हम इंसान हैं क्या ?

आज के परिप्रेक्ष्य में इंसानियत का जिस हिसाब से क्षरण हो रहा है उसे देख लगता है कि कलियुग की पूरी की पूरी छाया इंसान…

कुछ भी नहीं है असंभव

कोई सा काम हो। इसे करना हो तो सौ रास्ते हैं और नहीं करना हो तो हजार बहाने भी हैं। इन्हीं रास्तों और बहानों के…

मानवता बिना जीवन है बेकार

हर इंसान दूसरे इंसानों, समुदायों और देश के लिए काम आने के लिए बना है। इंसान-इंसान में भेदभाव करना हमारी सभ्यता, संस्कृति और परंपरा का…

हर दिन बनाएँ यादगार

समय की गति को कोई थाम नहीं सकता। युग बीत गए लेकिन समय की रफ्तार यों ही चलती रही है और चलती रहेगी।  इसलिए जो…