स्मृतिशेष – श्री हरीशचन्द्र द्विवेदी

सर्वस्पर्शी सौम्य व्यक्तित्व  ताजिन्दगी चहचहाता रहा प्रशंसा के परिन्दों भरा आसमाँ       वागड़ की रत्नगर्भा वसुन्धरा एक से बढ़कर एक रत्नों की जननी रही है।…