Chintan

श्री अपनाएं

लोग धन-सम्पदा और संसार भर का पूरा का पूरा ऎश्वर्य पाने को तो उतावले रहते हैं लेकिन इसे पाने के लिए जिन रास्तों से होकर चलना चाहिए, उन्हें भुला दिया करते हैं। प्राचीनकाल से श्री प्राप्ति के द्वार खोलने वाला पासवर्ड रहा है श्री।  लेकिन अपनी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के प्रति आत्महीनता रखने वाले मूर्खों, पाश्चात्यों के तलवे चाटने ... Read More »

खर-दूषणी खरपतवार

संसार ढेरों विचित्रताओं से भरा है। अपने आप में यह संसार वह बहुत बड़ा कड़ाह है जिसमें दुःख, विषाद, तनाव, रोग, समस्याएं, अभाव और विपदाएं हैं और कोई प्राणी ऎसा नहीं है जो कि इन कारकों से प्रभावित न हो। अभावों और समस्याओं से भी ज्यादा लोग बेवजह पैदा हो जाने वाली शत्रुओं की फसलों से दुःखी है। यह फसलें ... Read More »

शान्ति से सुनें आत्मा की आवाज

हर जीवात्मा के जीवन में आने वाले परिवर्तन के बारे में परमात्मा कोई न कोई संकेत देता ही है। माना जाता है कि ईश्वर की ओर से हरेक घटना-दुर्घटना, चाहे-अनचाहे काम और आकस्मिक परिवर्तन को लेकर तीन बार किसी न किसी रूप में पूर्वाभास कराता ही है। इसे ही आत्मा की आवाज कहते हैं। जो लोग स्थिर चित्त, शांत, धीर-गंभीर ... Read More »

आगे बढ़ें अपनी काबिलियत से, औरों की निन्दा के सहारे नहीं

आगे बढ़ना हम सभी चाहते हैं। अनपढ़ हो या पढ़ा-लिखा, हुनरमन्द हो या ढपोड़शंख, सभी के भीतर महत्वाकांक्षा से लेकर उच्चाकांक्षाओं का ज्वार हर क्षण लहराता रहता है।  कुछेक ही होंगे तो स्थितप्रज्ञ और आत्म आनंद से भरे-पूरे होने की वजह से मस्त, शान्त और अपने ही हाल में जीने वाले हों,  अन्यथा संसार में हर तरफ प्रतिस्पर्धा, कुछ न ... Read More »

कब तक पालते रहें भीखमंगों और कामचोरों को

आखिर कब तक पालते रहें उनको जो किसी काम-काज के नहीं हैं।  जो कार्यस्थलों के लिए नाकारा हैं उनके लिए घर वाले भी यही कहते हैं कि घर के लिए भी इनका कोई उपयोग नहीं। जो लाभ जहाँ से मिल सकता है, मिल रहा है उसमें कहीं कोई कमी नहीं आए, ऊपर से जो कुछ अतिरिक्त मिल जाए, उसके लिए ... Read More »

गाँधी-शास्त्री को समझें, जीवन में उतारें

महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री दोनों भारतवर्ष के वे रत्न थे जिनके जीवन को सीखने, समझने और आत्मसात करने की आवश्यकता है। भारत को स्वाधीनता दिलाने से लेकर विकास की बुनियाद रचने में दोनों ही महापुरुषों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। किसी एक को अधिक और दूसरे को कम नहीं आंका जा सकता।  न ही दोनों में भेददृष्टि रखी ... Read More »

नंगे-भूखे आतुरों का आसुरी नाच-गान

हमने नवरात्रि कर ली, रावण दहन कर दशहरा मना लिया। फिर भी कुछ दिख नहीं रहा है इसका कोई प्रभाव। सब तरह भरमार है कुटिल चेहरों की, जिनका दिल कुछ और धड़कता है, दिमाग कभी किसी घातक खुराफाती षड़यंत्र का शिलान्यास करता है और कभी अपने किये षड़यंत्रों के महलों के उद्घाटन कर खुद को नियन्ता व भाग्यविधाता के रूप ... Read More »

बंद करो रावण दहन

यह तो पता नहीं कि रावण दहन कब से आरंभ हुआ और किसने शुरू किया। लेकिन इतना तो सभी जानते हैं कि इसका उद्देश्य प्रतीकात्मक रूप से असत्य पर सत्य की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय और असुरों पर देवों की जीत के प्रतीक स्वरूप में यादगार माना जाकर किया जाता है। दशहरे पर यह परंपरा इतने गहरे तक ... Read More »

दैवीय गुण आएं तभी शक्ति उपासना सफल

शक्ति तत्व का अर्थ अत्यन्त व्यापक और गहन अर्थों को समेटे हुए हैं। शक्ति उपासना से भी तात्पर्य केवल नवरात्रि का भजन-पूजन, कीर्तन-गरबा, देवी महिमा के भजनों, मंत्रों और स्तुतियों से भरी कैसेट्स, फिल्मी और दूसरे गाने, माईक और डीजे चलाने से ही नहीं है बल्कि शक्ति की उपासना तभी सार्थक है जबकि हमारे भीतर शक्ति तत्व का जागरण, संचरण ... Read More »

नवरात्रि पर विशेष – भक्तिभाव से करें मैया की आराधना

साल भर में कुछेक अवसर ही ऎसे आते हैं कि जब उस समय विशेष में जो कुछ किया जाता है उसका अनन्त गुना फल प्राप्त होता है और इस काल में प्राप्त ऊर्जा जीवन भर के लिए उपयोगी बनी रहती है। इसका कभी क्षरण नहीं होता। नवरात्रि ऎसा ही एक पर्व है जिसमें की जाने वाली शक्ति उपासना अपने आप ... Read More »