Chintan

हम सब असामाजिक हैं !

हम सारे लोग सामाजिक प्राणी की पहचान रखते हैं और कहे जाते हैं। लेकिन हमारे स्वभाव, लोक व्यवहार, रहन-सहन और जीवन जीने के रंग-ढंग को देख कर ईमानदारी से यदि सोचें और हमारी सामाजिकता के प्रतिशत का आत्म मूल्यांकन  करें तो हमें अपने आप पर शर्म ही आएगी क्योंकि हम जिस सामाजिकता और सामुदायिकता की बात करते हैं वह हमारे ... Read More »

आत्मघाती है यह मेहमानवाजी

आजकल सब तरफ चाय-नाश्ते का प्रचलन जीवन की अनिवार्यता की श्रेणी में आ चुका है। जहां जाएं वहाँ आतिथ्य सत्कार के नाम पर ड्राईंग रूम में सजी-धजी तरह-तरह की टी टेबल्स पर नाश्ता पहले से परोसा हुआ मिलता है नाश्ता करते हुए ही चर्चाओं का दौर जारी रहता है। कई लोग मन से खिलाते-पिलाते और आनंदित होते हैं। खूब सारे ... Read More »

बेवफा होते हैं कसम खाऊ

किसी भी बात की पुष्टि के लिए कसम खाना और खिलवाकर ही विश्वास जताने का सीधा सा अर्थ यही है कि जो कसम खा रहा है वह भी आत्मविश्वासहीन और विश्वासघाती है और कसम दिलवाने वाला भी। इंसान अपने आप में प्रामाणिक जीव है, वह जो कुछ बोलता है उसके लिए किसी और पुष्टि के पुट की आवश्यकता नहीं होती। ... Read More »

बेमानी हैं पर्यावरण संरक्षण की बातें

प्रकृति पूरी दुनिया पर यों ही कुपित नहीं है। अकारण ही नहीं आ रहे भयानक भूकंप, भीषण गर्मी के जानलेवा ताण्डव, असहनीय शीत के प्रकोप, बेमौसम बरसात, भयंकर बाढ़ और तबाही के खौफनाक मंजर। सूखा और अकाल भी बिना वजह के नहीं आते। सब तरफ मचा हुआ है भीषण शोर पर्यावरण की दुर्गति, प्रदूषण और मारक-घातक परिवेशीय हलचलों का। जल, ... Read More »

धरती चाहती है अपना श्रृंगार …

हमारे हाथ से रोपा गया पौधा यदि सुरक्षित पल्लवित हो जाए, तभी समझें हम पुण्यशाली हैं। अन्यथा साहस के साथ यह मान लें कि हम पापी ही हैं। जो लोग गप्पे लगा सकते हैं वे पेड़ कभी नहीं लगा सकते क्योंकि गप्पे हाँकने वाले मायावी दुनिया को लक्ष्य मानते हैं और पेड़ लगाने में रुचि रखने वाले प्रकृतिस्थ, प्रकृति और ... Read More »

संघर्ष ही निखारता है हमारा व्यक्तित्व

इंसान के लिए संघर्ष ताजिन्दगी चलने वाला वह कारक है जो जितना अधिक परिमाण में होता है उतना अधिक मजबूती देता है। संघर्ष किसी भी इंसान के लिए कभी नकारात्मक नहीं होता बल्कि वह मन-मस्तिष्क और शरीर की हर तरह की मानसिक एवं शारीरिक प्रतिरोधी शक्ति के घनत्व को बढ़ाता हुआ जड़ों को मजबूती देता है। जिसके जीवन में जितने ... Read More »

छातीकूटिए अमर रहें

आज अगर छाती कूटने वालों की गणना शुरू हो जाए तो सभी जगह बहुत से लोग मिल जाएंगे जो बिना किसी कारण के छाती पीटते रहने के सिवा कुछ नहीं करते। इनके छाती पीटने के पीछे के कारणों को तलाशा जाए तो इनकी जिन्दगी से जुड़ा एक भी कारण  ऎसा नहीं मिलेगा जिसकी वजह से इन्हें छाती कूटनी पड़े। दूसरों ... Read More »

अतिथि सत्कार में न करें अपना-पराया

अतिथि के मामले में स्पष्ट रूप से इस बात को समझ लेने की जरूरत है कि जो कोई अतिथि हमारे दर पर आता है उसका आतिथ्य कर हम कोई अहसान नहीं कर रहे हैं बल्कि वह अतिथि हमें उपकृत करने के लिए आया है। अतिथि सेवा का बड़ा भारी पुण्य प्राप्त होता है और इसलिए हमारे घर पर जब भी ... Read More »

संतुलन और साम्य जरूरी है शरीर और प्रकृति के बीच

पिण्ड और ब्रह्माण्ड, शरीर और प्रकृति के बीच गहरा और सीधा रिश्ता है जो हर अंग-प्रत्यंग और परिवेशीय-खगोलीय एवं भौगोलिक घटनाओं को प्रभावित करता है। सीधी और सरल गणित यही है कि जिन तत्वों से जीव बना है उन्हीं तत्वों के विराट स्वरूप में प्रकृति भी अवस्थित है। इसलिए जो परिवर्तन प्रकृति में विराट स्वरूप में चरम व्यापकता के साथ ... Read More »

आत्म तत्व को जानें, भीतर की यात्रा करें

हम सभी लोग आत्म आनंद, शांति और सभी प्रकार की तृप्ति की तलाश में जिन्दगी भर कभी इधर और कभी उधर भटकते रहते हैं पर उसे प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं जिसकी तीव्र चाहत है। मूल कारण यह है कि जो हमारे भीतर है उसे हम बाहर तलाश रहे हैं और जो बाहर है उसे पाने के लिए बरसों ... Read More »