Chintan

खुद ही तय करें अमृत उगलें या जहर

मनुष्य का शरीर अपने आप में दैवत्व से परिपूर्ण देवालय भी है और आसुरी शक्तियों का स्थान भी। मनुष्य को इस बात की पूरी स्वतंत्रता है कि वे किसे अंगीकार करे, दैवत्व या राक्षसत्व। हर इंसान के लिए दोनों तरफ के रास्तों को स्वीकार करने और उन पर चलने के लिए अपार संभावनाएं हैं जिनका अवलम्बन वह कर सकता है। ... Read More »

गंभीर चर्चा – कुछ नया करें, तब करें नामकरण

किसी भी पुराने स्थान, स्मारक, मार्ग, चौराहा, गांव, शहर, जलाशय, कूप-बावड़ी या किसी भी तरह की परंपरागत भौतिक संपदा का किसी और के नाम से नामकरण करना हमारे पूर्वजों, पुरातन भामाशाहों, निर्माताओं और सृजनकर्ताओं को भुलाने के सायास षड़यंत्र के साथ ही उनका घोर अपमान है। और सरासर नाम-अतिक्रमण है। आजकल यह परिपाटी बन गई है कि लोग वादों और ... Read More »

पुण्य क्षय का संकेत है वंशजों में दरार

कुल-कुटुम्ब सौहार्द और संगठन का परिणाम है और इसमें उत्तरोत्तर विस्तार एवं सुदृढ़ता के साथ समृद्धि पाना इस बात का द्योतक है कि पूर्वजों के साथ वर्तमान पीढ़ी का भी पुण्य प्रभाव बढ़ रहा है और पुरानी पीढ़ी के अनुपात में पुण्य का दौर निरन्तर बना हुआ है। हालांकि ऎसा बिरले परिवारों में ही हो पाता है और वे भी ... Read More »

परखें मानवीय संवेदनाएँ

नोटबंदी से पसरा हुआ मौजूदा माहौल समाज और देश की अस्मिता से जुड़ा वह मुद्दा है जो भारतीय संस्कृति, सभ्यता और देश की एकता-अखण्डता से जुड़ा हुआ प्रत्यक्ष असरकारक है। इस बात को वे लोग कभी समझ नहीं पाएंगे जिनके लिए पैसा ही परमेश्वर है और पैसे कमाना, जमा करना तथा पराये पैसों पर मौज उड़ाना ही जिनकी जिन्दगी है। ... Read More »

जुड़े रहें जड़ों से

आधार के बिना सब कुछ निराधार है। यह आधार अपने आप में वह शाश्वत मंच है जिससे जुड़े रहकर हम केन्द्र का सामीप्य और सान्निध्य पाते हुए खुद को हमेशा ऊर्जित और ताजगी भरा महसूस करते हैं और उसी की ताकत से जीवन क्रम को आनंद भाव के साथ आगे से आगे बढ़ाते हुए मस्ती पाते हैं, मौज उड़ाते हैं। ... Read More »

भौंकने लगे हैं बहुरूपिये और नौटंकीबाज

  प्रकृति के बीच जीते हुए एक जमाने में इंसान को देखकर इंसान खुश होता था, उत्साह के अतिरेक में भर आतिथ्य-सत्कार में रमता हुआ अपने आपको लुटा दिया करता था और अतिथियों या आगंतुकों को खुश देखकर खुद प्रफुल्लित हुआ करता था। और अब, एक आदमी दूसरे से तभी बात करता है जब सामने वाला कुछ लाभ देने या ... Read More »

वरना लुट जाएगा सब कुछ

करेंसी बदलने से आहत और व्यथित हम सभी लोगों ने इन दिनों जबर्दस्त हायतौबा मचा रखी है। बहुत कम लोग ही होंगे जो धैर्यवान बने हुए मितव्ययता से दिन काट रहे हैं अन्यथा हर तरफ ऎसा माहौल हो गया है जैसे कि दुनिया खतरे में पड़ गई हो और ऎसा कुछ अनहोना हो गया है जो भूतकाल में कभी नहीं ... Read More »

बाल दिवस पर विशेष – हर दिन हो बच्चों के नाम

दुनिया की तमाम प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों की ऎतिहासिक, यादगार और आशातीत सफलता के पीछे जितनी बच्चों की भागीदारी है उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। ये बच्चे न होते तो हमारे कोई से आयोजन सफल नहीं हो पाते। साल भर में जाने कितने दिवस, पखवाड़े, सप्ताह और माह आते हैं, कितने सारे राष्ट्रीय पर्व, उत्सव, त्योहार और ... Read More »

दर्शक दीर्घा बनाकर बिठाओ इन सभी रोने वालों को

आतंकवादियों के मामले में हाथों हाथ निर्णायक समाधान करने के साथ ही यह भी जरूरी है कि जो लोग इनकी हिमायत करते हैं, इनके लिए रोते और आँसू बहाते हैं उनको पहले ठिकाने लगाया जाए क्योंकि यही लोग आतंकियों की जड़ और पनाहघर हैं। क्यों न, ऎसे आश्रयदाताओं को हर राज्य में चिह्नित कर दिया जाए और जब भी पुलिस ... Read More »

चमत्कार – महालक्ष्मी प्रसन्न हैं बांसवाड़ा पर

अब हर घर में भरे रहेंगे धन-धान्य के भण्डार यह कोई भविष्यवाणी नहीं है बल्कि महालक्ष्मीजी की इस बार दीपावली पर जिस तरह से चरम भक्ति और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना एवं दिन-रात मंत्र जप हो रहे हैं, उससे ऎसा लगता है कि इस बार महालक्ष्मीजी बांसवाड़ा पर खूब प्रसन्न हो रही हैं। शहर के महालक्ष्मी चौक स्थित महालक्ष्मी मन्दिर में इस ... Read More »