ईश्वरीय संकेतों पर अमल करें

मनुष्य ईश्वर का ही अंश है और इसलिए परस्पर सीधा संबंध रहता आया है। ईश्वरीय रश्मियाँ और संकेत प्रत्येक मनुष्य तक पहुंचती जरूर हैं लेकिन…

यह भी हिंसा ही है ..

हिंसा का यही मतलब नहीं है कि किसी की हत्या कर देना या हिंसक प्रवृत्तियों में लगे रहना। हिंसा का संबंध हिंसक मानसिकता और क्रूर…

पालतू हैं या फालतू ?

मनुष्य के रूप में परिपूर्णता पाने वाले लोगों के लक्षण पालने से ही दिखने शुरू हो जाते हैं और इसी प्रकार उन लोगों के भी…

संस्कार ही हैं सब कुछ

जीवन के निर्माण में संस्कारों और आदर्शों का जितना महत्त्व है उतना किसी और का नहीं। अपनी  आनुवंशिक परंपरा और पूर्वजों से प्राप्त संस्कारों के…

मुक्तात्मा परमानन्दी

आदमी की पूरी जिन्दगी को तीन तरह से रेखांकित किया जा सकता है। एक वे लोग हैं जो निकम्मे और उदासीन हैं। ये लोग जैसे…

सहज रहें, सरल बनें

जीवन का सतत प्रवाह यदि मर्यादाओं, संयम तथा अनुशासन की सीमाओं में रहकर चलता रहे तो आदमी की जिन्दगी निर्बाध रूप से संतोष और आनंद…

हर तरफ हैं रावण ही रावण

न रावण मरा है, न राक्षस कुल का खात्मा हो पाया है।  और न ही कोई लंका जल पायी है। त्रेता में मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम ने…

तटस्थ हैं या कायर ?

आजकल लोगों में दो बातें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। या तो हममें से खूब सारे लोग कायर हैं अथवा तटस्थ। तटस्थता और…