Chintan

बौद्धिक आतंकवाद

साधना और श्रद्धा एकान्तिक विषय हैं और भगवदीय मार्ग के प्रचार-प्रसार के लिए इनसे जुड़े विषयों पर चिन्तन-मनन और जिज्ञासुओं तक जानकारी का संवहन होना चाहिए। इसी प्रकार भगवान की मूर्तियों और तस्वीरों के दर्शन तथा कर्मकाण्ड का भी श्रद्धा से गहरा रिश्ता रहा है लेकिन आजकल धर्म के मूल मर्म से जुड़ी बातें गायब हैं और इनके स्थान पर ... Read More »

झूठों की भरमार

किसी भी इंसान की टोह लेनी हो तो सबसे पहली कसौटी यही है कि वह झूठा है या सच्चा। जो इंसान सच बोलता है वही सच्चा है। जो झूठ बोलता है उसे सच्चे इंसान की परिधि में नहीं रखा जा सकता। जो इंसान झूठ बोलता है, चाहे वह झूठ आंशिक हो, आधा-अधूरा हो या फिर पूरा का पूरा, उस इंसान ... Read More »

विरोधी अमर रहें, चुनौतियाँ बनी रहें

सृष्टि में जागरण हो तभी नवप्रभात का अहसास होता है अन्यथा बहुत सारे लोग हैं जिनके भाग्य में उषाकालीन सूर्य के दर्शन नसीब नहीं हैं। हर इंसान के जीवन में रोजाना नवप्रभात का सुनहरा सूरज उगता है, कुछ लोग इस शाश्वत सत्य को स्वीकार कर उसका लाभ लेते हैं और दूसरे सारे बिना अंधकार के उदासीनता की चादर ओढ़कर भोर ... Read More »

दीप से दीप जलाते चलो ….

दीपावली रोशनी का पर्व है और यह संदेश देता है कि न केवल हमारा जीवन बल्कि सभी का जीवन आलोकित बना रहे, परिवेश में उजाला बना रहे और कहीं भी अँधेरे का नामोनिशान न रहे। दो-चार दिन दीप जलाकर रोशनी कर देने का कोई औचित्य नहीं है यदि हमारे अन्तर्मन में दीवाली के दीपों का संदेश साल भर न बना ... Read More »

मनः सौन्दर्य ही देता है आकर्षक रूप-रंग

पूरी दुनिया रूप की दीवानी है। भारतीय संस्कृति में तो दीवाली और धनतेरस के बीच का पूरा दिन ही रूप की आराधना को समर्पित होकर रूप चौदस या रूप चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। धर्मशास्त्रीय महत्व के साथ ही यह पर्व रूप-रंग निखारने के लिए प्रसिद्ध है। आजकल इंसान के लिए गुणों, हुनर, ज्ञान और अनुभवों से लेकर ... Read More »

असली धन तो ये है

धन के मामले में हमारी सोच आज भी विकसित नहीं हो पायी है। धन और लक्ष्मी के मामले में हमने यही मान लिया है कि मुद्रा, आभूषण और जमीन-जायदाद ही धन हैं और जीवन के लिए ये ही सब सर्वोपरि हैं। इस धन को समझने के लिए एकमात्र शब्द निधन पर गंभीरता से सोचना चाहिए। धन वह है जो निधन होने से पूर्व हमें प्राप्त था। इसमें न केवल धन-दौलत, जमीन-भवन, स्वर्ण-रजत आभूषण या और कुछ ही धन नहीं है बल्कि धन है हमारा जीवन, प्राणों का ... Read More »

हिलने लगी है बुनियाद

सब तरफ अनिश्चितता का दौर व्याप्त हो गया है। आदमी का कोई भरोसा नहीं रहा। कभी इधर कूद पड़ता है कभी उधर। हर तरफ उछलकूद का जमाना है। किसी को सूझ नहीं पड़ रही है कि आखिर क्या करे और क्या न करे। जब से आदमी अपनी जड़ों से कट गया है, गाँव और संस्कृति से दूर हो गया है, ... Read More »

आकर्षित न हों, खुद में जगाएँ आकर्षण

सृष्टि का हर जीवन्त तत्व एक-दूसरे को आकर्षित करता रहा है। यह शाश्वत स्वभाव है। स्वजातीय वस्तुओं, व्यक्तियों, विचारों और तरंगों के बीच सहज, स्वाभाविक और सनातन आकर्षण भाव रहता है चाहे उनके गुणधर्म, स्वभाव और प्रकृति के कितने ही प्रकार क्यों न हों। दुनिया के अधिकांश कर्म और व्यवहार आकर्षण पैदा  करने के लिए होते हैं। प्रकृति भी समानधर्मा ... Read More »

शैतानी ब्लेकमेलर

दुनिया की आधी से अधिक आबादी निन्दा रस के फव्वारों से आनंद पाने के लिए हमेशा उतावली बनी रहती है। खाने-पीने और सोने में इन लोगों को जितना अधिक आनंद नहीं आता होगा उतना अनिर्वचनीय और अप्रत्याशित सुकून मिलता है इन लोगों को दुनिया भर की बातों, हरकतों और दूसरों की निन्दा में। एक जमाना वो था जब लोगों को ... Read More »

हर क्षण का उपयोग करें

संसार है ही सृजन और इतिहास बनाने के लिए। भगवान मनुष्य के रूप में धरती पर हमें इसीलिए भेजता है ताकि हम पूर्वजों के संचित ज्ञान, अनुभवों और सारभूत तत्वों को आत्मसात करते हुए अपनी बुद्धि और विवेक के अनुसार पुराने के मुकाबले कुछ और नया जोड़ें ताकि जीवों और जगत के कल्याण की गति तीव्रता को प्राप्त करे। मनुष्य ... Read More »