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कश्मीरी उपद्रवियों को देखते ही गोली मार दी जानी चाहिए …

देश पहले है बाकी सब बाद में, छाती कूटने दो इन मानवाधिकार की दुहाई देने वालों को। देश नहीं रहेगा तो मानवाधिकार किस काम के। मानवाधिकार उन पर लागू होते हैं जो मानव हों, आतंकियों और उपद्रवी गुण्डों को इंसान नहीं माना जा सकता। कितनी शर्मनाक बात है कि उपद्रवी शोर मचाते हुए हमारे पुलिस और सेना के जवानों पर ... Read More »

खामियाजे भी हैं अच्छे कामों के

कुछ दशकों पहले तक जो बुरा काम करते थे, कामचोर हुआ करते थे उन्हें हिकारत भरी दृष्टि से देखा जाता था और उनमें सुधार लाने के चौतरफा प्रयास किए जाते थे। जब से वर्क कल्चर पर ग्रहण लग गया है तभी से नाकाबिलों, कामचोरों और बुरे लोगों को कुछ भी कहने या सुधारने की हिम्मत जवाब देती जा रही है। ... Read More »

ये गुरु हैं या ग्वाले !

जब-जब भी गुरुपूर्णिमा के दिन आते हैं हर तरफ गुरुओं और गुरु महिमा का शोर शुरू हो जाता है। कुछ साल पहले तक गुरुओं तक पहुंचने के लिए जिज्ञासुओं को बहुत मेहनत करनी होती थी, अपने आप को शुद्ध-बुद्ध और निरहंकारी साबित करने के लिए खूब पापड़ बेलने पड़ते थे, खूब सेवा करनी की आवश्यकता होती थी। और उसके बाद ... Read More »

हम सभी बने हैं जगत के लिए

जो जनता के बीच रहता है, जगत में जन्मा है वह हर जीव जनता और जगत के लिए है। उसका परम ध्येय यही है कि वह अपनी ओर से किसी न किसी माध्यम से आत्मनिर्भर बने, अपने जीवनयापन को निरापद और आसान बनाए, साथ ही उन लोगों के लिए जीने की कोशिश करे जिनके बीच रहता है, जिनसे उसका परोक्ष ... Read More »

तमाशिया हैं या तमाशबीन

संजीदा और धीर-गंभीर लोगों को छोड़ दिया जाए तो शेष बचने वालों में अधिकांश लोग हमारी ही तरह या तो तमाशा करने और दिखाने वाले हैं अथवा तमाशा देख-देख कर आनंद पाने की तलाश में निकल कर भटकाव के दौर से गुजरते हुए। हमारी पूरी जिन्दगी का अधिकांश भाग हम दूसरों को खुश करने, उनकी निगाह में अच्छा दिखने, सुन्दर ... Read More »

आत्म निखार के लिए शरीर को तपाना जरूरी

आत्म निखार और आत्म ज्ञान की प्राप्ति के लिए सबसे पहली आवश्यकता इंसान की मौलिक शक्तियों की उपलब्धता और सभी प्रकार की शुद्धता का होना जरूरी है। यह शुद्धता तभी आ सकती है कि जब हम भीतर-बाहर सभी प्रकार से शुद्ध-बुद्ध हों तथा इसमें किसी भी प्रकार का कोई अंतर न रहे। हालांकि यह स्थिति प्राप्त करना मुश्किल जरूर है ... Read More »

यही है भाग्यहीनता

भाग्यहीनता और कुछ नहीं बल्कि आलस्य, प्रमाद और टालमटोल का दूसरा नाम ही है। कुछेक मनस्वी, तेजस्वी और कर्मयोगियों को छोड़ दिया जाए तो आजकल के अधिकतर लोग खुद ही गर्त में जाने के लिए तैयार बैठे हैं और उनके तमाम कर्म ही ऎसे हैं कि जिनसे न उनकी आयु और यश बढ़ सकता है, न समाज का कोई भला ... Read More »

सरसता के लिए परिवर्तन जरूरी

जहाँ जड़ता है वहाँ निरसता है। और जहाँ परिवर्तन है वहाँ सरसता भी है  तथा समरसता और सुकून भी। इंसान की पूरी जिन्दगी में शैशव, यौवन और वृद्धावस्था की तीन अहम परिवर्तनकारी स्थितियों में बहुत सारे अच्छे-बुरे परिवर्तन होते रहते हैं। तभी कहा गया है  चलती का नाम जिन्दगी। जिन लोगों के जीवन में एक ही एक प्रकार के काम, ... Read More »

आत्म आनन्द सर्वोपरि

हर इंसान कर्म करता है लेकिन उसके अनुपात में उसे आत्म आनन्द का अनुभव नहीं हो पाता, न ही कर्मयोग के आनंद का ओज और तेज उसके शरीर और चेहरे से प्रतिभासित नहीं हो पा रहा। कोई सा अच्छा कर्मयोग आकार पा लेता है तब हम फूल के कुप्पा हो जाते हैं, दो-चार घण्टों या दो-तीन दिनों का क्षणिक आनंद ... Read More »

न बाँधे नया कर्मबंधन

जीवन का हर क्षण किसी न किसी कर्म का प्रतीक है और हर कर्म बांधने वाला होता है यदि वह आसक्ति से भरा हो। अनासक्त और परमार्थ के उन कामों का कोई कर्मबंधन नहीं बनता जो निरपेक्ष भाव से जगत के कल्याण के लिए होते हैं। लेकिन जिस कर्म में आसक्ति का भाव होता है, अपेक्षा और किसी न किसी ... Read More »