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विनम्र सुझाव – कितना अच्छा हो यदि ऎसा हो जाए तो

हर सरकारी पत्र/आदेश के हीडर में कार्यालय का फोन नम्बर, ईमेल एड्रेस अनिवार्य रूप से अंकित हो। इस पर जिस अधिकारी के हस्ताक्षर हों, उसके पद नाम या मोहर के नीचे उसका व्हाट्सअप युक्त मोबाइल नम्बर अंकित हो। इससे राज-काज की गति तीव्र होगी तथा किसी भी व्यक्ति को टेलीफोन डायरेक्टरी खंगालने या पीए-पीएस से फोन/मोबाइल नम्बर पूछने की आवश्यकता ... Read More »

आज की बात

चाण्डाल चौकड़ी – किसी को भी ठिकाने लगाने के लिए चार ही काफी हैं। आग की हाण्डी पकड़ने वाले तो किराये के भी मिल जाते हैं। दुष्टाें से न प्रेम करें, न उन पर भरोसा। क्योंकि ये धोखेबाज दगाबाजी के लिए ही पैदा होते हैं।  बिल्ली यदि आकर्षित हो तो चूहों को नहीं मानना चाहिए प्यार का भ्रम। क्योंकि बिल्लियाँ ... Read More »

रोचक घटना – जब सारे अतिथि और वक्ता ठगे से रह गए

वागड़ के रत्न ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता श्री पन्नालाल पटेल की जयन्ती पर विशेष प्रस्तुत   डूंगरपुर जिले के सरहदी गांव माण्डली में जन्मे और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता श्रद्धेय श्री पन्नालाल पटेल जी का आज जन्म दिन है। इस अवसर पर एक ऎसी रोचक घटना सुनाने को जी कर रहा है जिसे पढ़ कर कोई भी हँस-हँस कर लोट-पोट हुए बिना ... Read More »

नालायकों का सबसे बड़ा हथियार है असहयोग

जिन लोगों को एक ही तरह के बाड़े में वर्षों गुजारते रहने की आदत पड़ जाती है वे लोग यह कभी बर्दाश्त नहीं करते कि नई हवाओं की ताजगी आए, कोई अच्छा काम करने वाला उनके वहाँ आ जाए। ऎसे लोगों का सबसे बड़ा हथियार असहयोग है। आजकल बहुत जगहों पर पुराने पापियों और मठाधीशों के डेरे हैं जो बरसों ... Read More »

अपनी बात – मेरा लेखन स्वाभाविक अभिव्यक्ति मात्र

मेरा कोई भी लेखन मेरा नहीं है। जो अनायास विचार आते हैं वह भगवान के वहां से आते हैं और धड़ाधड़ लिपिबद्ध हो जाते हैं। और इन्हें ही आगे से आगे परोसगारी का दायित्व निभा रहा हूं। वैसे मेरा लेखन किसी भी मोड़ पर असत्य या धर्महीन लगे, तो जरूर बताएं।  सत्य कड़वा होता है और रहेगा। इसका यह अर्थ ... Read More »

आत्मविश्वास खो देते हैं अपराधबोध से ग्रस्त लोग

हम लोग बड़ों और प्रभावशालियों से भय खाते हैं और इसी का फायदा उठाकर ये लोग स्वच्छन्द, उन्मुक्त और निरंकुश हो जाते हैं। इनके प्रभावी होने की वजह से हम लोग इनका न विरोध कर पाते हैं न प्रतिरोध। और यही कारण है कि हमारी उदासीनता और मूकदर्शक भावों के कारण असामाजिक, भ्रष्ट और बेईमानों, लूट-खसोट करने वालों का ताण्डव ... Read More »

मुर्दानगी छोड़ो, मुस्कुराते रहो, मस्त रहो

जो प्यार एक मुस्कान द्वारा व्यक्त हो सकता है, वह हजारों नमस्कारों द्वारा व्यक्त नहीं हो सकता। मुस्कराने में अपना कुछ खर्च नहीं होता पर जिसे मुस्कान मिलती है उसकी खुशी बढ़ जाती है। मुस्कराने में शायद एक क्षण लगता है पर उसकी याद किसी को जीवन भर रह सकती है। अपने दैनिक कार्यों में जहाँ भी जिससे मिलिए, मुस्कराते ... Read More »

देश के सबसे बड़े दुश्मन हैं ये सुपर भिखारी बिकाऊ लोग

बिकने वाले लोग न समाज के हो सकते हैं न देश के। इन पर कभी भी किंचित मात्रा में भी विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। ये लोग संसार में अपने आपको बिकवाने के लिए ही पैदा हुए हैं और इन्हें पैसों, भोग या लालच देकर कभी भी खरीदा जा सकता है। फिर जो एक बार बिकना शुरू हो जाता है ... Read More »

जी उठी हैं कठपुतलियाँ, उछालें मार रहे कठपुतले

किसी जमाने में जब श्रव्य-दृश्य के आज की तरह संसाधन नहीं थे तब कठपुतलियां ही मनोरंजन और संदेश से लेकर सम सामयिक हालातों का दिग्दर्शन कराती थी। कठपुतलियां और कठपुतले उन दिनों मनोरंजन के महा पात्र हुआ करते थे और भीड़ भी खूब जुटती थी।  काठ की इन पुतलियाें को आज के टीवी, सिनेमा, मोबाइल और दूसरे सारे साईबर एवं ... Read More »

उपेक्षा करें कमीनों की

  असुरों की सबसे बड़ी विजय है दैव वंश का प्रभावित और प्रतिक्रियावादी हो जाना। लोग हमें भटकाने – भड़काने की कोशिश करते रहते हैं और यही चाहते हैं कि हम अपने श्रेष्ठ कर्म को छोड़कर भटक जाएं। जो कुछ कर रहा है उसे करने दो। उस तरफ ध्यान देने का अर्थ है कि हम उसे गंभीरता से ले रहे ... Read More »