लोक संस्कृति का अनूठा महाकुंभ: बेणेश्वर मेला

हमारा देश रंग.बिरंगी संस्कृतियों और अनूठी परम्पराओं का केन्द्र रहा है। युगों.युगों से हमारी सांस्कृतिक धाराएं जन.जन के तन.मन को आह्लादित करती हुई मानव सभ्यता के क्रमिक विकास की भगीरथी बहाती रही हैं। इसी परम्परा में आदिवासी संस्कृति का स्थान न केवल महत्वपूर्ण वरन् विलक्षण है। आदिवासियों की फक्कड़ जीवनशैलीए उदार संस्कृति व लोकानुरंजक परिपाटियां हैंए जिनका दिग्दर्शन भी आनन्द का सागर उमड़ा देने वाला है।

आदिवासी संस्कृति का प्रतिदर्श है मेला
राजस्थानए मध्यप्रदेश और गुजरात के सरहदी इलाके ष्वाग्वर प्रदेशष् की लोक संस्कृति भी पूरी तरह वनवासी रंगों में रंगी हुई है। यहां पुरातन काल से पौराणिक एवं आध्यात्मिक धारा के साथ वनवासी संस्कृति की महक ने सारे क्षेत्र को अद्भुत विलक्षणताओं से परिपूर्ण बना दिया है। आदिवासी संस्कृति और मेलों का बहुत पुराना संबंध रहा है। यहां हर माह कहीं न कहीं मेला.रंगों की मनोहारी छटा बिखरती रही है।