मनोरंजनिया लेखन

उस लेखन का क्या अर्थ, जिससे किसी का भला न हो, अभावों और समस्याओं का खात्मा न हो, खट्टे-मीठे-कड़वे-तीखे अनुभवों का समावेश न हो।

केवल आत्ममुग्धता या अपने जैसे दूसरे टाईमपासरों की वाहवाही पाने से न समाज का भला हो सकता है, न देश का। सबको खुश करने और रखने वाला लेखन नाकारा ही है।

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