मेवाड़ परिक्रमा – जंगल में मंगल का संगीत सुनाता है कटावला मठ

आकर्षण और श्रद्धा के केन्द्र हैं ग्यारह मुखी हनुमानजी

मेवाड़ अंचल में प्राचीन और नवीन धर्मधामों की कोई कमी नहीं हैं। कई प्राचीन मन्दिरों और आश्रमों को नया स्वरूप देकर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाया गया है। इन धर्म स्थलों के प्रति लोक श्रद्धा के दर्शन हमेशा होते हैं। ऎसा ही एक धार्मिक स्थल उदयपुर जिले के कटावला में तालाब के पास है जहाँ प्राकृतिक स्थल के साथ ही कई सारे श्रद्धा केन्द्र भी हैं।

कटावला मठ के नाम से प्रसिद्ध और करीब 500 वर्ष पुराने इस धाम पर पुराने जमाने से सिद्ध संतों की परंपरा चली आ रही है। इनकी समाधियां भी बनी हुई हैं जिनके प्रति धर्मावलम्बियों की आस्था है और साल भर में अनेक अवसरों पर गुरुपूजा करते हुए इन दिवंगत महात्माओं का स्मरण किया जाता है। यहीं पर प्राचीन धूंणी है जिसके सान्निध्य में सिद्धों ने तपस्या कर सिद्धियां पायी।

यहां अवस्थित 4 समाधियों में रामानंद, ओंकारपुरी, नारायण गिरि व लाल भारती की समाधियां हैं। इनमें नारायण गिरि महाराज की जीवित समाधि है जिसके प्रति भक्तों की अन्यतम और अगाध आस्था है। कटावाला नामकरण के पीछे महाराणा प्रताप से संबंधित किम्वदन्ती भी सुनी जाती है।

वर्तमान में श्री घनश्याम महाराज (9460069009) इस स्थल पर विराजमान हैं। उनके सान्निध्य में इस धाम का बहुत विकास हुआ है। इस धर्म धाम के प्रति कटावला के साथ ही आस-पास के क्षेत्रों चावण्ड, निम्बोदा, सैपुर, सराड़ा आदि 12 गांवों से श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।

यहीं पर भगवान श्री हनुमानजी मन्दिर हैं जिसमें एकादश मुख वाली हनुमान मूर्ति है, ऎसी प्रतिमाएं बहुत कम देखने में आती हैं। मंगलवार और शनिवार को यहां हनुमान भक्तों का तांता लगा रहता है। हनुमान चालीसा और सुन्दरकाण्ड के सामूहिक आयोजन यहां अक्सर होते रहते हैं।

प्राकृतिक रूप से बनी छोटी सी गुफा वाला हिंगलाज माता जी का मन्दिर है जिसमें नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान होते हैं। मठ परिसर में पेड़-पौधों के कारण हरियाली और सुकून पसरा रहता है।

जागनाथ महादेव का मन्दिर भी है। शिवरात्रि व कार्तिक पूर्णिमा को यहाँ छप्पन भोग होते हैं व भक्तों का मेला उमड़ता है। भोलेनाथ को खासकर संतति की कामना पूरी करने वाले दैव के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त है और झडूले व सामूहिक भोज के आयोजन यहां होते हैं।  इस धाम पर श्रद्धालुओं द्वारा होली व जमरा बीज पर गैर खेली जाती है। कटावला मठ के प्रति भक्तों की पारम्परिक आस्था का दिग्दर्शन इस धाम पर वर्ष भर किया जा सकता है।

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