Chintan

तैयार रहें भूत-प्रेत बनने के लिए

संसार में आने के बाद जो कुछ पाया है उसे यहीं छोड़ कर जाना है। मोह-माया, साधन-संसाधन, घर-बार, धन-दौलत और सब कुछ नहीं छोड़ेंगे, तब भी छूट जाने वाले हैं। आज तक कोई भी साथ लेकर नहीं जा सका है इसलिए इस बात को दिमाग से निकाल ही दें कि हम जाएंगे तो साथ ले जाएंगे। साथ कुछ नहीं जाने ... Read More »

देवी नहीं स्वीकारती इनकी पूजा

हम सभी लोग इन दिनों नवरात्रि काल की शक्तिपूजा में व्यस्त हैं और इसी प्रयास में हैं कि देवी मैया हम पर प्रसन्न हों, हमारी बाधाएं दूर हों तथा मनचाहे काम अपने आप होते चले जाएं, सभी प्रकार से सुख-समृद्धि और आरोग्य प्राप्त हो और मैया की कृपा मिलती रहे। शक्तिपूजा, नवरात्रि और देवी उपासना की बात सभी लोग करते ... Read More »

जरूरी है हर फिक्र का जिक्र

मानवीय संवेदनाओं से भरा वह दौर चला गया जब लोग औरों के दुःख और समस्याओं को देख कर इनके निराकरण के लिए अपनी ओर से पहल करते हुए मदद करते और दुःखों, संत्रासों और तनावों से मुक्त करने-कराने में समर्पित भागीदारी अदा करते हुए मानवी जीवन का आनंद प्रदान किया करते थे। अब लोगों को अपनी ही पड़ी है, अपने ... Read More »

बचाए रखें, अपनी शक्ति

शक्ति संचय का उद्देश्य जगत का कल्याण करना है। और इस जगत में अपने बंधु-बांधवों के साथ सभी जीव शामिल हैं जिनके लिए इन्सान जीता है। इंसान का फर्ज यही है कि वह जिनके बीच रहता है उनके बहुविध कल्याण में सहभागी हो, उनके दुःख-ददोर्ं के निराकरण में हिस्सेदार बने और उनके जीवन निर्वाह में आ रही बाधाओं को दूर ... Read More »

जागृत करें शक्ति

शक्ति की तलाश बाहर नहीं भीतर करें। बाहर सब कुछ दिखावा ही दिखावा है शक्ति का कोइ्र कतरा नहीं। शक्ति हम सभी के भीतर है, सुप्त है जाने कितने जन्म-जन्मान्तरों से। शक्ति की तलाश बाहर करोगे तो कभी प्राप्त न कर पाओगे, जिन्दगी यों ही निकल जाएगी और सुप्त शक्ति के साथ ही होना पड़ेगा भस्मीभूत। तब शक्ति अपना अस्तित्व ... Read More »

साधना में अवरोध सिद्धि समीप्य का संकेत

ईश्वर से साक्षात्कार, सिद्धावस्था पाने या कि सिद्धि पाने के लिए किए जा  रहे प्रयत्नों में लगे हुए लोगों का यह अनुभव रहता है कि जैसे-जैसे वे साधना में उत्तरोत्तर उच्चावस्था की ओर बढ़ने लगते हैं वैसे-वैसे साधना के मार्ग में ढेर सारी बाधाएं आनी शुरू हो जाती हैं और बाधाएं भी ऎसी कि ये पूर्णतया आकस्मिक, अप्रत्याशित और अकल्पनीय ... Read More »

नवरात्रि पर विशेष – या देवी सर्वभूतेषु …

शक्ति उपासना और दैवीय ऊर्जा संचय का पर्व नवरात्रि अपने आप में वह सिद्ध काल है जब देवी मैया को प्रसन्न कर वह सब कुछ पाया जा सकता है जो कि मनोवांछित है। कोई से देव या देवी हों, उनकी उपासना का यही अर्थ और मर्म है कि हम अपने जीवन को उपास्य देव के अनुरूप ढालें और उन्होंने जो-जो ... Read More »

चिल्लाने वाली चिल्लर

आदमी की जात को न जाने क्या होता जा रहा है। सब तरफ आदमी जात पगलायी हुई दिखने और रहने लगी है। सब तरफ लगता है कि जैसे आंशिक, आधे या पूरे पागलों के डेरे हैं या फिर डेढ़ होशियार लोगों के। आदमी जन्म से ही खुराफाती और अशांतमना होता है। वह कभी चुप नहीं बैठ सकता, और न कभी ... Read More »

किस काम के ये गमगीन मुर्दाल

हर इंसान के लिए अपने-अपने निर्धारित कर्म, फर्ज और धर्म हैं जिनकी सीमाओं में रहकर हम इनका बेहतरी के साथ निर्वाह करते हुए जीवन को सफल बना सकते हैं। पर आजकल ऎसा हो नहीं रहा। होना यह चाहिए कि जो विषय हमसे संबंधित नहीं हैं, जिनसे हमारा कोई लेना-देना नहीं है, दूर-दूर का कोई रिश्ता नहीं है, उन विषयों के ... Read More »

करती है मौज, बेशर्मों की फौज

जिसे एक बार कोई बात कह दो, कोई प्रक्रिया बता दो, वह है इन्सान। जिसे हर बार किसी विषय या प्रक्रिया या निर्देश के बारे में बताने की जरूरत पड़े वह है पशु। और जिसे बार-बार कहा जाए, बताया जाए, फिर भी कुछ नहीं कर पाए, ढीठ सा पड़ा रहे और जानबूझकर समझने, सीखने या करने की कोशिश न करें ... Read More »