Satire

जब अकबर बादशाह को हुआ अचम्भा ….

शहंशाहे हिन्द अकबर बादशाह के आज हरम में आने से पहले किसी ने कोई चेतावनी नहीं दी। बादशाह खासे नाराज हुए। गुस्से से तरबतर हो पूछ ही लिया – आज कोई आवाज नहीं पड़ी, कैसे पता चलेगा हरम में। सिपहसालार ने अदब से कहा – हुजूर अब आवाज लगाकर चेतावनी देने की जरूरत नहीं है।  बेगमों, रण्डियों और रक्काशाओं के ... Read More »

दोष न दो इन बाबाओं को ….

ये बाबा न होते तो नुगरों-नालायकों को पद-प्रतिष्ठा और पैसा पाने का आशीर्वाद कौन देता , माईक वाले, बैण्डबाजे वाले, टैण्ट वाले, फूल-नारियल-अगरबत्ती वाले, गाड़ीघोड़े वाले, टीवी, फ्रीज, एसी वाले, तमाम धन्धेबाज क्या करते, पैसों का लेन-देन और फाइनेंस, ब्याज-मनीलैण्डिंग वाले क्या करते, सामूहिक भोज के ठेके लेने वाले किस पर गुजारा करते, ये बाबा न होते तो तमाम तरह ... Read More »

कभी न हो रिटायरमेंट

रिटायरमेंट की आयु सीमा को ही खत्म कर देना चाहिए . . . कितना अच्छा हो कि रिटायरमेंट की आयुसीमा आमृत्यु कर दी जाए। जब तब जीयें, तब तक नौकरी करते रहें। इसके बाद क्रियाकर्म और बरसी तक के सारे खर्च सरकारी मद में किए जाने की कोई योजना बनाई जाए ताकि सामाजिक सरोकारों का निर्वाह अस्तित्व रहने पर भी ... Read More »

व्यंग्य लेख …. यह है चमत्कार – गधों के श्राप का

आखिर देख ही लिया न गधों के श्राप का परिणाम। और वह भी कोई एक गधे या गधी का नहीं, पूरी की पूरी गधा प्रजाति जब रुष्ट हो जाती है तब कितना बड़ा भूकम्प ला देती है, यह बात इतिहास सदियों तक सुनाता रहेगा। गधों की महिमा के बखान का यह ऎतिहासिक चमत्कार पूरी की पूरी गधा प्रजाति के लिए ... Read More »