जन्मदिन को यों बनाएं खास

गौसेवा अनुष्ठान करें, साल भर स्वस्थ-मस्त रहें

अपने जन्मदिन को खास बनाते हुए इस अवसर को साल भर के लिए सुकूनदायी बनाएं। इससे पूरे वर्ष यश-कीर्ति, आरोग्य और आनंद का सहज-स्वाभाविक प्रवाह बना रहता है और अरिष्ट-अनिष्ट तथा तमाम प्रकार की आपदाओं-दुर्घटनाओं से बचा रहा जा सकता है।

अपने जन्म की दिनांक या तिथि के दिन अपनी आयु या वजन दोनों में से जो अधिक हो, उतने किलो गौग्रास गायों को खिलाने से अच्छे ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है तथा खराब ग्रह-नक्षत्रों का कुफल समाप्त हो जाता है अथवा नगण्य स्तर पा लेता है।

ध्यान रहे कि ग्रौग्रास के रूप में जो कुछ भी गायों को खिलायें अपने हाथ से खिलायें या यह प्रबन्ध करें कि जो गौग्रास गौशाला या अन्य गौसमूहों में दिया जाता है उसका उपयोग उसी दिन हो जाए।

गौग्रास के रूप में धनराशि दिए जाने का कोई फल सामने नहीं आता। इसका फल तभी सामने आता है जब जन्मदिन को ही उपयोग हो। अक्सर होता यह है कि हम लोग गौशाला में पैसा दे देते हैं। यह पैसा गौशाला के फण्ड में जमा हो जाता है और यह भी तय नहीं रहता कि यह धन गौग्रास के रूप में ही काम में आएगा अथवा गौशाला के दूसरे कामों में।

हमारी धनराशि व गौग्रास का फायदा तभी है कि जब उसी दिन गौग्रास गायों के पेट में जाए। अन्यथा कोई लाभ नहीं। जब तक हमारे पैसे या सामग्री का उपयोग गायों के लिए भोज्य सामग्री के रूप में उपयोग में नहीं आएगा तब तक डेड मनी के रूप में पड़ा रहेगा।  खाद्य सामग्री जैसे ही गायों के पेट में पहुंचेगी और उन्हें तृप्ति होगी, तभी गौमाता का आशीर्वाद प्राप्त होगा।  जो कुछ करें खुद करें और ऎसा करें कि उसी दिन उपयोगी हो।

जिन लोगों के ग्रह खराब हों, उन्हें चाहिए कि ग्रह के रंग के अनुसार भोज्य सामग्री गौ ग्रास के रूप में उपयोग में लाएं।  अपनी कुल आयु के वर्षों की संख्या में एक अधिक वर्ष जोड़कर गौ समूह की परिक्रमा भी करें।

जन्मदिन पर गौग्रास के साथ ही यह संकल्प ले लें कि रोजाना पहली रोटी गाय और अंतिम रोटी कुत्ते को खिलाएंगे। वर्ष भर इसे नियमित रूप से निभाएं। इससे साल भर प्रसन्नता के साथ उन्नति का अहसास किया जा सकता है।

जिन परिवारों में प्रत्येक सदस्य के बर्थडे पर इसी विधि से गौग्रास की परंपरा को अपनाया जाता है वे परिवार सुख और समृद्धि को प्राप्त करते हैं।

जिन्हें संतान सुख की कामना हो या चाहें कि संतान अच्छी निकले, उन लोगों को चाहिए कि वे सफेद गाय पर हाथ फिराएं। इससे शुक्र पॉवरफुल होता है और ऎश्वर्य प्रदान करता है।

बल-बुद्धि, आरोग्य, शुचिता और जीवनानंद के लिए गौदुग्ध का पान सर्वश्रेष्ठ है। जो बच्चे गौदुग्ध का पान करते हैं वे मेधावी होते हैं, उन्हें ट्यूशन या बुद्धिवर्धक रसायनों व औषधियों की कोई जरूरत नहीं पड़ती।

इसी प्रकार अपने दिवंगत परिजनों की पुण्य तिथि और श्राद्ध दिवस पर भी गौग्रास की व्यवस्था करें। जितनी आयु पूरी कर वे दिवंगत हुए हों, उतने किलो गौ ग्रास का होना न्यूनतम आवश्यक है। धनाभाव की स्थिति में जितना यथाशक्ति बन पड़े, उतना गौग्रास खिलायें।

प्रेम संबंधों में स्थायित्व और दाम्पत्य प्रेम में अभिवृद्धि व माधुर्य के लिए गौवंश को गुड़ खिलाएं।