Chintan

कुत्ते की पूँछ (बुरा न मानो होली है )

देश के बुद्धिजीवियों, बुद्धिबेचकों, चिन्तकों, साहित्यकारों, इतिहासकारों आदि सभी से करबद्ध प्रार्थना है कि उत्तरप्रदेश के चुनावों से निकले निष्कर्षों को तहे दिल से समझने के लिए गंभीर चिन्तन करें और यह स्वीकार कर लें कि देश अब प्रगतिकारी करवट ले चुका है।  बचपन में किसी प्रसिद्ध कहानीकार की यह कहानी आज भी याद है जिसमें चौदह साल तक कुत्ते ... Read More »

अपने भीतर तलाशें रंग-रस

होली लोक जीवन के कई-कई रंगों और रसों का प्रतिनिधि वार्षिक पर्व होने के साथ ही धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष और आरोग्य से लेकर जीवन-रंगों के ढेरों रहस्यों से भरा हुआ पर्व है। इसे जानने, समझने और अभ्यास-अनुसंधान करते हुए जिन्दगी को सुनहरे रंगों और रसों से भरने की कला और रहस्यान्वेषण के विज्ञान को आत्मसात किया जाना जरूरी हो चला है। ... Read More »

होली के पैसे दो

बिना मेहनत-मजूरी किए रुपए-पैसे पाना और उगाहना सीधे तौर पर हरामखोरी है चाहे वह धन किसी त्योहार के नाम पर उगाहा जाए, प्रे्रम या दबाव से पाया जाए, किसी भी काम के लिए लिया जाए अथवा किसी व्यक्ति के नाम से लिया जाए। जिस धन में परिश्रम या पुरुषार्थ की गंध न हो वह जहां कहीं उपयोग में आएगा वहाँ ... Read More »

होली संस्कृति और परम्पराओं को सहेजें

जो पुराना है वह मौलिक और लोक के लिए होने के कारण ही आज भी माधुर्य से भरा और यादगार बना हुआ है भले ही उसका खास प्रचार नहीं हो पाया लेकिन अपने आप में वह सब कुछ अन्यतम और अद्वितीय है। होली के त्योहार से संबंधित धार्मिक, आध्यात्मिक, ज्योतिषीय, चिकित्सकीय और लोक व्यवहार के विभिन्न क्षेत्रों के अनुकूल कई ... Read More »

बेकार है इतना बड़ा होना

बड़े होने और दिखाने के लिए लोग बड़े-बड़े जतन करते हैं और जिन्दगी का बहुत बड़ा इसी में खर्च कर दिया करते हैं। बड़े-बड़े कहे जाने वाले लोगों की जिन्दगी का गहराई से अध्ययन किया जाए तो यही सामने आता है कि इन बड़े लोगों की जिन्दगी से वह आत्म आनन्द कोसों दूर चला जाता है जिसके लिए ये अपने ... Read More »

महिलाएँ चाहती हैं आत्मनिर्भरता

कई बरसों से हम मनाते आ रहे हैं अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस। बावजूद इसके महिला विकास और उत्थान के क्षेत्र में हम अपेक्षित लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाए हैं। चौतरफा अनथक प्रयासों के बीच आज भी महिलाएँ अपने वजूद को दर्शाने, प्रतिभाओं का समुचित उपयोग करने और आत्मनिर्भरता पाने के लिए कड़े संघर्षों के दौर से गुजर रही हैं। इनके ... Read More »

गौमूत्र देता है दिव्यता और आरोग्य

बहुत से लोगों को अक्सर यह शंका उठती रहती है कि वे तन-मन और मस्तिष्क को आरोग्यवान बनाए रखने और अपनी तथा घर-परिवार की खुशहाली के लिए औषधियों, परहेज से लेकर पूजा-पाठ, भक्ति और साधना आदि सब कुछ करते हैं, फिर भी न तो मनमाफिक काम हो पाते हैं, न भगवान प्रसन्न हो रहा है और न ही शरीर अपेक्षा ... Read More »

दुबके न रहें दड़बों में

धरती पर पैदा हुए हर इंसान का फर्ज है कि वह चंद फीट और चंद लोगों तक सीमित नहीं रहे बल्कि पूरी दुनिया में जो हो रहा है उसके प्रति जानकारी रखे और हलचलों को देखते हुए उनके अनुरूप अपने विवेक और बुद्धि का पूरा-पूरा उपयोग करते हुए निर्णय ले तथा खुद के साथ ही जगत के कल्याण के लिए ... Read More »

गरिमामय सेवानिवृत्ति : गरिमामय सेवाओं का पूर्णाहुति उत्सव

जब तक हमारा कर्म सेवा के रूप में अपनी पहचान बनाता रहता है तभी तक सेवाओं के साथ गरिमामय, गौरवशाली और उत्कृष्ट शब्दाें के विशेषज्ञ स्वाभाविक रूप से जुड़े हुए रहते हैं। सेवा अपने आप में ऎसा सकारात्मक ऊर्जा भरा और शुचितापूर्ण शब्द है जिसका स्मरण करते ही मन में निष्काम मदद, परोपकार और लोकमंगल की भावनाओं का संचरण होने ... Read More »

गरीबों और जरूरमन्दों से करें अपनी तुलना

बहुत से लोग हैं जो अपने आपे में नहीं हैं। एक बार किसी बाड़े में क्या घुस गए, अपने आपको जमींदार, ठेकेदार और मालिक समझ बैठे हैं जैसे कि इनके बाप-दादा इन्हीं के लिए ये सल्तनत छोड़ गए हों। आदमी का अपना खुद का वजूद ज्यों-ज्यों खत्म होता जा रहा है त्यों-त्यों वह किसी न किसी बाहरी पॉवर या प्रतीक ... Read More »