Chintan

यों करें पापों का प्रायश्चित

कलिकाल में पाप से कोई नहीं बच सकता। पग-पग पर पापियों, पातकियों और पाप का माहौल इतना अधिक पसरा हुआ है कि कोई कितना ही बचने की कोशिश करे, पाप के घेरे में आ ही जाता है। हम खुद कितने ही पवित्र और पुण्यशाली क्यों न हों, पाप से बचना असंभव तो नहीं किन्तु मुश्किल जरूर है। सब तरफ कलियुग ... Read More »

पूर्णता के लिए जरूरी है सम्पूर्ण रिक्तता

यह दुनिया आधे-अधूरों और आंशिकों से भरी हुई है। पूर्ण होने और हर मामले में पूर्णता पाने के लिए हर कोई प्रयत्नशील रहता है लेकिन पूर्णता के करीब नहीं पहुँच पाता क्योंकि पूर्णता पाने के लायक रिक्तता पैदा नहीं हो पाती। हम सभी लोग अतिरिक्त पाने के लिए हमेशा लालायित रहा करते हैं किन्तु अपने पास जो कुछ है, जो ... Read More »

बढ़ते जा रहे हैं अघोषित पागल

हर कोई अपने आप को बुद्धिमान और महान मानने और मनवाने के चक्कर में फँसा हुआ है। और इस फरेब को बरकरार रखने के लिए इतना कुछ मायावी और आडम्बरी होता जा रहा है कि जो कुछ वह था, वह भी नहीं रहा। न घर का रहा, न घाट का, न चौराहों का रहा, न और किसी बाड़ों, गलियारों और ... Read More »

राष्ट्रीय कलंक हैं भिखारी

भिखारियों के कारण देश कई समस्याओं और बीमारियों से जूझ रहा है। हम सभी लोग स्वच्छ भारत अभियान चला रहे हैं लेकिन देश से भिखारियों  की सफाई करने की आज सबसे अधिक जरूरत है क्योंकि इन भिखारियों के कारण से सामाजिक, आर्थिक और परिवेशीय समस्याओं का ताण्डव गहराता जा रहा है। हम लोग धरम और दान-पुण्य के नाम पर जितना ... Read More »

नहीं दिखता टीम वर्क

हम सारे के सारे सामाजिक प्राणी आजकल सामूहिक विकास और टीम वर्क की बातें तो करते हैं लेकिन हमारे भीतर सामूहिक विकास का कितना जज़्बा है, कितना हम टीम वर्क में विश्वास रखते हैं यह समझ पाना कोई मुश्किल नहीं है क्योंकि आजकल लोगों का भरोसा केवल अपने स्वार्थ, स्वयं की प्रशस्ति और वैयक्तिक प्रतिष्ठा तक ही सिमट कर रह ... Read More »

पतित संसर्ग से बचें, वरना मिलेगा नरक

हमारा खुद का अच्छा होना ही काफी नहीं है बल्कि यह भी जरूरी है कि हम जिन लोगों के साथ हों, वे भी हमारी ही तरह अच्छे होने चाहिएं तभी मैत्री और सत्संग का लाभ जीवन में उजाला भरने में कामयाब हो सकता है। किसी भी इंसान के चाल, चलन और चरित्र के बारे में सीधी और सटीक थाह पानी ... Read More »

ऊर्जा का रूपान्तरण सीखें

विध्वंस और सृजन की हर भूमिका ऊर्जा से संबधित है। ऊर्जा सूक्ष्म और स्थूल, जड़ और जीवन्त, चल और अचल सभी प्रकार के पदार्थों, तत्वों, अणु-परमाणुओं, तत्वों और पंच तत्वों के सम-विषम मिश्रण से लेकर सृष्टि के प्रत्येक उपादान और प्रभाव तक विद्यमान है। इस ऊर्जा के माध्यम से कुछ भी परिवर्तन लाया और दिखलाया जा सकता है। ऊर्जा के ... Read More »

आत्म विकास परम सुखदायी

यह जरूरी नहीं है कि हमें अपने हर कर्म का फल तत्काल मिल ही जाए। कई प्रकार के कर्म ऎसे होते हैं जिनका फल तत्काल या बहुत कम समयावधि में प्राप्त नहीं हो पाता। और बहुत सारे कर्म ऎसे होते हैं जिनका बीजारोपण आज कर दिया जाए तो उसका फल महीनों, और कई-कई बार बरसों में जाकर प्राप्त हो पाता ... Read More »

कल्पवृक्ष भी बौना है इनके आगे

हम सभी लोग मृग मरीचिका में भटकने के आदी हो गए हैं। हमारी संस्कृति, संस्कार और परंपराओं ने हमें वो सब कुछ दिया है जो हमारे जीवन के लिए अपेक्षित है। लेकिन हमारी मनःस्थिति ऎसी हो गई है कि हम उन सभी के प्रति उपेक्षा और हीनता का बर्ताव करते हैं जो हमारे पास या आस-पास विद्यमान हैं। दूसरी तरफ ... Read More »

आत्म जागरण करें

अपने आपसे अनजान बने रहते हुए सुख और आनन्द की तलाश बाहर-बाहर ही करते रहना हम सभी की वह बुरी आदत बन चुकी है कि जिसने हमारे अपने वर्तमान को बिगाड़ कर रख दिया है और जिसका वर्तमान ठीक नहीं होता उसका भविष्य कभी अच्छा हो ही नहीं सकता। और यह सब किसी और ने नहीं किया है बल्कि हमने ... Read More »