Chintan

ट्रस्टी बने रहें वरना भूत बन जाएंगे

पूरी की पूरी संसार यात्रा आधिपत्य जमाने के लिए नहीं बल्कि पूर्व जन्मार्जित लेन-देन भरे ऋणों के चुकारे के साथ ही ट्रस्टी के रूप में जीवननिर्वाह के लिए है। जो है, जो हो रहा है और जो होना है वह सब कुछ भगवान का है और उसी के द्वारा चलायमान है। सम्पूर्ण जगत का स्वामी परमपिता परमेश्वर है लेकिन जब ... Read More »

मसखरों की जमात

मुर्दों और जिन्दाओं में और कोई समानता हो न हो, एक समानता तो यह है ही कि दोनों को संगी-साथियों की मौजूदगी और तलाश हमेशा बनी रहती है। मुर्दों को अपने धाम तक पहुंचने के लिए चार-छह जने चाहिएं तो जिन्दाओं को अपने साथ चालीस-पचास लोगों की भीड़ हमेशा चाहिए होती है।  जब से संख्याबल का जमाना आ गयाहै तब ... Read More »

इन्हें करो संग्रहालय के हवाले

कब तक सजाये रखकर शोकेस में इन लोगों को महान मानते मनवाते रहोगे। अर्सा हो गया है अब तो बाहर का रास्ता दिखाओ इन्हें। इंसानों के लिए ही जमीन कम पड़ रही है और हम हैं कि इन र्मूतियों और पुतलों को मंच, लंच और सब कुछ हाजिर करते हुए अपने को धन्य और गौरवशाली मानकर फूले नही समा रहे। ... Read More »

भाग्योदय का संकेत है दुःख प्राप्ति

प्राणी मात्र के जीवन में सुख और दुःख के आवागमन का शाश्वत और अवश्यम्भावी क्रम निरन्तर बना रहता है। न्यूनाधिक रूप में प्राप्त होते रहने वाले सुख और दुःख देह के लिए बने होते हैं, आत्मा के स्तर पर इनका कोई प्रभाव नहीं रहता। आत्मा इन सभी से असंपृक्त है।  देह के स्तर पर किए जाने वाले अच्छे कर्म पुण्य ... Read More »

कितनी पाक-साफ है हमारी निजी जिन्दगी

हम सारे लोग आजकल दोहरी-तिहरी और बहुरी जिन्दगी जीने के आदी होते जा रहे हैं। बहुत कम लोग होंगे जो कि अपनी जिन्दगी को पाक-साफ और शुचितापूर्ण तरीके से जीते होंगे अन्यथा बहुसंख्य लोग दोहरे-तिहरे चरित्र वाली, छल-कपट और धूर्तता-मक्कारी से परिपूर्ण जिन्दगी जीने को ही जीवन समझ बैठे हैं। इन लोगों को यही लगता है कि वे जिस तरह ... Read More »

किसे घास डालें ?

अपेक्षाओं का महासागर हर तरफ पूरे यौवन पर है। हर कोई महत्वाकांक्षी बना हुआ डोल रहा है या फिर उच्चाकांक्षी।  ज्ञान, अनुभव और हुनर वाले भी इच्छाओं की पूर्ति के लिए भटक रहे हैं और मूर्ख, अज्ञानी, नासमझ और नाकारा भी। सबको वही सब चाहिए जो औरों को मिल रहा है। मेहनत करके पाने वालों की अपेक्षा अधिकांश वे हैं ... Read More »

खात्मा करें भिखारियों का

जो दीन-हीन और हर तरह से विपन्न है उसे भीख मांग कर गुजारा करने का पूरा और पक्का अधिकार है। उसके लिए भीख ही है जो जीवन की सारी आवश्यकताओं को पूरा करती है और भीख न मिले तो इन लोगों का जीवन संकट में पड़ जाए। भिखारी वही है जो आज की चिन्ता करता है और केवल आज भर ... Read More »

ऊँचाइयाँ देता है संक्रान्ति काल

परिवर्तन कालचक्र का अपना स्वधर्म है जिसकी सहायता से व्यष्टि और समष्टि में नित-नूतन बदलाव की भूमिकाएं रचती रहती हैं। यह परिवर्तन ठीक उसी तरह है जिस तरह परमाण्वीय विखण्डन से ऊर्जाओं का नवीन-नवीन प्राकट्य व विस्फुरण होता रहता है और द्रष्टा जगत को परिवर्तन का अहसास कराता रहता है। परिवर्तन के क्रमिक दौर केवल वहीं पर पाषाण और चट्टानों ... Read More »

प्रतिस्पर्धामुक्त रहने ध्रुवीकरण से बचें

अजातशत्रु, सर्वस्पर्शी, हृदयसम्राट, लोकप्रिय, लोकनायक, लोकमान्य, पूजनीय आदि शब्द इतने अधिक भारी-भरकम हैं कि हर कोई इसे संभाल कर रख नहीं सकता और जिन लोगों के लिए बोले जाते हैं वे भी इसके काबिल नहीं होते क्योंकि इंसानों की पूरी की पूरी प्रजाति कभी पूर्ण दैवीय या पूर्ण आसुरी नहीं हो सकती। यह अनुपात कभी कम-ज्यादा हो  सकता है किन्तु सम्पूर्णता ... Read More »

कितने काम आते हैं हम औरों के लिए

हमारे जीवन का समग्र मूल्यांकन हमारी धन-सम्पदा, वैभव और पद-प्रतिष्ठा से नहीं होता बल्कि असली मूल्यांकन दूसरे लोग करते हैं। हम कितने ही महान और लोकप्रिय, अकूत धन-सम्पदा, भूमि और भवनों के मालिक हो जाएं या फिर कोई सी पदवियां पा लें, पुरस्कारों, अभिनंदनों और सम्मानों के ढेर लगा दें, किन्तु यह हमारे सच्चे इंसान होने के पैमाने नहीं हैं। ... Read More »