प्राप्त कर महाचोर हो चुके हैं, कई सारे अब डकैतों की श्रेणी में हैं तो इनमें से छंटे-छंटाये तस्कर होने का गौरव पा चुके हैं।

इन सब तरह के चोरों से हम सभी लोग त्रस्त हैं और इनसे बचाव के बारे में चिन्तन-मनन करते हुए  कुछ न कुछ उपाय काम में लाने का प्रयास करते रहते हैं।

अघोषित और अभिजात्य चोरों से निपटना कोई सामान्य बात नहीं है किन्तु परंपरागत चोरों से बचने के लिए हम कई उपाय काम में ला सकते हैं। इनका अचूक प्रभाव भी देखा गया है। चौर्य कर्म का अपना पृथक ही मनोविज्ञान है जो जानने में जितना अधिक रोचक है उतना ही अधिक भयावह।

आजकल घरों-दुकानों में चोरियां अधिक होने लगी हैं। ऎसे समय में यह जरूरी हो चला है कि हम सुरक्षा के प्रति विशेष सतर्कता बरतें। साथ ही उन परम्परागत उपायों का भी सहारा लें जो कि हमारे पुरखे सदियों से करते आ रहे हैं।

चौर्य कला, चोरी के मनोविज्ञान और चौर्य परंपराओं का अध्ययन किया जाए तो कई बातें ऎसी सामने आती हैं जिनसे चोरों के चौर्य कला में सहायक सिद्ध होने वाले कई उपायों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।

अक्सर चोरियों की वारदातें कृष्ण पक्ष में होती हैं जब चन्द्रमा का प्रभाव क्षीण या समाप्त रहता है। चोरी अपने आपमें मलीन और मैला कर्म है इसलिए चोर हमेशा मैली विद्याओं का सहारा लेते हैं।

कई बार छोटे-मोटे देवी-देवता या भूत-प्रेतों का सहारा भी लिया करते हैं और यह मनौती मानते हैं कि जितना माल आएगा, उसमें से कुछ अंश संबंधित आश्रयदाता देवी-देवता या भूत-प्रेत के डेरे पर चढ़ायेंगे। जरूरी नहीं कि ये देवता मूर्तिमान ही हों।

चोर जिस देवी-देवता की बाधा लेकर आते हैं, यदि जिस घर में चोरी के लिए जा रहे हों, वो भी उसी देवी या देवता या इनसे अधिक शक्ति सम्पन्न देव का उपासक होगा तो चोर वहाँ चोरी करने में निष्फल रहेंगे। चोरी के कुछ दिन पूर्व चोर रेकी करते हैं और जहाँ जिस मोहल्ले या घर में चोरी करनी होती है वहाँ कोई मैली चीज कहीं कोने में फेंक आते हैं। चोरों का मानना होता है कि इससे घर का देवता या पितर अथवा भूत-प्रेत पूर्व संकेत नहीं दे पाएगा।

चोर रात्रि के दूसरे प्रहर के बाद एक साथ नहीं आते बल्कि जिस गाँव-शहर में चोरी करने की योजना बनती है वहाँ चोरों का एक समूह शाम ढलते ही गाँव-शहर के मुहाने पर आ जाता है और वहाँ दूसरा प्रहर शुरू होते ही कोई न कोई छोटी सी चोरी की वारदात कर मुहूर्त कर लेता है।

यही कारण है कि गाँव-शहरों के बाहर के स्कूलों, सरकारी भवनों और एकान्त बने मकानों में अक्सर साँकल तोड़ने, खिड़की का दरवाजा तोड़कर बरतन या किसी न किसी एक वस्तु की चोरी कर ली जाती है।

यह मामूली चोरी करके चोर शगुन कर लेते हैं। यह अगली किसी बड़ी चोरी का आरंभिक चरण होता है।

इसके बाद ही यह चोर समूह गाँव या शहर की ओर चोरी करने के लिए भीतर जाते हैं।  यदि चोरी की बड़ी वारदात को अंजाम देना हो तो दूसरा समूह भी दूसरे प्रहर पर गाँव-शहर के मुहाने आकर  पहले वाले समूह में मिल जाता है।

इसलिए यदि गांव और शहर के मुहाने संध्या काल के उपरान्त यदि कहीं अवांछित हरकत या हलचल देखें तो उस दिन सतर्क रहें क्योंकि यह चोरों का पहला पड़ाव होता है जहाँ से चोर रात्रि के दूसरे या तीसरे प्रहर में चोरी के लिए प्रस्थान करते हैं।

अक्सर ये चोर रास्ते में पड़ने वाले श्मशान की राख लाकर चोरी वाले घर में बिखेर दिया करते हैं। चोरों का विश्वास होता है कि इससे घर वालों को गहरी नींद आ जाती है और वे सोये रहते हैं। जिन घरों में कुत्ते रखवाली के लिए होते हैं उन कुत्तों को भरमाने के लिए चोर अपने पालतु कुत्तों और कुतियाओं के कुछ बालों का गुच्छा लेकर चुपचाप उन घरों में दूर के कोनों मेें डाल देते हैं। शातिर चोर कुतियाओं के गुह्यांगों में रूई लगाकर इन फोहों को उन घरों के दूर-दूर फेंक दिया करते हैं जहां कुत्ते रखवाली करते हैं। इससे ये कुत्ते इस नई गंध सूंघने में ही  मदमस्त हो व्यस्त हो जाते हैं और उधर चोर अपनी करनी करके चले जाते हैं।

कई बार चोरी की वारदात करने से पूर्व चोरी वाले स्थान में अलग-अलग जगहों पर शौच कर लेते हैं। इसके पीछे इनकी यह सोच होती है इन स्थानों को अपवित्र कर देने से जानकार लोगों की दिव्य दृष्टि घटना स्थल तक पहुँच नहीं पाती और वे दैवीय उपायों से चोरी करने वालों की थाह पाने में विफल रहते हैं। क्योंकि कई बार तांत्रिक लोग पानी में अथवा अभिमंत्रित काँच में चोरी वाली सारी घटना तथा चोरों का पता पा लिया करते हैं। इनसे बचने के लिए मैला डाल दिया जाता है ताकि दिव्यता भरी दृष्टि मलीनता होने की वजह से वहाँ तक नहीं पहुँच पाए।

अक्सर चोरियां रात को एक से सवेरे तीन बजे के बीच होती हैं जब कालरात्रि का प्रभाव रहता है और लोग गहरी नींद में रहते हैं।

चोरों के लिए सुकून पाने और चोरी में सफलता पाने के अपने-अपने कई परंपरागत टोने-टोटके होते हैं जिनका सहारा वे प्राचीनकाल से लेते रहे हैं।

चोरों से बचाव के लिए हम सुरक्षा, सीसी टीवी कैमरों, गार्ड आदि कई माध्यमों को अपनाते हैं। इनके साथ ही यदि हम मंत्र प्रयोग करें तो चोरों से आसानी से बचाव संभव है।

रात को झाडू, चप्पल घर के बाहर यानि की परिसरों में नहीं रखें। बाहर गैलरी में या छत पर रस्सियों पर कपड़े सूखे नहीं होने चाहिएं।  अपने मुख्य द्वार पर रात्रिकाल में हमेशा रोशनी होनी चाहिए।

बहुत से कंजूस लोग बिजली का बिल बचाने के चक्कर में घर के मुख्य द्वार में प्रवेश स्थल पर लाईट बंद किये रहते हैं। घरों के मुख्य द्वार पर रोशनी का न होना वास्तु दोष भी है और ऎसा होने पर यह घर चोरों के लिए अच्छा निशाना होता है।

जब आशंका हो कि आस-पास कहीं चोरों की हरकत हो रही है तो उस समय जोर से छींक दें या खाँस दे, इसे चोर अपशकुन समझते हैं।

रात को दरवाजे बन्द करते समय या घर से बाहर जाते समय यदि चिटकनी, साँकल या ताले को लगाने के बाद यदि तीन बार इस मंत्र का उच्चारण कर लिया जाए तो चोर आएंगे ही नहीं, और प्रवेश करने की कोशिश भी करेंगे तो कोई न कोई कारण उपस्थित होकर असफल लौट जाएंगे।

मंत्र है –

ॐ कफल्ले कफल्ले दाहिनी, मोहिनी, सती।

अथवा

तिंस्त्रो भार्या कफल्लस्य दाहिनी मोहिनी सती, तासां स्मरण मात्रेण चौरों गच्छति निष्फल।

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