भगवान नहीं, आकाओं के नाम पर लूट मचा रही है भिखारियों की जमातें

नवाचारों से कमा खा रही है मंगतों की जमात

माँगने वालों की दुनिया में अब खूब सारे बदलाव आ गए हैं। पहले हर माँगने वाला भगवान के नाम पर, अल्लाह के नाम पर माँगा करता था और सभी के सामने यही कहकर निकलता था – जो दे उसका भला, जो न दे उसका भला।

अब हालात बदल चुके हैं। मांगने वालों की जनसंख्या बढ़ने लगी है। धर्मस्थलों या दूसरे सार्वजनिक स्थलों, सर्कलों, अस्पतालों, धर्मशालाओं और चौराहों तक जमा मांगने वालों की कतारें और परिभ्रमणरत मांगने वालों सभी की स्थितियां लगभग एक जैसी ही रही हैं।

सारे के सारे जो कुछ मांग रहे हैं वे या तो भगवान के नाम पर मांग रहे हैं या अल्लाह के नाम पर। और साथ में हर वक्त यही उद्घोष कि दे उसका भला, न दे उसका भला।

इन लोगों के लिए भगवान के नाम पर जो कुछ मांगा जाता है उस भगवान को ही हाजिर-नाजिर मानकर सभी के लिए अच्छा ही अच्छा कहा जाता है। कोई दे न दे, सब तरफ यही उद्घोष गूँजता ही रहता है।

किसी से कोई प्रतिशोध या गुस्सा नहीं, सब कुछ लेन-देन होता रहा है भगवान के नाम पर। और जो कुछ भगवान के नाम पर होता है उसमें किसी का कुछ भी बुरा नहीं होता। जो दे उसका भला भी भगवान करता है, और जो न दे उसके लिए कोई बात नहीं।

न कुछ बुरा होगा न बुरा होने की कल्पना की जा सकती है। जो कुछ करना है वह भगवान को करना है। जब भगवान के नाम पर माँगने वाले मांगते हैं तब किसी को कुछ नहीं सोचना या करना पड़ता।

पर आज हालात बदले हुए हैं। आजकल भगवान पर किसी को भरोसा नहीं रहा। अब भगवान को भुला चुके हैं और खूब सारे लोग खुद भगवान हो चुके हैं। हमारे आस-पास खूब सारे लोग हैं जो अपने आपको भगवान मान या मनवा चुके हैं।

इन्हीं भगवानों की संख्या के अनुपात में किसम-किसम के माँगने वाले सर्वत्र पसरते जा रहे हैं और ये मांग भी रहे हैं तो उन लोगों के नाम पर जो उनके अपने भगवान हैं।

आजकल मांगने वाले कहीं भी पाए जा सकते हैं। इनके लिए यह जरूरी नहीं कि कोई निश्चित स्थान ही तय हो। आजकल मांगने वाले कहीं भी पाए जा सकते हैं और कुछ भी मांग कर सकते हैं।

वो जमाना चला गया जब आदमी बिना पुरुषार्थ के कहीं भी किसी से कुछ भी नहीं लेता था और जहां से कुछ लेता था वहां कुछ न कुछ पुरुषार्थ करता ही था और उसके बाद ही परिश्रम का  फल प्राप्त करता था।

उसे बिना परिश्रम या भावना के कहीं से कुछ भी प्राप्त करना गँवारा नहीं था। और यही कारण था कि पुराने जमाने में मांगन से मरना भला जैसे शब्दों का प्रयोग खुल कर होता था।

जो मांगने वाले इंसान के नाम पर मांगते हैं वे कभी भी भगवान या अल्लाह के नाम पर नहीं मांगते। ये अपने आकाओं के नाम पर मांगते हैं और इस तरह मांगते हैं जैसे कि मांगने के लिए ही पैदा हुए हैं और बिना मांगे ये एक दिन नहीं रह सकते।

फिर मांगेंगे भी ऎसे कि जैसे मांगना इनका जन्मसिद्ध अधिकार है और मांगना ही एकमेव कत्र्तव्य कर्म रह गया है जिसके बिना ये जी नहीं सकते। मांगने का अधिकार इस किस्म के लोेगों के लिए वो नैसर्गिक अधिकार है जिसे आने वाले समय में कभी कानूनी मान्यता  पाने के लिए कोई बड़ा संघर्ष हो सकता है। 

आने वाले समय में कोई बड़ी क्रांति होगी तो उन लोगों द्वारा की जाएगी जो मांगने के कर्म को ही अपने जीवन का परम लक्ष्य मान बैठे हैं। 

ये मांगने वाले भी अजीब किस्मों के हैं जो इंसानों के नाम पर मांगते हैं और यहां तक कहने और करने का साहस रखते हैं कि जो दे उसका भला, न दे उसका बुरा।  फिर किसी का बुरा करना हो तो इन मांगने वालों को कोई शरम नहीं है।

मुँहमांगी भीख दो तो खुश, और न दो तो हर किस्म का बुरा करने को हमेशा हर क्षण तत्पर। आजकल हर तरफ इन खतरनाक किस्मों के भिखारियों का चलन चल पड़ा है। हर कोई भिखारी किसी न किसी के नाम पर मांग रहा है और मांग भी ऎसे रहा है कि जैसे कि लेना उसका अधिकार है और देना हमारा।

जो कुछ मांगे, दे दो, ना न कहें, वरना भला होना तो दूर, कहीं बुरा हो सकता है और  इसके लिए तैयार रहें। खूब सारे इंसान भगवान बने हुए हैं, और मांगने वालों की संख्या का तो पार ही नहीं है, सारे के सारे मांग रहे हैं अपने-अपने भगवानों के नाम पर।

1 thought on “भगवान नहीं, आकाओं के नाम पर लूट मचा रही है भिखारियों की जमातें

  1. दे दे, दे दे, दे दे, हमारे आका के नाम पर दे दे,
    देगा तो बचा रहेगा, वरना बहुत बुरा होगा…

    आजकल नई किस्मों के मंगतों का चलन चल पड़ा है। ये भगवान के नाम पर नहीं, अपने आकाओं के नाम पर मांगने लगे हैं।
    जुमला भी अब वो वाला नहीं रहा – दे उसका उसका भला, नहीं दे उसका भी भला।
    अब सब कुछ बदल चुका है – दे उसका भला, नहीं दे उसका तो होगा ही बुरा। कल नहीं आज ही होगा हिसाब उसका। भगवान तो एक ही है जिसके नाम पर भिखारी मांगते रहे हैं। लेकिन अब कलियुग में लोग उसके नाम पर मांगते हैं जिसके आदमी कहे जाते हैं, जो इनका आदमी होने का दम भरता है।
    मांगने वाले भी जानते हैं कि जिसके नाम पर मांग रहे हैं, वह उनसे भी बड़ा भिखारी है, साथ वाले भी भिखारी हैं और ऊपर से लेकर नीचे वाले तक भी।
    पता नहीं सोने की चिड़िया कहे जाने वाले देश में भिखारियों की संख्या निरन्तर क्यों बढ़ती जा रही है। किसी के पास इसका जवाब हो तो कृपया अवश्य अवगत कराएं।

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