सुधर गया बुढ़ापा, आसान हुई गुलाब की बाकी जिन्दगी

गर्मी, सर्दी और बरसात, हर मौसम में उसके लिए घर से दूर जंगल जाना कई मायनों में चुनौतियों भरा ही था। आर्थिक हैसियत भी इतनी नहीं थी कि सोचा हुआ काम कर पाए। जंगल जाना हो तो मुँह अंधेरे या फिर रात में ही। फिर आजकल तो रात में भी काफी देर तक आवाजाही बनी रहती है। बुजुर्गियत के कारण अशक्ति की पीड़ा अलग।  बीमारी की हालत में तो घर से दूर जंगल जाना मुश्किलों भरा ही था।

यह कहानी 01.-SS-Gulab-Bai-Kavitaहै उदयपुर से कुछ दूर बड़गांव पंचायत समिति के कविता गाँव में रहने वाली वृद्धा श्रीमती गुलाब देवी की। स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत अपनी ग्राम पंचायत को खुले में शौच से मुक्त घोषित कराने की कवायद में आँगरवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुन्दरदेवी पालीवाल की अगुवाई में महिला निगरानी दल भोर में फोलोअप के लिए निकला ही था कि एक बुजुर्ग महिला इनके पास से गुजरी।

पूछने पर गुलाब देवी ने बताया कि उसके घर में शौचालय नहीं है इसलिए जंगल जाने की जरूरत है, इसके सिवा कोई चारा नहीं है। वह खुद भी चाहती है कि घर में ही सब कुछ हो मगर आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह मजबूर है।

इस पीड़ा को निगरानी दल ने समझा और उसके घर जाकर सारी औपचारिकताएं पूरी की, आवेदन पत्र भरवाकर सहमति पायी और उसी समय घर में शौचालय निर्माण की मंजूरी जारी कर दी। वहां साथ ही मौजूद शौचालय निर्माण के कारीगर ने हाथों-हाथ गोले का निशान बनाकर गड्ढे खुदवाकर तैयार रखने के लिए कह दिया। इनके पूरा होते ही कारीगर ने ग्राम पंचायत से सामग्री पाकर गुलाबदेवी के घर पानी की टंकी सहित पूरा शौचालय बना दिया। कविता ग्राम पंचायत के सरपंच श्री देवीलाल पालीवाल ने शौचालय का निरीक्षण किया और घर वालों को संकल्प दिलाया कि न तो वे खुले में शौच करेंगे, न अपने घर आने वाले पाँवणों(मेहमानों) को करने देंगे।

अपने घर में शौचालय निर्माण पर श्रीमती गुलाबदेवी अत्यन्त भाव विभोर हो उठी और कहने लगी – अब उसकी बड़ी तकलीफ खत्म हो गई है। भगवान इस राज को लम्बी आयु दे। इस काम ने तो उसका बुढ़ापा ही सुधार दिया।@डॉ. दीपक आचार्यGulab-Kavita-UDR