Chintan

व्हाट्सअपिया कचरा पात्र

कहा जाता है कि ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती, उसका केवल रूपान्तरण होता है और इसी प्रक्रिया का असर सृजन या संहार के रूप में सामने आता है। समय की नब्ज़ को जानने-पहचानने वाले विवेकवान, ज्ञानी और अनुभवी लोग इस ऊर्जा को स्वयं तथा सृष्टि के कल्याण में लगाते हैं जबकि टाईमपास के लिए ही पैदा हो गए या कि ... Read More »

आत्म आनन्द चाहें, तो दिखावा त्यागें

जिन्दगी भर हम सैकड़ों-हजारों कर्म करते रहते हैं फिर भी बुढ़ापे तक आते-आते न आत्मसंतोष की अनुभूति कर पाते हैं और न ही आनंद की। अधिकांश लोग जिस आनंद को पाने की आकांक्षा रखते हैं उसे मरते दम तक प्राप्त नहीं कर पाते। इनके लिए क्षणिक आनंद का अहसास कराने के बाद फिर जैसे थे वैसे ही हो जाने की ... Read More »

अवसर दें युवाओं को

स्वामी विवेकानंद जयन्ती के दिन हमें युवाओं की खूब याद आती है। इस दिन युवाओं की ही चर्चा होती है और युवाओं के उत्थान से जुड़े आयोजनों की परंपरा रही है। बरसों से हम यही सब कुछ करते आ रहे हैं। कभी स्वामी विवेकानंद के जयघोष लगाने में हम आगे ही आगे रहते हैं और कभी थोड़ा पीछे हट जाते ... Read More »

ये न हों तो, जीने का मजा ही क्या

एकरसता भरा जीवन हमेशा एकतानता से इतना अधिक भरा हुआ रहता है कि किसी को जीने का कोई मजा ही नहीं आ सकता। यही कारण है कि भगवान ने हर क्षण को परिवर्तनशील बनाया है और यह परिवर्तन पिण्ड से लेकर ब्रह्माण्ड तक को प्रभावित करता है। जो बदलाव ब्रह्माण्ड में आते हैं वे जीव मात्र या प्रकृति के किसी ... Read More »

शराब मुक्त भारत के लिए यह है जरूरी …

हम सभी लोग शराब या मदिरा की बुराई करते हैं, सब सार्वजनिक तौर पर शराब बन्दी की बात करते हैं, लेकिन शराबियों के विरूद्ध़ कुछ भी कहने का साहस नहीं रखते, यही कारण है कि शराब का प्रचलन लोक मान्यता पाता जा रहा है। हालात ये हैं कि हर जाति-वर्ग और क्षेत्र के लोगों की शादियों में बाराती प्रोसेशन के ... Read More »

न युग सुधरेगा, न हम

बरसों से कहा जाता रहा है- हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा। पर दशकों बाद भी यह उक्ति सार्थक नहीं हो पायी है और आज भी हम वहीं के वहीं ठहरे हुए हैं, न सुधर पाए हैं, न किसी को सुधार। बचपन से लेकर पचपन तक की बात हो या फिर साठ पार से लेकर शतायु पार तक के लोगों की। कोई ... Read More »

सास हैं या सुरसा

घर-परिवार में सबसे ज्यादा चर्चाओं में रहने वाली कोई किरदार है तो वह है सास।  सास के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का मूल्यांकन करने में बहूओं के सिवा और कोई निर्णायक हो ही नहीं सकता। लेकिन नीर-क्षीर निर्णय तभी संभव है कि जब सास और बहू दोनों ही पक्ष बिना किसी पक्षपात, भेदभाव और पूर्वाग्रह-दुराग्रह के स्वस्थ मूल्यांकन करें। पर ऎसा होना ... Read More »

यह है मोह भंग होने की वजह

दुनिया में हर जीवात्मा और स्थान विशेष का संबंध केवल तभी तक रहता है जब तक कि उसका पूर्वजन्म का कोई लेन-देन पूरा चुकता न हो जाए। बात चाहे पाने की हो अथवा देने की, दोनों ही स्थितियों में एक-दूसरे से अथवा एक का अनेको जीवात्माओं से संबंध बना रहता है। जैसे ही लेन-देने की स्थिति पूर्णता को प्राप्त होती ... Read More »

अर्थहीन हैं संदेशों की ओलावृष्टि

कोई सा नया दिन, उत्सव, पर्व और त्योहार हो या फिर शुभाशुभ प्रसंगों के साल भर बने रहने वाले अवसरों की भरमार।  चाहे हम किसी को जानते हों या नहीं, या और कोई हमें पहचानता तक न हो, हमारा दूर-दूर तक किसी से कोई संबंध न हो, तब भी लाखों लोगों के लिए रोजाना का एक ही काम रह गया ... Read More »

साल खत्म हो रहा है, हम नहीं

सब तरफ आपाधापी मची है, वह भी इस बात को लेकर कि साल आज खत्म हो रहा है और क्या ऎसा कुछ कर डालें कि आने वाले साल में किसी बात का कोई मलाल न रहे। न आत्महीनता रहे, न अपराध बोध, और न ही परंपरागत रूप से जाने कितने साल से चला आ रहा आलस्य, प्रमाद और वो बहुत ... Read More »