हमसे बड़ा आवारा कौन ?

वो समय चला गया जब आदमी अपनी निर्धारित जगह पर बैठ कर अपने रोजमर्रा के दायित्वों को अच्छी तरह पूरा कर लिया करता था और…

झूठे होते हैं कसम खाने के आदी

इंसान को वाणी की शुद्धि और सच्चाई पर सर्वाधिक गंभीर रहना चाहिए। जो इंसान सत्यभाषी, कर्मठ और न्यायप्रिय होता है वही विश्वास करने योग्य है।…

सुख-सुविधाएँ सब चाहिएं, कर्म और समर्पण के नाम पर जीरो

हाल के वर्षों में इंसान के भीतर से कर्तव्यपरायणता, परिश्रम और नैष्ठिक कर्मयोग का जितना अधिक क्षरण हुआ है उतना पिछली सदियों में भी नहीं…

जियो और जीने दो

समाज और देश की सारी समस्याओं का मूल कारण इंसान का इंसानियत छोड़ कर खुदगर्ज हो जाना ही है। वही समाज और राष्ट्र प्रगतिशील हो…

इस तरह करें दीवाली की साफ-सफाई

दशहरा चला गया। अब दीवाली आने वाली है। दीवाली यानि की वार्षिक साफ-सफाई का महापर्व। लक्ष्मीजी के आगमन से पहले स्वच्छता और शुचिता भरा परिवेश…

सच्चा भक्त वही है जो अधर्म और असुरों का खात्मा करे

भक्ति का तात्पर्य घण्टियां हिलाना, घण्टे-घड़ियाल बजाना, भजन-कीर्तनों में रमे रहना या धर्म के नाम पर उत्सवी आयोजनों से मनोरंजन करना नहीं है। सच्चा धर्म…