Chintan

क्षमा नहीं, संहार करें

क्षमा करने का समय अब नहीं रहा। क्षमा का उपयोग उसी जमाने के लिए ही उपयुक्त था जब लोग नीति-धर्म और सत्य पर चला करते थे और सच्चे और अच्छे लोग बहुतायत में हुआ करते थे। उन दिनों दण्ड का प्रावधान आज की अपेक्षा सौ गुना अधिक था इसलिए दुष्टों और पापियों पर प्रभावी अंकुश था। फिर भी दयावान और ... Read More »

गायब हो रहा है निष्काम सेवा भाव

सेवा का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है। भगवान की सेवा-पूजा करना हर जीवात्मा को आनंद देता है। धर्म-अध्यात्म में कई मत-सम्प्रदाय हैं जिनमें विभिन्न प्रकार की सेवा और नवधा भक्ति का अवलम्बन होता है। सेवा के मामले में आजकल इन्सानों को कई सारे खेमों में बाँटकर देखा जा सकता है।  जहाँ सेवा शब्द आ जाता है वहाँ सब कुछ अपेक्षाओं से ... Read More »

यह है असली आस्था

धर्म के प्रति आस्थाओं में भी भेद है। एक तरफ वे लोग हैं जो धर्म के नाम पर पैसा बनाने, लोगों को उल्लू बनाने, पद और प्रतिष्ठा पाने के लिए लगे हुए हैं और दूसरी तरफ वे असली श्रद्धालु हैं जिन्हें न पैसा चाहिए, न प्रतिष्ठा, उन्हें तो बस भगवान चाहिएं, और वो भी न मिल पाएं तो भगवान की ... Read More »

न हो जाए पानी-पानी

बरसात का मौसम है चारों तरफ। बरस रहा है सब तरफ पानी ही पानी। क्या मैदानी, क्या पहाड़ी और क्या रेगिस्तानी धरा, अबकि बार पानी ने कहीं का नहीं छोड़ा है। कई बार तो लगता है कि जैसे पानी-पानी हो गई है धरा। बरसात की कहीं कमी है, और कहीं जरूरत से अधिक, और अधिक बारिश का कहर बरपा रही ... Read More »

आनंद और सुकून देता है – गाय-बगुला संबंध

गाय-भैंसों के गुह्य स्थानों व थनों के आस-पास चिपके रहने वाले चींचड़ें खून चूसते रहते हैं। खुद गाय-भैंस लाख कोशिश कर लें लेकिन चींचड़े हटा नहीं पाती। चींचड़े जबर्दस्त और गहरी पकड़ के साथ चिपके रहते हैं। इस स्थिति में गाय-भैंसों के लिए कौअे और बगुले सबसे अधिक प्रिय हो जाते हैं क्योंकि ये अपनी लम्बी और तीखी चोंच से ... Read More »

रक्षाबन्धन पर विशेष – बहनों ! माफ करना, नाकारा हैं हम भाई लोग

भाई-बहन के रिश्तों का प्रतीक पर्व राखी आ ही गया है। सभी भाइयों को इंतजार है बहनों का, सहर्ष आएं और अपनी कलाई पर राखी बाँधें और परस्पर रक्षा और उन्नति के लिए संकल्पों का आदान-प्रदान करें और नई ऊर्जाओं के साथ भाई-बहन के रिश्तों को सुनहरा आकार देते हुए जीवन को ऊध्र्वगामी बनाते हुए आशातीत सफलता का वरण करें। ... Read More »

राखी पर हावी फिजूलखर्ची

पाश्चात्य चकाचौंध और विदेशी अप-संस्कृति को सर्वश्रेष्ठ मान बैठे हम लोगों ने अपने पर्व-त्योहारों और उत्सवों की मौलिकता और मूल संदेश को मटियामेट कर डाला है। अब ये पर्व या तो औपचारिकता होकर रह गए हैं अथवा फैशनी फिजूलखर्ची और छोटे-बड़े पर्दे की मायावी चित्रावली की बन्दरछाप नकल। यों भी हम लोग नकल करने के मामले में प्रसिद्ध हैं और ... Read More »

कहाँ जाएँ बेटियाँ?

कहाँ जाएँ हमारी बेटियाँ। कहाँ पाएँ सुरक्षित माहौल और अभेद्य रक्षा कवच । बेटियों का अपना क्या है? कहाँ तो बेटियों का जन्म स्थल, कहाँ कर्मस्थल, कहाँ पीहर  और कहाँ ससुराल, फिर बेटियों का अपना कौन सा एक ठिकाना रह पाता है।जहाँ ब्याही जाती हैं उस कुनबे के साथ घुमक्कड़ी ठिकानों पर समन्वय की मजबूरियां भी तो हैं। पता नहीं ... Read More »

गौवंश चाहता है ईमानदार प्रयास

गौवंश ऎसी प्रजाति हो गई है जिस पर हर तरफ कहर बरपता रहता है। हाल ही आयी बाढ़ में पथमेड़ा में बहुत बड़ी संख्या में गौवंश काल कवलित हो गया। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर गौवंश का क्षरण होता जा रहा है। कसाइयों के हाथों कटने और यांत्रिक कत्लखानों में कटने वाली गायाें की बात को छोड़ भी दें तो ... Read More »

जे दृढ़ राखे धर्म को तेहि राखे करतार

जिन लोगों को मनुष्य जन्म पाने के उद्देश्य और जीवन लक्ष्यों का पता ही नहीं होता, वे झूठे, मक्कार, धूर्त और पाखण्डी लोग अधमाधम गति से जीते हुए अपने आपको सर्वश्रेष्ठ और अपने कुकर्मों को ही अपना लक्ष्य मानते हैं। यह संसार की रीति है कि चोर-डकैत, बेईमान और भ्रष्ट लोग उन सभी को पागल समझते रहे हैं जो ईमानदार ... Read More »