अपने-अपने पिता

आजकल पिता होने का अर्थ उसी महान इंसान से नहीं रह गया है जिसकी वजह से हम संसार में आए हैं। भीड़ में खूब सारे…

छातीकूटिए अमर रहें

आज अगर छाती कूटने वालों की गणना शुरू हो जाए तो सभी जगह बहुत से लोग मिल जाएंगे जो बिना किसी कारण के छाती पीटते…

ये कभी न होंगे अपने …

अपने आस-पास ऎसे लोग बहुत बड़ी संख्या में विचरण करते रहे हैं जो अपनी पहचान कायम करने के फेर में वो सब कुछ कर रहे…

व्हाट्सअपिया गरुड़ पुराण ….

व्हाट्सअप ने क्या से क्या कर डाला, जीवनशैली में आया आमूलचूल बदलाव, हम उनके आभारी हैं जो व्हाट्सअप पर ब्रह्माण्ड भर का ज्ञान, चित्र और…

दमखम है तो लिखें अपने मौलिक विचार, चुरा-चुरा कर क्या लिखना

किसी भी अच्छी, सच्ची और जनहित-राष्ट्रहित की बात पर कुछ कहना-लिखना अपने आप में शौर्य-पराक्रम से कम नहीं। सत्य के उद्घाटन और यथार्थ प्रतिक्रिया देना…