बेहद सुकूनदायी है नैसर्गिक संरक्षक की छाँव

ये है काँठल धरा (प्रतापगढ़) का पर्वतीय अंचल धामण डूंगरी …  जहां सदियों से हरियाली और आश्रय का परचम लहराता हुआ दूर-दूर तक पसरा हुआ वटवृक्ष संरक्षक की भूमिका में  बैठा है। यह गांव पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भी अग्रणी है जहाँ पहाड़ी क्षेत्रों में आसमान में पंखुड़ियां लहराते पवन ऊर्जा के पंखे चरेवैति-चरेवैति का उद्घोष करते हुए विकास का जयगान कर रहे हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *