नवरात्रि पर विशेष – भक्तिभाव से करें मैया की आराधना

नवरात्रि पर विशेष – भक्तिभाव से करें मैया की आराधना

साल भर में कुछेक अवसर ही ऎसे आते हैं कि जब उस समय विशेष में जो कुछ किया जाता है उसका अनन्त गुना फल प्राप्त होता है और इस काल में प्राप्त ऊर्जा जीवन भर के लिए उपयोगी बनी रहती है।

इसका कभी क्षरण नहीं होता। नवरात्रि ऎसा ही एक पर्व है जिसमें की जाने वाली शक्ति उपासना अपने आप में सिद्धि का रास्ता दिखाती है।

और इसमें भी अष्टमी का महत्व बहुत अधिक है।  भारतवर्ष की उन्नति, लोक कल्याण और विश्वोत्थान की दृष्टि से अष्टमी वह समय है जब लाखों-करोड़ों लोग किसी न किसी विधान से देवी उपासना करते हैंं ।

साधना का मार्ग चाहे एकान्तिक हो या फिर सामूहिक, यह बात स्वयंसिद्ध ही है कि इस अहोरात्र में जो कुछ किया जाता है उससे पृथ्वी से लेकर ब्रह्माण्ड तक में दैवीय ऊर्जाओं से भर-पूरे परमाणुओं का संचरण होता है और यह देवी भक्तों और साधकों के साथ ही उन सभी लोगों के लिए परम कल्याणकारी है जो कि मैया में अगाध आस्था और विश्वास रखते हैं।

इसके साथ ही प्रकृति पर भी इसका बेहतर असर सामने आता है। सामूहिक ऊर्जा का यह प्रभाव वैश्विक लाभकारी होता है लेकिन इसके रहस्य से बहुत से लोग हमेशा अनभिज्ञ रहा करते हैं।

खूब सारे लोग अपनी ही मौज मस्ती में रमे हुए हैं और उन्हें न अष्टमी के महत्व से कोई सरोकार है और न ही नवरात्रि के।

नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव सभी जगहों पर है इसलिए इनसे बचाव की दृष्टि से नवरात्रि का खास महत्व है। चाहे हम सकारात्मक शक्तियों के आवाहन और नवरात्रि की परंपराओं में विश्वास न भी रखते हों तब भी शारदीय नवरात्रि का दूसरा पक्ष इतना अधिक वैज्ञानिक है कि यह काल पिण्ड से लेकर ब्रह्माण्ड तक के हर तत्व को प्रभावित करता है।

पंचतत्वों से लेकर जड़ तत्वों तक पर कोई न कोई प्रभाव दृष्टिगोचर होता ही है। इसमें नकारात्मक प्रभाव भी होते हैं और सकारात्मक भी। इसलिए नवरात्रि की साधना नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करने तथा सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाने के लिए अत्यन्त उपादेय है।

इस कालखण्ड में उदासीन बने रहना भी हमारे लिए घातक हो सकता है क्योंकि हमें ऊर्जावान होने और नकारात्मक शक्तियों से बचाव के लिए जो समय प्राप्त होता है उसका सदुपयोग करने की बजाय हम इस समय की उपेक्षा करते हैं और फिर साल भर पछताते रहते हैं। इसमें न भक्ति और साधना का दोष है,

न देवी और देवताओं का। हम ही यदि लापरवाह बने रहें तो हालात यही सामने आएंगे ही, इसमें दोष हमारा ही है, और किसी का नहीं।

समय को व्यर्थ न जाने दें। इसका पूरा-पूरा सदुपयोग करें और देवी मैया को प्रसन्न करने का बहुमूल्य समय जाया न करें। आईये हम सब मिलकर देवी मैया की आराधना करें और महाष्टमी को सफल बनाएं।