बर्दाश्त न करें षड़यंत्रकारियों को

गुण्डे-बदमाश और उठाईगिरे दो प्रकार के होते हैं। एक वे हैं जो खुद गुण्डई करते हैं और समाज में माहौल खराब करते हैं। ये पापी और अपराधी होते हैं और इन्हें कठोर से कठोर दण्ड मिलना चाहिए।

दूसरी किस्म में वे लोग आते हैं जो लोमड़ों-लोमड़ियों और कुत्ते-बिल्लियों की तरह खुद जबर्दस्त चालाक और शातिर होते हैं, मीठा-मीठा बोलकर लोगों को भरमाते रहते हैं और दूसरी तरफ अपने मनोमालिन्य को आकार देते हुए षड़यंत्रों में रमे रहते हैं।

ये लोग खुद की छवि को साफ-सुथरी दिखाने के लिए विनम्रता, दासत्व, लटके-झटके और छैल-छबीले अभिनयों में सिद्ध होते हैं। दुनिया भर की धींगामस्ती और धूर्तताओं के साथ मक्कारी में माहिर ये लोग व्यवहार ऎसे करते हैं कि जैसे इनकी बराबरी का कोई सद्व्यवहारी, सद्भावी और शुभचिन्तक और कोई हो ही नहीं।

जो इंसान सामाजिक नहीं है वह अपने आप असामाजिक माना जाता है। जो समाज के लिए जी नहीं सकता, वह समाज के लिए विध्वसंकारी और नाकारा ही है। ऎसे खूब सारे लोग सभी स्थानों पर हैं जिन्हें सामाजिक कहा ही नहीं जा सकता।

इन लोगों की वास्तविक जिन्दगी को करीब से देखा जाए तो साफ-साफ लगेगा कि ये लोग मन और मस्तिष्क से लेकर शरीर तक प्रदूषित और विकृत होते हैं। इन लोगों के स्वभाव आसुरी होता है और इनकी पूरी आयु इसी में गुजरती रहती है कि किसी को कैसे पटकनी दी जाए, बदनाम किया जाए और अपनी औकात या प्रतिभा के मुकाबले कितना अधिक से अधिक छीन कर प्राप्त कर लिया जाए। चाहे इसके लिए दूसरों का गला तक क्याें न काटना पड़ जाए। इनमें खुद की इतनी औकात नहीं होती कि श्रेष्ठताओं को सिद्ध कर सकें। इसलिए षड़यंत्रों में रमे रहना इनके जीवन की मजबूरी होता है।

कुछ लोग तोप की तरह काम करते हैं। इन लोगों के कान में भरी गई हर बात बारूद का काम करती है और इनका इस्तेमाल चाहे जो कर सकता है, कहीं भी कर सकता है।

ऎसी तोपें भी हमारे यहाँ खूब हैं और इनमेंं गोला-बारूद भरने वालों की भी कोई कमी नहीं है। समाज, क्षेत्र और देश के पिछड़ेपन सहित सभी प्रकार की समस्याओं के पीछे वे लोग जिम्मेदार हैं जो खुद असामाजिक होकर चोरी-छिपे ऎसे काम करते हैं जो कि अपराध की श्रेणी में आते हैं।

बहुत से लोग हैं जो परोक्ष-अपरोक्ष रूप से आपराधिक और गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त हैं, कायदे-कानूनों और मर्यादाओं की निर्मम हत्या करते रहते हैं। और इनका साथ देने वाले तथा साथ रहने वाले भी खूब सारे लोग हैं जो अपने आपको चाहे कितना ही तटस्थ और निश्छल-निष्कपट मानते-मनवाते रहें किन्तु ये भी अपराधी और असामाजिकों की श्रेणी में गिने जाते हैं और इन्हें भी बराबरी का अपराधी मानना चाहिए।

असल में देखा जाए तो अपराधियों और असामाजिक लोगों से भी बड़े अपराधी वे लोग हैं जो अपने आपको शुद्ध और सिद्ध मानते रहते हैं और अपराधियों को मदद करते हैं।

यह मदद आर्थिक, मानसिक और शारीरिक साथ देने और रहने से लेकर हर तरह के षड़यंत्रों में लिप्त रहा करते हैं। उन बाड़ों और परिसरों को भगवान ही मालिक है जहां ऎसे अपराधी भी होते हैं और इनके धूर्त-मक्कार और ढोंगी मददगार भी।

दोनों तरह के पाखण्डियों और लूटेरे ढोंगियों का यह चोली-दामन का साथ ही कहर बरपाता रहता है। कई बार लोग इन्हें चंगू-मंगू कहकर संबोधित करते हैं।

समाज और देश के असली अपराधी तो वे लोग हैं जो अपने स्वार्थ, अपनी खोटी चवन्नियां चलाने तथा अपनी हरामखोरी की प्रवृत्ति को बनाए रखने के लिए अपनी तरह के असामाजिक और भ्रष्ट-लूटेरों को पनपाते और उकसाते रहते हैं, कान भरते रहते हैं और मिसाइलों की तरह लोगों पर बदनामी के गोले दागते रहते हैं। इन दोनों ही किस्मों के लोगों का पूरा जीवन छिपे हुए गुण्डे-बदमाशों और लूटेरों से कम नहीं होता। ये लोग दूसरों तथा उनके ठिकानों को भी लूटते रहते हैं और अपने बाड़ों को भी खा जाने में कोई लाज-शरम नहीं रखते।

समाज का दुर्भाग्य है कि हम इन दोनों ही किस्मों के असामाजिक तत्वों को बर्दाश्त करते हैं जबकि असली आतंकवादी ये हैं जिनके कारण से सज्जन और सच्चे-अच्छे लोग परेशान होते रहते हैं वह भी इन चोर-उचक्के गुण्डे-बदमाशों से।

इन दोनों ही तरह के षड़यंत्रकारियों और अपराधियों में सांठ-गांठ जब तक खत्म नहीं हो जाती, तब तक शान्ति और सौहार्द कहीं भी पाँव जमा नहीं सकता। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि ऎसे लोगों को किसी कीमत पर बर्दाश्त न करें चाहे वे कितने ही प्रभावशाली और षड़यंत्रकारी -विध्वंसकारी क्यों न हों।

इन दोनों ही तरह के लोगों को कठोर दण्ड देकर सुधारा जा सके तो सुधारें और समाज व क्षेत्र तथा सज्जनों को इनसे बचायें। पर अनुभव बताते हैं कि ये उठाईगिरे और हरामखोर मरे नहीं सुधरते, इसलिए इनकी गति-मुक्ति के लिए प्रार्थनाएं करें, परिश्रम करें और सबक सिखाएं। और कुछ नहीं तो इन्हें अपने से दूर कर दें या इन्हें आपस में न रहने दें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *