Banswara

आत्मीयता का प्रपात, लोकसेवा के पर्याय भाई श्री सुरेश पाठक

हर दिल अजीज, असंभव को संभव कर देने वाला टाईगर नहीं रहा विश्वास आज भी नहीं होता, पर नियति के शाश्वत सत्य को स्वीकार करने के सिवा और कोई चारा भी नहीं।  अभी 9 अक्टूबर 2017 सोमवार की ही बात है। मनहूस संध्या काल के कपाल पर कुछ ऎसा लिख गई है कि जिसे कोई पढ़ न सका। केवल सूचना ... Read More »

वागड़ अंचल को गर्व है नवाचारी सृजनधर्मी शिक्षिका ऊषा पण्ड्या पर …

सुनहरा भाग्य लिखती है हर लकीर … लकीरों का कमाल अपने आप में इतना अधिक करामाती और तिलस्मी होता है कि यह अक्षर ब्रह्म की आराधना का आरंभिक चरण है। बांसवाड़ा जिले की होनहार शिक्षिका श्रीमती ऊषा पण्ड्या ने अपने मौलिक हुनर के बूते जिस तरह लकीरों से अक्षरों और वर्णों की दुनिया को नवीन आयाम दिए हैं, यह अपने ... Read More »

फक्कड़ी का दूसरा नाम – वागड़ विभूति दिनेश दादा बादशाह

दक्षताओं और हुनर के बावजूद कठोर जिन्दगी के ढेरों पड़ावों से होकर जो कोई तप कर निकलता है उसी के साथ  ज्ञान, अनुभवों और व्यवहारिक जीवन के सारभूत तत्वों का मिश्रण व्यक्तित्व में ऎसा निखार ला देता है कि फिर इंसान को न किसी से भय होता है, न अपेक्षा या उपेक्षा का भाव। हर मामले में बिन्दासगी, मुखर अभिव्यक्ति ... Read More »

स्वाभिमान और आत्मीयता के पूरक साहित्यकार श्री हरीश आचार्य

श्रद्धेय अग्रज भाईश्री हरीश आचार्य जी का हर अन्दाज निराला है। उनके शब्दों में परमाण्वीय ऊर्जा है, व्यवहार में आत्मीयता का ज्वार उमड़ता है। उनके जीने का अन्दाज ही ऎसा है कि जो कोई उनके सम्पर्क में आता है, सर्वस्पर्शी व्यक्तित्व के ताजगी भरे माधुर्य से अभिभूत हो उठता है। सबसे बड़ी और अव्वल बात यह है कि वे दूसरे ... Read More »

बांसवाड़ा की बात – अम्बा बा होने का मतलब आतिथ्य सत्कार की प्रतिमूर्ति

बांसवाड़ा की रत्नगर्भा वसुन्धरा में असंख्य ऎसी हस्तियां पैदा हुई हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इनका माधुर्यपूर्ण और औदार्य से लक-दक जीवन-व्यवहार और आत्मीयता ऎसी कि कहीं और देखने तक न मिले। इन्हीं में एक थीं अम्बा बा।  कुलीन औदीच्य परिवार की अम्बा बा का मकान सिंगवाव से औदीच्यवाड़ा स्कूल के रास्ते है जिसमें प्रवेश का ... Read More »

सुरमा ने दिया सुनहरा भविष्य

लगातार व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के दौर में आजीविका का जुगाड़ करना कितना मुश्किलों भरा है इसे समझना आसान है लेकिन बांसवाड़ा में एक शख़्स ऎसा है जिसने आँखों में सुरमा लगाने का हुनर अपनाया और इसे अपनी आजीविका का साधन बनाने के साथ ही लोकप्रियता भी हासिल की। हालांकि वर्तमान युग में सुरमे का प्रचलन करीब-करीब खत्म सा ही हो गया ... Read More »

गायत्री साधना को समर्पित दिव्य साधक ः बण्डू महाराज

शैव, शाक्त और वैष्णव उपासना धाराओं के साथ ही वैदिक परम्पराओं और प्राच्यविद्याओं का गढ़ रहा राजस्थान का दक्षिणांचलीय जिला बांसवाड़ा धर्म-कर्म के क्षेत्र में पूरे भारतवर्ष में अनूठा स्थान रखता है। पुरातन काल में ऋषि-मुनियों और सिद्ध संतों की तपस्या से अनुप्राणित इस अंचल में प्राचीन काल से संत-महात्माओं और महन्तों की लम्बी श्रृंखला विद्यमान रही है। हिन्दुस्तान का ... Read More »

लोक सेवा की मुरली बजा रहे हैं निष्काम कर्मयोगी 89 वर्षीय युवा पं. मुरलीधर भट्ट

रत्नगर्भा वसुन्धरा बांसवाड़ा आदिकाल से रत्नों को जन्म देती हुई अंचल को धन्य करती रही है। माही, मैया और प्रकृति के इस आँगन में समाज-जीवन के हर क्षेत्र में एक से बढ़कर एक विभूतियों ने अपने कर्मयोग की छाप छोड़ी है। बांसवाड़ा की इस अखूट और अजस्र परम्परा में आज भी कई हस्ताक्षर ऎसे हैं जो समाज को रोशनी देने ... Read More »