अपनी बात-सच्ची बात

कैसे-कैसे सरकारी कारिन्दे, खाओ और देर तक सोते रहो  … पक्षियों के लिए चुग्गा डालना बचपन से मेरी आदत में शुमार रहा है। जहाँ-जहाँ भी…

अपने-अपने पिता

आजकल पिता होने का अर्थ उसी महान इंसान से नहीं रह गया है जिसकी वजह से हम संसार में आए हैं। भीड़ में खूब सारे…

छातीकूटिए अमर रहें

आज अगर छाती कूटने वालों की गणना शुरू हो जाए तो सभी जगह बहुत से लोग मिल जाएंगे जो बिना किसी कारण के छाती पीटते…

ये कभी न होंगे अपने …

अपने आस-पास ऎसे लोग बहुत बड़ी संख्या में विचरण करते रहे हैं जो अपनी पहचान कायम करने के फेर में वो सब कुछ कर रहे…