बांसवाड़ा की बात – अम्बा बा होने का मतलब आतिथ्य सत्कार की प्रतिमूर्ति

बांसवाड़ा की रत्नगर्भा वसुन्धरा में असंख्य ऎसी हस्तियां पैदा हुई हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इनका माधुर्यपूर्ण और औदार्य से लक-दक जीवन-व्यवहार और आत्मीयता ऎसी कि कहीं और देखने तक न मिले।

इन्हीं में एक थीं अम्बा बा।  कुलीन औदीच्य परिवार की अम्बा बा का मकान सिंगवाव से औदीच्यवाड़ा स्कूल के रास्ते है जिसमें प्रवेश का मुख्य द्वार औदीच्यवाड़ा गली के एक छोर से है।  अम्बा बा की काया किसी दैवी से कम नहीं प्रतिभासित होती।

एकदम गौरवर्ण और माधुर्य से भरा उनका आकर्षक व्यक्तित्व ऎसा मनमोहक कि जो भी उनके सम्पर्क में आता, आत्मीयता और पारिवारिक स्नेह का टच पाकर अभिभूत हो उठता।

यों तो अम्बा बा अपने आप में कई पुरातन संस्कारों और दिव्यताओं को सहेजे हुए थी। लेकिन उनकी सबसे बड़ी खासियत थी कि उनके घर आया हुआ कोई भी इंसान बिना चाय पान के लौट नहीं सकता। जो लोग चाय नहीं पीते उनके लिए दूध का प्रबन्ध वे रखती।

इसके लिए उन्होंने अपने घर में ही गाय पाल रखी थी। आतिथ्य सत्कार की प्रतिमूर्ति अम्बा बा का स्नेह भरा आग्रह इतना कि वे जो कोई अपने घर आता, उससे प्रसन्नतापूर्वक घर-परिवार और बड़े-बुजुर्गों के बारे में पूछती, और भोजन-चाय आदि का आग्रह करती।

घर आए मेहमानों को खिलाने-पिलाने में उन्हें खूब प्रसन्नता होती। जब तक स्वस्थ रहीं, तब तक खुद चाय बनाकर पिलाती। चाय भी आजकल के कप में नहीं, बल्कि पीतल के कप – प्लेट में चाय पीने का अपना अलग ही आनंद था।

अम्बा बा की आतिथ्य सत्कार भावना अपने आप में ऎतिहासिक और अनुकरणीय थी। हालांकि वे अब हमारे बीच में नहीं हैं किन्तु उनका समग्र जीवन आत्मीयता और जीवन माधुर्य की शिक्षा देने और अनुकरण के लिए निरन्तर प्रेरणा जगाता रहेगा।

शहरीकरण के मौजूदा दौर में आज हम लोग आतिथ्य सत्कार को भुलाते जा रहे हैं। ऎसे में अम्बा बा उन सभी को याद आती हैं जो उनके घर पहुंच कर उनकी बनाई चाय का स्वाद ले चुके हैं।

वह केवल चाय नहीं होती थी बल्कि अम्बा बा का पूरा का पूरा स्नेह और आशीर्वाद ही था। जिसने उनका सान्निध्य पाया, वह निहाल हो उठा और जिन्दगी भर के लिए अतिथियों की सेवा के महत्व को अंगीकार करने लगा।

अम्बा बा वाकई मात्र स्त्री नहीं, दैवी ही थीं। जब भी उनकी याद आती है, तब लगता है कि पुरानी पीढ़ी के लोग कितने मानवीय, संवेदनशील, उदार और आत्मीयता से परिपूर्ण हुआ करते थे।

2 comments

  1. Very impressive and ideol