काम न आएगी ये धन-दौलत

धन-दौलत स्थायी रूप से न किसी की रही है, न रहने वाली है। इसे जो पूरी तरह अपनी ही मानकर चलता है वह कभी उसके…

बिकने लगे हैं लोग

हम सभी लोग ईश्वर की अनकृति और अंश है और इस दृष्टि से हम सभी अमूल्य हैं लेकिन इस विलक्षण खासियत को हम सभी भूल…

भटक गए हैं हम सब

वर्तमान पीढ़ी के शारीरिक सौष्ठव को देख कर कहीं नहीं लगता कि हम स्वस्थ और मस्त हैं। अति दुर्बल या अति स्थूल होती जा रही…

हमसे बड़ा आवारा कौन ?

पिछले कुछ दशकों से आवारा पशु हर जगह कुछ-कुछ दिन में चर्चाओं में आते रहे हैं। आवारा से सीधा अर्थ निकलता है अनियंत्रित, मर्यादाहीन, उन्मुक्त…

न अटकें, न भटकें

प्रतिक्रिया एक ऎसा शब्द है जो जीवन भर हर कर्म और विचार में समाया रहता है। कर्मयोग की विभिन्न धाराओं और उपधाराओं में प्रतिक्रिया न…

उल्लू बनाओ – मौज उड़ाओ

मानवीय सभ्यता में जब तक पूर्ण अनुशासन के भाव विद्यमान थे तब तक हर व्यक्ति अपने-अपने काम में लगा रहता था। किसी के पास भी…