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नरपिशाच ही हैं ये

सच्चा और वास्तविक इंसान वही है जो अपने सम्पर्क में आने वाले हर प्राणी को प्रेम, स्नेह, श्रद्धा और आनंद प्रदान करता हुआ इतना अधिक खुश कर दे कि हर कोई उससे बार-बार मिलने की तीव्रतर इच्छा रखे और जीवन भर श्रद्धा से याद रखे। एक इंसान को दूसरे इंसान या इंसानों के समूह से मिलकर दिली प्रसन्नता का अनुभव ... Read More »

ये हैं असली दिव्यांग

इंसान के रूप में वही सफल है जो इंसानियत के तमाम गुणधर्मों के साथ अकेले के दम पर वह सब कुछ कर सकने में समर्थ हो जो सामान्य जिन्दगी के बेहतर निर्वहन के लिए जरूरी हो तथा कोई सा काम अटके नहीं, किसी और की जरूरत न पड़े। पुरुषार्थी और कर्मयोगी लोग ऎसे ही होते हैं जो अकेले ही खुद ... Read More »

खुद ही तय करें अमृत उगलें या जहर

मनुष्य का शरीर अपने आप में दैवत्व से परिपूर्ण देवालय भी है और आसुरी शक्तियों का स्थान भी। मनुष्य को इस बात की पूरी स्वतंत्रता है कि वे किसे अंगीकार करे, दैवत्व या राक्षसत्व। हर इंसान के लिए दोनों तरफ के रास्तों को स्वीकार करने और उन पर चलने के लिए अपार संभावनाएं हैं जिनका अवलम्बन वह कर सकता है। ... Read More »

गंभीर चर्चा – कुछ नया करें, तब करें नामकरण

किसी भी पुराने स्थान, स्मारक, मार्ग, चौराहा, गांव, शहर, जलाशय, कूप-बावड़ी या किसी भी तरह की परंपरागत भौतिक संपदा का किसी और के नाम से नामकरण करना हमारे पूर्वजों, पुरातन भामाशाहों, निर्माताओं और सृजनकर्ताओं को भुलाने के सायास षड़यंत्र के साथ ही उनका घोर अपमान है। और सरासर नाम-अतिक्रमण है। आजकल यह परिपाटी बन गई है कि लोग वादों और ... Read More »

अनूठा व्यक्तित्व – – – रोशनी से वंचित, पर सुनहरा ताना-बाना बुनने में माहिर

दृष्टिहीनता पर हावी है अनूठा हुनर         किशोरावस्था में ही नियति ने मेवाड़ के इस शख्स की आँखों की रोशनी छीन ली मगर हुनर, जिजीविषा और अदम्य आत्मविश्वास की रोशनी ने इसके व्यक्तित्व को ऎसा निखार दिया कि आज वह हस्तकलाओं के क्षेत्र में अपना नाम कमा रहा है। यह बात है उदयपुर शहर के जगविख्यात जगदीश मंदिर ... Read More »

महाराणा प्रताप का वैश्विक गौरवगान करेगा प्रताप गौरव केन्द्र

महाराणा प्रताप का वैश्विक गौरवगान करेगा प्रताप गौरव केन्द्र  प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के अलौकिक व्यक्तित्व और शौर्य-पराक्रम की जाने कितनी गाथाओं से भरपूर ऎतिहासिक कर्मयोग से देश-दुनिया को परिचित कराने की दिशा में मेवाड़ के लिए एक नए युग का उदय होने जा रहा है जब राष्ट्रीय तीर्थ प्रताप गौरव केन्द्र का 28 नवम्बर 2016, सोमवार को ... Read More »

पुण्य क्षय का संकेत है वंशजों में दरार

कुल-कुटुम्ब सौहार्द और संगठन का परिणाम है और इसमें उत्तरोत्तर विस्तार एवं सुदृढ़ता के साथ समृद्धि पाना इस बात का द्योतक है कि पूर्वजों के साथ वर्तमान पीढ़ी का भी पुण्य प्रभाव बढ़ रहा है और पुरानी पीढ़ी के अनुपात में पुण्य का दौर निरन्तर बना हुआ है। हालांकि ऎसा बिरले परिवारों में ही हो पाता है और वे भी ... Read More »

परखें मानवीय संवेदनाएँ

नोटबंदी से पसरा हुआ मौजूदा माहौल समाज और देश की अस्मिता से जुड़ा वह मुद्दा है जो भारतीय संस्कृति, सभ्यता और देश की एकता-अखण्डता से जुड़ा हुआ प्रत्यक्ष असरकारक है। इस बात को वे लोग कभी समझ नहीं पाएंगे जिनके लिए पैसा ही परमेश्वर है और पैसे कमाना, जमा करना तथा पराये पैसों पर मौज उड़ाना ही जिनकी जिन्दगी है। ... Read More »

जुड़े रहें जड़ों से

आधार के बिना सब कुछ निराधार है। यह आधार अपने आप में वह शाश्वत मंच है जिससे जुड़े रहकर हम केन्द्र का सामीप्य और सान्निध्य पाते हुए खुद को हमेशा ऊर्जित और ताजगी भरा महसूस करते हैं और उसी की ताकत से जीवन क्रम को आनंद भाव के साथ आगे से आगे बढ़ाते हुए मस्ती पाते हैं, मौज उड़ाते हैं। ... Read More »

भौंकने लगे हैं बहुरूपिये और नौटंकीबाज

  प्रकृति के बीच जीते हुए एक जमाने में इंसान को देखकर इंसान खुश होता था, उत्साह के अतिरेक में भर आतिथ्य-सत्कार में रमता हुआ अपने आपको लुटा दिया करता था और अतिथियों या आगंतुकों को खुश देखकर खुद प्रफुल्लित हुआ करता था। और अब, एक आदमी दूसरे से तभी बात करता है जब सामने वाला कुछ लाभ देने या ... Read More »