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रोचक घटना – जब सारे अतिथि और वक्ता ठगे से रह गए

वागड़ के रत्न ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता श्री पन्नालाल पटेल की जयन्ती पर विशेष प्रस्तुत   डूंगरपुर जिले के सरहदी गांव माण्डली में जन्मे और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता श्रद्धेय श्री पन्नालाल पटेल जी का आज जन्म दिन है। इस अवसर पर एक ऎसी रोचक घटना सुनाने को जी कर रहा है जिसे पढ़ कर कोई भी हँस-हँस कर लोट-पोट हुए बिना ... Read More »

बांसवाड़ा की बात – अम्बा बा होने का मतलब आतिथ्य सत्कार की प्रतिमूर्ति

बांसवाड़ा की रत्नगर्भा वसुन्धरा में असंख्य ऎसी हस्तियां पैदा हुई हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इनका माधुर्यपूर्ण और औदार्य से लक-दक जीवन-व्यवहार और आत्मीयता ऎसी कि कहीं और देखने तक न मिले। इन्हीं में एक थीं अम्बा बा।  कुलीन औदीच्य परिवार की अम्बा बा का मकान सिंगवाव से औदीच्यवाड़ा स्कूल के रास्ते है जिसमें प्रवेश का ... Read More »

अनूठा व्यक्तित्व – – – रोशनी से वंचित, पर सुनहरा ताना-बाना बुनने में माहिर

दृष्टिहीनता पर हावी है अनूठा हुनर         किशोरावस्था में ही नियति ने मेवाड़ के इस शख्स की आँखों की रोशनी छीन ली मगर हुनर, जिजीविषा और अदम्य आत्मविश्वास की रोशनी ने इसके व्यक्तित्व को ऎसा निखार दिया कि आज वह हस्तकलाओं के क्षेत्र में अपना नाम कमा रहा है। यह बात है उदयपुर शहर के जगविख्यात जगदीश मंदिर ... Read More »

सुरमा ने दिया सुनहरा भविष्य

लगातार व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के दौर में आजीविका का जुगाड़ करना कितना मुश्किलों भरा है इसे समझना आसान है लेकिन बांसवाड़ा में एक शख़्स ऎसा है जिसने आँखों में सुरमा लगाने का हुनर अपनाया और इसे अपनी आजीविका का साधन बनाने के साथ ही लोकप्रियता भी हासिल की। हालांकि वर्तमान युग में सुरमे का प्रचलन करीब-करीब खत्म सा ही हो गया ... Read More »

गायत्री साधना को समर्पित दिव्य साधक ः बण्डू महाराज

शैव, शाक्त और वैष्णव उपासना धाराओं के साथ ही वैदिक परम्पराओं और प्राच्यविद्याओं का गढ़ रहा राजस्थान का दक्षिणांचलीय जिला बांसवाड़ा धर्म-कर्म के क्षेत्र में पूरे भारतवर्ष में अनूठा स्थान रखता है। पुरातन काल में ऋषि-मुनियों और सिद्ध संतों की तपस्या से अनुप्राणित इस अंचल में प्राचीन काल से संत-महात्माओं और महन्तों की लम्बी श्रृंखला विद्यमान रही है। हिन्दुस्तान का ... Read More »

लोक सेवा की मुरली बजा रहे हैं निष्काम कर्मयोगी 89 वर्षीय युवा पं. मुरलीधर भट्ट

रत्नगर्भा वसुन्धरा बांसवाड़ा आदिकाल से रत्नों को जन्म देती हुई अंचल को धन्य करती रही है। माही, मैया और प्रकृति के इस आँगन में समाज-जीवन के हर क्षेत्र में एक से बढ़कर एक विभूतियों ने अपने कर्मयोग की छाप छोड़ी है। बांसवाड़ा की इस अखूट और अजस्र परम्परा में आज भी कई हस्ताक्षर ऎसे हैं जो समाज को रोशनी देने ... Read More »