Chintan

सम सामयिक शोध निष्कर्ष

इंसान के लिए वे सारे लोग दुश्मन हैं जो बिना किसी कारण या आवश्यकता के बेवजह मैसेज-दर-मैसेज की बरसात करते रहते हैं, फालतू की जानकारी का आयात-निर्यात करते हुए कुली या सफाईकर्मी की तरह इनका आदान-प्रदान करते रहते हैं, देवी-देवताओं के नाम पर मैसेज और फोटो की बरसात करते रहते हैं। इन लोगों से न कोई नित्य-नियम या दिनचर्या की ... Read More »

ये बत्तियाँ किसी काम की नहीं …

बत्तियों से पहचाने जाने वाले लोग अधीश्वर होने के इसी मुगालते में जीते हैं कि दुनिया उनके लिए बनाई गई है और बत्तियों की दुनिया का उन्मुक्त व स्वेच्छाचारी उपभोग करने के लिए केवल वे ही पात्र हैं। खुद को अश्वत्थामा मान बैठे इन लोगों को पता नहीं कि मणि छीन लेने वाले खुद्दार भी इसी दुनिया में हैं और ... Read More »

यही है असफलता का कारण

हर इंसान लौकिक और अलौकिक सुखों की प्राप्ति चाहता है और इसके लिए अपने-अपने हिसाब से पूजा-पाठ और साधना का आश्रय प्राप्त करता है। हर इंसान की किसी न किसी जड़-चेतन के प्रति आस्था होती ही है और इसका अवलम्बन करता है।  बहुत से लोगों की साधना और पूजा-पाठ दिख जाता है जबकि बहुत से ऎसे भी हैं जो बाहरी ... Read More »

यह है राज दुष्टों की मौज-मस्ती का

इंसानों के जीवन के बारे में शंकाओं का दौर हमेशा पसरा हुआ रहता है। कई शंकाएं निराधार होती हैं जबकि कुछेक के पीछे कोई न कोई  मिथक या आधार जरूर रहता है। अधिकतर लोगों की यह शंका मन के कोनों से लेकर विद्वजनों, संत-महात्माओं और जानकारों के सामने यह आती है कि दुनिया में बहुत से नराधम रोजाना पाप कर्मों ... Read More »

कुछ नहीं है इससे आगे

बात सुख की हो या दुःख की। इन दो अवस्थाओं के बीच ही इंसान पूरी जिन्दगी जीते-जीते मरता है और मरते-मरते जीता है। यह सब कुछ इसलिए है कि वह न सुख के चरम को जानता है न दुःख के चरम को। असल में सुख और दुःख दोनों विशुद्ध रूप से भ्रम की ही अवस्थाएं है। इंसान तभी तक सुख-दुःख ... Read More »

जिन्दगी भर मिलेंगे भौंकने वाले

चाहे कुछ भी हो जाए, कोई कितना ही अच्छा क्यों न हो, कोई कितना ही अच्छा काम क्यों न कर रहा हो, उसकी आलोचना-निन्दा करने वाले हर समय कुछ न कुछ होते ही हैं जो तरह-तरह की बातें और अफवाहें फैलाकर सज्जनों को बदनाम करने की हरचन्द कोशिश करते रहते हैं। इस किस्म के लोग हर साल कुछ न कुछ ... Read More »

आओ योग करें

भारतवर्ष के लिए यह गर्व, गौरव और प्रतिष्ठा का विषय है कि उसकी पहल पर पूरी दुनिया आज अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। यह अपने आप में उस संकेत की शुरूआत है जो विश्व गुरु के रूप में स्वीकार्यता को परिपुष्ट करती है। हमारा  ज्ञान-विज्ञान और सब कुछ हर मामले में सर्वश्रेष्ठ और सर्वोपरि है किन्तु हम अपने ही ... Read More »

बनाएं खुद की पहचान

दुनिया के सारे उपदेशक, भाषणबाज और नौटंकीबाज किसी न किसी तथाकथित आदर्श इंसान का नाम लेकर कहते हैं कि खुद को कुछ बनाना चाहते हो तो उनका अनुकरण करो,  इनका अनुकरण करो। हर युग में ऎसे सैकड़ों नाम होते हैं जिन्हें ले लेकर ये लोग इनकी तरह बनने के लिए दबाव डालते हैं, प्रेरित करते हैं और चाहते हैं कि ... Read More »

दिखावा और मजबूरी है इनकी शालीनता और गांभीर्य

मनुष्य का सर्वांग मूल्यांकन केवल चिकनी-चुपड़ी वाणी, वाग्विलास, तारीफ के पुलिन्दे बांधने की क्षमता, स्वार्थजनित विनम्रता अथवा चापलुसी से लवरेज भाषा से नहीं होता बल्कि मन, कर्म और वचन सभी से होता है। कोई इंसान कितना ही मीठा-मीठा, प्रिय-प्रिय और लुभाने वाला बोलता रहे, किसी के भी प्रति चाहे कितना ही कृत्रिम आदर-सम्मान और श्रद्धा जताता रहे, उसका कोई अर्थ ... Read More »

एक ही योग संभव है परिव्राजक या कूपमण्डूक

परिपूर्ण क्षमताओं से नवाजे होकर धरा पर आए इंसानों के लिए भगवान ने पूरी जिन्दगी दो योग ही निर्मित किए हैं। एक है परिव्राजक योग और दूसरा है कूपमण्डूक योग। क्षमताएं सभी में समान होती हैं लेकिन देश, काल और परिस्थितियों से समझौता करते हुए अपने हक में हर तरह के समीकरण बिठाने में माहिर लोग हर कीमत पर अपने ... Read More »