Chintan

दूर भगाएं टाईमपास फालतुओं को

हमारे जीवन भर का पचास से सत्तर फीसदी समय फालतू की चर्चाओं और बेकार के कामों में नष्ट होता है। इस समय का यदि हम सदुपयोग करना सीख जाएं तो दुनिया में नाम कमाने लायक बन सकते हैं लेकिन इसके लिए जीवन में बहुत तरह के संयम की जरूरत होती है जो सामान्य लोग रख नहीं पाते। और इसीलिए भीड़ ... Read More »

अपनों को दें भरपूर प्यार

प्यार शब्द हमेशा से चर्चाओं में रहा है। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के लिए यह शब्द गुदगुदाहट और रोमांच जगाने के लिए काफी है।  बात केवल स्त्री और पुरुष के बीच प्यार भरे रिश्तों की नहीं है, बल्कि यह जगत के तमाम जीवों और सृष्टि के प्रत्येक तत्व से प्रेम की है। केवल जीवन्त से ही नहीं बल्कि जड़ ... Read More »

हम असुर हैं या असामाजिक

अपने आपको हम कितना ही समझदार, सामाजिक, प्रतिष्ठित और महान मानते-मनवाते रहें, दुनिया के दूसरे सारे प्राणियों में हम खुद को सर्वश्रेष्ठ और बुद्धिशाली मानते रहें। मानना या मनवाना हमारा पूर्वाग्रह-दूराग्रहजन्य अधिकार है और इस मामले में हम सारे लोग सिद्ध हैं। लेकिन हम इंसानों की दिनचर्या, स्वभाव, व्यवहार और जीवन जीने का जो तरीका है उसे देख कहीं से यह ... Read More »

जिन्दगी भर हाय-हाय

इंसान अपने लाभ और स्वार्थ की पूर्ति के लिए कुछ भी कर सकने को न केवल स्वतंत्र बल्कि पूर्ण स्वच्छन्द है। इंसान की तासीर ही यही है कि वह कभी भी कुछ भी कर सकता है। वह अच्छा भी कर सकता है और बुरा भी।  अपने आपको इंसान बनाए रख सकता है, दैवत्व और दिव्यत्व की प्राप्ति के लिए प्रयत्न ... Read More »

जरूरी हैं अवसर, प्यार और प्रोत्साहन

प्रतिभाएं हर इंसान में जन्मजात हुआ करती हैं। इसका पढ़ाई-लिखाई से कोई संबंध नहीं है। कई अनपढ़ लोगों में चमत्कृत कर देने वाली बौद्धिक क्षमताएं होती हैं और खूब सारे पढ़े-लिखे लोग समाज और देश के लिए शोषक, लूटेरे और नाकारा सिद्ध होते हैं। ब्रह्माण्ड के असंख्य विषय हैं, ज्ञान, हुनर और प्रतिभाओं के अनुरूप मौलिक प्रतिभाएं भी असंख्य हैं, ... Read More »

चापलुसी जिन्दाबाद, चमचागिरी अमर रहे

कोई ज्ञान, हुनर और प्रतिभा न हो तो कोई बात नहीं। आजकल लोग चापलुसी और चमचागिरी के सहारे इतने अधिक आगे बढ़ गए हैं, प्रतिष्ठा पा चुके हैं कि पढ़े-लिखों, हुनरमन्दों और बुद्धिजीवियों की बजाय इनकी अधिक पूछ हो रही है। आजकल प्रतिभा, हुनर और कर्म में दक्षता की बजाय अनुचरों, अंधानुचरों और भेड़ों की तरह सिर झुकाकर पीछे-पीछे चलते ... Read More »

खुद में जगाएँ आकर्षण

आकर्षण जगाने का एकमात्र उद्देश्य औरों को अपनी ओर खींचने की क्षमता का विकास करना है ताकि लोग हमारी ओर आकर्षित हों तथा हमेशा हमारा आकर्षण बरकरार रहे। इसके लिए दुनिया की अधिकांश आबादी रोजाना तरह-तरह के जतन करती है, दुनिया भर के रसायनों, पदार्थों, द्रव्यों और मिश्रण का प्रयोग करती है। इसके बावजूद अपना आकर्षण स्थायी नहीं रह पाता। ... Read More »

वैराग्य को बनाएं व्यक्तित्व निखार का माध्यम

दुनिया में अधिकतर लोग इस बात से परेशान हैं कि लोग उनकी कद्र नहीं करते, सुनते नहीं, बिना ठोस कारण के हैरान-परेशान करते रहते हैं, तंग कर तनाव देते हैं और रह-रहकर कोई न कोई दुःख देते रहते हैं। और हैरानी की बात यह कि ऎसा सब कुछ अनचाहा उन लोगों के साथ ही होता है जो बेचारे सज्जन, ईमानदार ... Read More »

आवारा ही हैं हम

हम सभी लोग पशुओं को आवारा मानते हैं, लावारिस मानते हैं और इसके लिए किसी न किसी को हमेशा कोसते रहते हैं कि आखिर क्यों इन आवारा और लावारिस जानवरों को लोग क्यों सड़कों, चौराहों और सर्कलों पर छोड़ दिया करते हैं। हममें से खूब सारे लोग अपनी जिन्दगी में कई-कई बार इन आवारा पशुओं की समस्या पर लिख चुके ... Read More »

व्यक्तित्व बनाएँ बहुआयामी

इंसान के रूप में हम वो हर प्रकार के काम करने में सक्षम है जो नियति ने हमारे लिए तय कर रखे हैं। आज का युग ऎसा नहीं है कि हम केवल चन्द कामों और हुनर में ही रमे रहें और अपने आपको सीमित दायरे में नज़रबन्द रखे रहें। आज का युग बहुमुखी व्यक्तित्व की पहचान बनाते हुए छाप छोड़ने ... Read More »